&format=webp&quality=medium)
CLSA, Jefferies, UBS की शेयर बाजार स्ट्रैटेजी पर अहम रिपोर्ट. (प्रतीकात्मक तस्वीर: AI/ChatGPT)
Indian Stock Market Strategy: भारतीय शेयर बाजार फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, लेकिन ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेस को आने वाले समय में बड़े मूव की उम्मीद दिख रही है. CLSA, Jefferies और UBS की ताजा रिपोर्ट्स में Midcap Stocks, PSU सेक्टर, Capex थीम और चुनिंदा कंपनियों को लेकर बड़े संकेत दिए गए हैं.
खास बात यह है कि जहां CLSA को Midcap Index में बड़ा ब्रेकआउट दिख रहा है, वहीं Jefferies ने सरकार के खर्च और तेल की कीमतों को लेकर चिंता जताई है. दूसरी तरफ UBS ने अपने इंडिया पोर्टफोलियो में कई बड़े बदलाव किए हैं.
CLSA का कहना है कि फिलहाल निफ्टी एक तय दायरे में कारोबार कर रहा है. ब्रोकरेज के मुताबिक Nifty 2024 से अब तक 21,743-21,800 और 26,270-26,340 की बड़ी रेंज में फंसा हुआ है.
हालांकि CLSA को Midcap Index में मजबूत तेजी के संकेत दिख रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक NSE Midcap Index अपने consolidation pattern से breakout के बेहद करीब है. अगर यह ब्रेकआउट कन्फर्म होता है, तो इंडेक्स 77,687 से 78,000 तक पहुंच सकता है.
ये भी पढ़ें: Q4 Dividend Stock: 22% बढ़ा मुनाफा, ₹46/शेयर फाइनल डिविडेंड का ऐलान; 11% उछलकर शेयर 52-वीक हाई पर
CLSA ने Dixon Technologies को अपने पसंदीदा BUY कैंडिडेट्स में शामिल किया है. ब्रोकरेज के मुताबिक अगर शेयर ₹11,845 के ऊपर बंद होता है, तो जनवरी से मई के बीच बने बेस पैटर्न से ब्रेकआउट कन्फर्म हो जाएगा. इसके बाद शेयर में टर्नअराउंड सेटअप मजबूत होगा और शुरुआती टारगेट ₹15,000 तक देखने को मिल सकता है.
| Stock | Breakout Level | Target |
| Dixon Technologies | ₹11,845 | ₹15,000 |
Jefferies ने अपनी इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में सरकार के फिस्कल प्रेशर को लेकर चिंता जताई है. ब्रोकरेज का मानना है कि पेट्रोलियम और फर्टिलाइजर सब्सिडी बढ़ने के साथ ऑयल टैक्स रेवेन्यू में कमी सरकार के वित्तीय संतुलन पर दबाव डाल सकती है.
LIVE TV:
Jefferies के मुताबिक इसका कुल असर ₹1.25 लाख करोड़ से ₹1.5 लाख करोड़ तक हो सकता है, जिसे सरकार, राज्यों और ऑयल कंपनियों के बीच बांटना पड़ सकता है.
ब्रोकरेज का कहना है कि इस दबाव की भरपाई के लिए सरकार नॉन-डिफेंस कैपेक्स में कटौती कर सकती है. ऐसे में FY27 में नॉन-डिफेंस कैपिटल एक्सपेंडिचर फ्लैट रह सकता है.
ये भी पढ़ें: बकरीद पर शेयर बाजार में 'नो ट्रेडिंग'! 28 मई को बंद रहेंगे NSE-BSE; अगले महीने भी है एक और छुट्टी
Jefferies का मानना है कि मौजूदा रिटेल फ्यूल प्राइस पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का ब्रेकइवन क्रूड ऑयल के $85-87 प्रति बैरल के बीच है. यानी अगर कच्चा तेल महंगा रहता है, तो फ्यूल की कीमतों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है. इसके अलावा सरकार विनिवेश पर ज्यादा फोकस कर सकती है ताकि फिस्कल प्रेशर को संभाला जा सके.
UBS ने अपने इंडिया पोर्टफोलियो में कई अहम बदलाव किए हैं. ब्रोकरेज ने ABB India को 3% एलोकेशन और Triveni Turbine को 2% वेट के साथ पोर्टफोलियो में शामिल किया है. वहीं Bharat Electronics और Cognizant Technology Solutions को पोर्टफोलियो से बाहर किया गया है. इसके अलावा UBS ने Titan Company और NTPC में अपना एलोकेशन बढ़ाया है. दूसरी तरफ Reliance Industries और Thermax में हिस्सेदारी घटाई गई है.
| UBS Portfolio Changes | Action |
| ABB India | Added |
| Triveni Turbine | Added |
| Bharat Electronics | Removed |
| Cognizant Technology | Removed |
| Titan Company | Weight Increased |
| NTPC | Weight Increased |
| Reliance Industries | Weight Reduced |
| Thermax | Weight Reduced |
ये भी पढ़ें: कल 10% भागा, आज नए हाई पर डिफेंस स्टॉक; अब दिग्गज ब्रोकरेज ने दी 'BUY' रेटिंग, चेक करें नया टारगेट
तीनों ग्लोबल ब्रोकरेज की रिपोर्ट्स से साफ है कि बाजार फिलहाल सेलेक्टिव बाइंग फेज में है. मिडकैप्स में मोमेंटम बन रहा है, जबकि सरकार के फिस्कल मैनेजमेंट और कच्चे तेल की कीमतों में आने वाले समय में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं. डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल्स और PSU सेक्टर आने वाले समय में निवेशकों के रडार पर बने रह सकते हैं.