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Anil Singhvi Market Strategy: मिडिल-ईस्ट में अचानक बढ़े युद्ध जैसे हालात ने ग्लोबल बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार की चिंता भी बढ़ा दी है. शनिवार सुबह इजराइल द्वारा ईरान पर हमले की शुरुआत के बाद हालात तेजी से बिगड़े और फिर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल समेत खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में मिसाइल हमले किए. अमेरिका, इजराइल और ईरान की तरफ से लगातार आ रहे सख्त बयानों ने तनाव को और बढ़ा दिया है. एयरस्पेस बंद होने और सप्लाई चेन पर खतरे के बीच सबसे बड़ा असर कच्चे तेल पर देखने को मिल रहा है. मार्केट गुरु Anil Singhvi के मुताबिक ऐसे माहौल में बाजार में घबराने के बजाय रणनीति बदलने की जरूरत है, क्योंकि अभी फोकस पैसा कमाने से ज्यादा पूंजी बचाने पर होना चाहिए.
इजराइल के शुरुआती हमले के बाद ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और मिडिल-ईस्ट क्षेत्र के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया. खाड़ी देशों में अमेरिकी बेस पर हमलों की खबरों से ग्लोबल अनिश्चितता बढ़ी है. पूरे क्षेत्र में एयरस्पेस बंद होने से ट्रेड, एविएशन और एनर्जी सप्लाई पर दबाव की आशंका है.
युद्ध का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा क्योंकि ईरान दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 4.5% है. इसके अलावा हॉर्मुज की खाड़ी से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल ट्रांसपोर्ट होता है. यही वजह है कि किसी भी सैन्य तनाव से तेल बाजार तुरंत संवेदनशील हो जाता है.
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है और इसमें से 40-50% सप्लाई हॉर्मुज रूट से आती है. LNG आयात का बड़ा हिस्सा भी इसी रास्ते से होता है. अगर तनाव लंबा चलता है तो तेल महंगा रहने, रुपये पर दबाव बढ़ने, महंगाई और करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने का खतरा रहेगा. लंबे युद्ध की स्थिति में GDP ग्रोथ और एक्सपोर्ट्स पर भी असर पड़ सकता है.
शुक्रवार को बाजार के आखिरी आधे घंटे में आई तेज गिरावट इसी आशंका का संकेत थी. निफ्टी करीब 150 अंक और बैंक निफ्टी 350 अंक टूटा था. अनिल सिंघवी का कहना है कि जिन्होंने उस समय बिकवाली की, उन्होंने वीकेंड रिस्क को सही समझा. हालांकि पहले से आई गिरावट के कारण आज बाजार में पैनिक की बजाय नियंत्रित कमजोरी देखने को मिल सकती है.
ग्लोबल बाजारों की प्रतिक्रिया अब तक सीमित रही है क्योंकि पिछले कई हफ्तों से युद्ध की आशंका बनी हुई थी. क्रूड, सोना और चांदी में भी अभी अत्यधिक उछाल नहीं आया है. बाजार यह मानकर चल रहा है कि संघर्ष लंबा नहीं खिंचेगा और किसी बड़े एस्केलेशन की संभावना फिलहाल सीमित है.
एयरस्पेस बंद होने से एविएशन कंपनियों जैसे InterGlobe Aviation और SpiceJet पर दबाव रह सकता है. ट्रैवल और होटल सेक्टर भी कमजोर रह सकते हैं. तेल महंगा होने से HPCL, BPCL और IOC जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव बन सकता है, जबकि ONGC और Oil India को ऊंचे क्रूड से सपोर्ट मिल सकता है. डिफेंस शेयरों में सेंटिमेंट मजबूत रह सकता है, जबकि सप्लाई चेन जोखिम से ग्लोबल एक्सपोजर वाली कंपनियों पर असर संभव है. मिडिल-ईस्ट ऑर्डरबुक के कारण Larsen & Toubro पर शॉर्ट टर्म दबाव आ सकता है, लेकिन गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौका बन सकती है.
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अनिल सिंघवी के मुताबिक मौजूदा माहौल में आक्रामक ट्रेडिंग से बचना बेहतर रहेगा. स्टॉपलॉस का सख्ती से पालन करें, इंट्राडे और ओवरनाइट पोजीशन सीमित रखें और तेजी से पैसा बनाने की कोशिश से बचें. जोखिम क्षमता का आकलन करना सबसे जरूरी है.
मार्केट गुरु का मानना है कि युद्ध बाजार के इतिहास में नए नहीं हैं और हर बड़े भू-राजनीतिक संकट के बाद बाजार रिकवर हुआ है. निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की क्वालिटी जांचनी चाहिए और बार-बार उतार-चढ़ाव देखकर घबराने से बचना चाहिए. मजबूत डेटा, बेहतर GDP ग्रोथ, स्थिर GST कलेक्शन और IT सेक्टर में सुधार बाजार के लिए सपोर्ट फैक्टर बने हुए हैं.
तनाव के कारण कीमती धातुओं में तेजी आ सकती है, लेकिन इस स्तर पर नई खरीदारी से बचने की सलाह है. अगर युद्ध से जुड़े तनाव कम होने लगें और क्रूड स्थिर हो जाए तो मुनाफावसूली करना बेहतर रणनीति होगी.
आज के लिए निफ्टी का अगला सपोर्ट 24825-25050 की रेंज में माना जा रहा है. इसके नीचे 24575-24675 और फिर 24325-24475 मजबूत सपोर्ट जोन रहेगा. बैंक निफ्टी के लिए 59900-60150 पहला अहम सपोर्ट है, जबकि 59500-59800 और 58900-59150 मजबूत खरीदारी वाले स्तर माने जा रहे हैं. निफ्टी 24800 और बैंक निफ्टी 59850 के नीचे क्लोजिंग कमजोरी बढ़ा सकती है.
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