Market Wrap: मार्च में आई रिकवरी, क्या अप्रैल में Bull Mode में जाएंगे शेयर बाजार?

Market Wrap: आउटलुक की जहां तक बात करें तो अप्रैल सीरीज पर फोकस है. कई ब्रोकरेज हाउसेज का मानना है कि ग्लोबल बाजारों में जो दिक्कतें हैं, वो एक्चुअली भारत के लिए पॉजिटिव हो सकती हैं.
Market Wrap: मार्च में आई रिकवरी, क्या अप्रैल में Bull Mode में जाएंगे शेयर बाजार?

Market Wrap: 5 महीनों के करेक्शन के बाद मार्च सीरीज मार्केट इन्वेस्टर्स के लिए राहत लेकर आया. अब फिर से रिकवरी दिख रही है. मंथली एक्सपायरी वाला हफ्ता था. बाजार में रिकवरी थी, लेकिन प्रॉफिटबुकिंग के चलते थोड़ी वॉलेटिलटी भी रही. ग्लोबल बाजार फेवर में नहीं थे, लेकिन FIIs की खरीदारी से सेंटीमेंट बढ़िया था.

FIIs की खरीदारी से चढ़ा बाजार

मार्च सीरीज में सेंसेक्स-निफ्टी ने ऑलमोस्ट 6 से 7% की गेन दर्ज की है. निफ्टी इस हफ्ते 23,700 के पास गया था. बाजार के लिाजाए सबसे बड़ा ट्रिगर्स FIIs की Buying थी. 5 महीने लगातार बिकवाली के बाद मार्च में विदेशी निवेशकों की ओर से 6367 करोड़ रुपए की खरीदारी की गई है. और लगातार 6-7 दिनों से FIIs कैश मार्केट में खरीदारी कर रहे हैं. मंथली एक्सपायरी पर इन्होंने 11 हजार 1 सौ ग्यारह करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे.

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अमेरिकी बाजारों में उतार-चढ़ाव

पहले तो US का कंज्यूमर कॉन्फिडेंस मार्च में 4 साल के निचले स्तर पर आ गया है और ये लगातार चौथे महीने की गिरावट है. ट्रंप ने ऑटो सेक्टर पर भी अपनी चाबुक चला दी है. उन्होंने अमेरिका से बाहर बनने वाली गाड़ियों पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जिसके बाद ऑटो स्टॉक्स में भी गिरावट दिखी थी और ग्लोबल मार्केट्स का सेंटीमेंट तो जो खराब हुआ सो अलग.

कमोडिटी मार्केट में क्या हुआ?

कमोडिटीज़ की बात भी कर लेते हैं- ग्लोबल अनिश्चितता को देखते हुए इन्वेस्टर्स गोल्ड में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं, जिससे कि कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंच रही हैं. इस हफ्ते ग्लोबल सोना पहली बार 3100 डॉलर पर पहुंचा था. सिल्वर भी 31 डॉलर के ऊपर था. MCX पर सोना 89,000 के आसपास है और चांदी 1 लाख रुपये के ऊपर चल रही है. उधर, क्रूड में एक्शन गायब दिखा. 1 महीने की ऊंचाई पर कच्चे तेल में सुस्ती दिखाई दी. ब्रेंट क्रूड 74 डॉलर के आसपास था. यूएस की 10ईयर की बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स दोनों ही थोड़ा फिसलते नजर आए.

आउटलुक की जहां तक बात करें तो अप्रैल सीरीज पर फोकस है. कई ब्रोकरेज हाउसेज का मानना है कि ग्लोबल बाजारों में जो दिक्कतें हैं, वो एक्चुअली भारत के लिए पॉजिटिव हो सकती हैं.

आगे का क्या है आउटलुक?

अप्रैल की सीरीज आम तौर पर बाजार के लिए बेहद मजबूत होती है. इसमें पिछले 10 में से 8 साल पॉजिटिव रिटर्न मिला है, तो इस सीरीज में तेजी बढ़ सकती है. अगर बाकी ट्रिगर्स की बात करें तो ऐसा लग रहा है कि करेक्शन के बाद FIIs फिलहाल खरीदारी के मूड में हैं. ये बड़ा ड्राइविंग फैक्टर रहेंगे.

दूसरा, अगले हफ्ते 2 अप्रैल से अमेरिका भारत पर Reciprocal Tariff लगाने की बात कर चुका है, लेकिन ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि द्विपक्षीय बातचीत में भारत ने ऐसा कहा है कि वो यूस के लिए अपने कुछ इंपोर्ट्स में कटौती कर सकता है. तो ऑफकोर्स ये अगले हफ्ते के लिए बड़ा ट्रिगर होने वाला है. बाकी, नया महीना है, नया फाइनेंशियल ईयर है, तो मैक्रोइकोनॉमिक डेटा अहम रहेंगे. रुपया, क्रूड और डॉलर की चाल पर भी बाजार की नजर होगी.

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