LIC का IPO ऐसे करा पाएंगे सबस्‍क्राइब, जानें किसे होगा सबसे ज्‍यादा मुनाफा

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC का IPO आने वाला है. सरकार कुछ कानूनी प्रावधान करने के बाद LIC का IPO लॉन्‍च करेगी. LIC का IPO कोई भी खरीद सकता है. इसके लिए Demat खाता होना जरूरी है.
LIC का IPO ऐसे करा पाएंगे सबस्‍क्राइब, जानें किसे होगा सबसे ज्‍यादा मुनाफा

इससे न सिर्फ IPO बल्कि म्यूचुअल फंड और सोने में खरीदारी हो सकेगी. (Dna)

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC का IPO आने वाला है. सरकार कुछ कानूनी प्रावधान करने के बाद LIC का IPO लॉन्‍च करेगी. LIC का IPO कोई भी खरीद सकता है. इसके लिए Demat खाता होना जरूरी है. बिना Demat के शेयर नहीं मिलेगा. बाजार नियामक सेबी ने पहले ही यह नियम बना रखा है, जिसमें इलेक्‍ट्रॉनिक तरीके से ही शेयर खरीदे जा सकते हैं. LIC का IPO अगले साल आने की उम्‍मीद है.

कैसे खुलेगा खाता
इसके लिए आपको किसी ब्रोकरेज हाउस में खाता खुलवाना होगा. बैंक भी Demat खाते की सुविधा देते हैं. फिर यह Demat खाता आपके बैंक खाते से जुड़ जाएगा. IPO खुलने पर आप इसे सबस्‍क्राइब कर सकते हैं. हालांकि इसमें फिक्‍स शेयरों का लॉट होता है. इससे न सिर्फ IPO बल्कि म्यूचुअल फंड और सोने में खरीदारी हो सकेगी.

फिच ने बताया फायदा
इस बीच, फिच (Fitch) रेटिंग्स का मानना है कि LIC के प्रस्तावित IPO से देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी की जवाबदेही और पारदर्शिता में सुधार होगा. फिच रेटिंग्स ने कहा कि LIC के IPO से पूरे बीमा उद्योग को फायदा होगा. फिच ने कहा कि इसका फायदा संभवत: पूरे बीमा उद्योग को मिलेगा.

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प्राइवेट बीमा कंपनियां
इंडस्‍ट्री अधिक विदेशी धन आकर्षित कर पाएगी जिससे देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह भी बढ़ेगा. Fitch ने कहा कि उसे उम्मीद है कि एक बार LIC का IPO आने के बाद निजी क्षेत्र की कुछ बीमा कंपनियां भी अंतराल में अपने शेयरों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने को प्रोत्साहित होंगी.

बजट में ऐलान
हालांकि, मौजूदा नियमनों के तहत सभी बीमा कंपनियों के लिए सूचीबद्ध होना अनिवार्य नहीं है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने 2020-21 के बजट भाषण में घोषणा की थी कि सरकार की विनिवेश पहल के तहत LIC को लिस्‍ट किया जाएगा.

सरकार की 100% हिस्‍सेदारी
अभी एलआईसी में सरकार की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है. फिच ने कहा कि सार्वजनिक रूप से एलआईसी को अधिक कड़े खुलासा नियमों को पूरा करना होगा. इससे कंपनी के भीतर ही अनुपालन और जवाबदेही का मजबूत ट्रेंड बनेगा.