जून में बदल जाता है शेयर बाजार का खेल? 10 साल के आंकड़ों ने निफ्टी से स्मॉलकैप तक दिखाया बड़ा ट्रेंड

जून महीने की शुरुआत के साथ निवेशकों की नजर बाजार की चाल पर है. पिछले 10 सालों के आंकड़े बताते हैं कि जून का महीना शेयर बाजार के लिए अक्सर अच्छा रहा है. निफ्टी से लेकर मिडकैप, स्मॉलकैप और कई सेक्टोरल इंडेक्स में इस महीने बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है.
जून में बदल जाता है शेयर बाजार का खेल? 10 साल के आंकड़ों ने निफ्टी से स्मॉलकैप तक दिखाया बड़ा ट्रेंड

जून में बदल जाता है शेयर बाजार का खेल? प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

जून महीने की शुरुआत हो चुकी है और इसके साथ ही निवेशकों के मन में एक सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इस महीने में शेयर बाजार का प्रदर्शन कैसा रहता है. इसी को समझने के लिए पिछले 10 सालों के आंकड़ों पर नजर डाली गई.

डेटा में जो तस्वीर सामने आई है, वह बाजार के लिए काफी हद तक सकारात्मक दिखाई देती है. खास बात यह है कि बड़े शेयरों से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप तक, लगभग हर कैटेगरी में जून का रिकॉर्ड अच्छा रहा है.

निफ्टी का जून में कैसा रहा रिकॉर्ड?

जी बिजनेस की रिसर्च के मुताबिक, अगर निफ्टी की बात करें तो पिछले 10 सालों में 6 बार जून का महीना निफ्टी के लिए फायदे वाला रहा है. औसतन देखें तो इस दौरान निफ्टी में 1.5 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली है.

यानी हर साल तस्वीर एक जैसी नहीं रही, लेकिन कुल मिलाकर जून का महीना निफ्टी के लिए सकारात्मक रहा है. यही वजह है कि कई निवेशक इस महीने के ऐतिहासिक प्रदर्शन पर नजर रखते हैं.

मिडकैप और स्मॉलकैप ने दिखाया ज्यादा दम

निफ्टी मिडकैप इंडेक्स का प्रदर्शन जून में और भी बेहतर दिखाई देता है. पिछले 10 सालों में यह इंडेक्स 7 बार बढ़त के साथ बंद हुआ है. औसतन इसमें 2.5 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली.

वहीं स्मॉलकैप इंडेक्स का रिकॉर्ड भी मजबूत रहा है. यह भी 10 में से 7 बार जून में पॉजिटिव रहा है और औसतन करीब 3.5 फीसदी की बढ़त दर्ज की है.

आंकड़ों को देखें तो एक दिलचस्प बात सामने आती है. जितना छोटा इंडेक्स, उतना ज्यादा औसत रिटर्न. निफ्टी में जहां करीब 1.5 फीसदी की औसत तेजी रही, वहीं मिडकैप में यह 2.5 फीसदी और स्मॉलकैप में 3.5 फीसदी तक पहुंच गई.

सेक्टरों में भी दिखी अच्छी तेजी

सिर्फ मुख्य इंडेक्स ही नहीं, कई सेक्टरों ने भी जून में अच्छा प्रदर्शन किया है. आंकड़ों के मुताबिक रियल्टी और फार्मा सेक्टर का औसत प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा है. इन दोनों इंडेक्स में जून के दौरान 3 फीसदी से ज्यादा की औसत बढ़त देखने को मिली.

इसके अलावा ऑटो, आईटी, एफएमसीजी, एनर्जी, बैंक और मेटल सेक्टर में भी औसतन 1 से 2 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई. इससे पता चलता है कि जून का सकारात्मक असर बाजार के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिला है.

सबसे ज्यादा बार कौन से इंडेक्स रहे पॉजिटिव?

अगर उन इंडेक्स की बात करें जो पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा बार जून में बढ़त के साथ बंद हुए हैं, तो फार्मा और मेटल सेक्टर सबसे आगे नजर आते हैं.

निफ्टी फार्मा और निफ्टी मेटल इंडेक्स 10 में से 8 बार जून महीने में पॉजिटिव रहे हैं. वहीं निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 10 में से 7 बार बढ़त के साथ बंद हुए हैं. यह आंकड़े बताते हैं कि कुछ सेक्टरों ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है और जून में उनकी मजबूती साफ दिखाई देती है.

जून में कोई बड़ा कमजोर सेक्टर नहीं दिखा

डेटा की सबसे खास बात यह रही कि ऐसा कोई इंडेक्स सामने नहीं आया जो पिछले 10 सालों में कम से कम 7 बार जून में गिरावट के साथ बंद हुआ हो. यानी बाजार के अलग-अलग हिस्सों को देखें तो जून का महीना कुल मिलाकर सकारात्मक ही रहा है. यही वजह है कि ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर जून को बाजार के लिए एक मजबूत महीना माना जा सकता है.

क्या कहते हैं आंकड़े?

पिछले 10 सालों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो जून का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छा साबित हुआ है. निफ्टी, मिडकैप और स्मॉलकैप तीनों इंडेक्स में बढ़त का रुझान दिखाई देता है. वहीं फार्मा, मेटल, रियल्टी, ऑटो और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है. हालांकि बाजार की चाल हर साल अलग-अलग वजहों से बदल सकती है, लेकिन ऐतिहासिक आंकड़े फिलहाल जून के पक्ष में नजर आते हैं.

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