IT Stocks: क्या डर के बीच बन रहा बड़ा मौका? वैल्युएशन, कंपनियों की कमाई और इतिहास दे रहे हैं खरीदारी के संकेत

IT Stocks: अमेरिका में मंदी की आशंका, टेक बजट में कटौती और AI को लेकर चिंताओं ने IT स्टॉक्स पर दबाव बनाया है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि सेक्टर की कमाई और मुनाफा लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बने हुए हैं. वैल्युएशन लॉन्ग टर्म ऐवरेज के मुकाबले नीचे पहुंच गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या IT स्टॉक्स में अब खरीदारी का सुनहरा मौका बन रहा है?
IT Stocks: क्या डर के बीच बन रहा बड़ा मौका? वैल्युएशन, कंपनियों की कमाई और इतिहास दे रहे हैं खरीदारी के संकेत

इस समय आईटी इंडेक्स 20X EPS पर उपलब्ध है जो लॉन्ग टर्म ऐवरेज वैल्युएशन से नीचे है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

IT Stocks: पिछले कुछ सालों में अगर किसी सेक्टर ने निवेशकों को सबसे ज्यादा निराश किया है, तो वह IT सेक्टर है. एक समय था जब TCS, Infosys, HCL Tech और Wipro जैसे शेयर निवेशकों के पसंदीदा हुआ करते थे. कोविड के बाद डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की लहर में IT कंपनियों के शेयरों ने जबरदस्त रिटर्न दिए. लेकिन उसके बाद तस्वीर बदल गई.

अमेरिका में मंदी की आशंका, कंपनियों द्वारा टेक्नोलॉजी खर्च में कटौती, AI से पारंपरिक IT सेवाओं पर खतरे जैसी खबरों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया. नतीजा यह हुआ कि IT शेयरों में लगातार दबाव देखने को मिला और कई बड़े शेयर अपने उच्च स्तरों से काफी नीचे आ गए. लेकिन सवाल यह है कि क्या बाजार IT सेक्टर को लेकर जरूरत से ज्यादा नकारात्मक हो गया है? क्या यह वही समय है जब समझदार निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी शुरू करते हैं? या फिर अभी और गिरावट बाकी है?

आइए IT Sector को लेकर आपके हर सवाल को समझने की कोशिश करते हैं. यह पूरी रिपोर्ट SAMCO Securities के रिसर्च प्रमुख अपूर्व सेठ की रिपोर्ट पर आधारित है.

सबसे पहले जानिए डर की वजह क्या है?

आज IT सेक्टर को लेकर निवेशकों के मन में मुख्य रूप से तीन चिंताएं हैं.

  • पहली: अमेरिका की अर्थव्यवस्था में सुस्ती की आशंका. भारतीय IT कंपनियों का बड़ा हिस्सा अमेरिकी ग्राहकों से आता है. अगर वहां की कंपनियां खर्च कम करती हैं तो भारतीय IT कंपनियों के ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं.
  • दूसरी: टेक्नोलॉजी बजट में देरी. कई वैश्विक कंपनियां नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने में सावधानी बरत रही हैं.
  • तीसरी: सबसे चर्चित चिंता AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है. निवेशकों को लगता है कि AI आने से पारंपरिक IT सेवाओं की जरूरत कम हो सकती है.

यही कारण है कि बाजार IT शेयरों को कम वैल्युएशन देने लगा है.

क्या IT कंपनियों का बिजनेस भी कमजोर हो रहा है?

यहीं पर कहानी दिलचस्प हो जाती है.

आमतौर पर जब किसी सेक्टर को लेकर इतना डर होता है तो उसकी कमाई और मुनाफा भी गिरने लगता है. लेकिन भारतीय IT सेक्टर में ऐसा नहीं हुआ है. Nifty IT कंपनियों की कुल तिमाही बिक्री मार्च 2021 के लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर हालिया तिमाही (Q4FY26) में 2.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई है. वहीं सेक्टर का तिमाही मुनाफा भी लगभग 35,000 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. यानि निवेशकों को जिस "कमाई में गिरावट" का डर था, वह अभी तक आंकड़ों में दिखाई नहीं दे रहा.

हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पहले जैसी तेज ग्रोथ जरूर नहीं है, लेकिन बिजनेस पूरी तरह पटरी से नहीं उतरा है. कठिन माहौल, प्रोजेक्ट में देरी और ग्राहकों की सतर्कता के बावजूद कंपनियां अच्छा मुनाफा कमा रही हैं.

फिर शेयर नीचे क्यों हैं?

क्योंकि शेयर बाजार हमेशा वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य को देखता है. निवेशकों को डर है कि आने वाले समय में ग्रोथ और धीमी हो सकती है. इसलिए वे अभी IT शेयरों को हाई वैल्युएशन देने के लिए तैयार नहीं हैं. यही वजह है कि कमाई रिकॉर्ड स्तर पर होने के बावजूद वैल्युएशन लगातार घटा है.

इसे आसान भाषा में समझते हैं

मान लीजिए कोई कंपनी पहले 25X PE पर ट्रेड हो रही थी और आज 20X PE पर आ गई है, जबकि उसका मुनाफा बढ़ रहा है. इसका मतलब है कि बाजार उस कंपनी के भविष्य को लेकर ज्यादा आशावादी नहीं है. लेकिन इतिहास बताता है कि जब कमाई बढ़ती रहे और वैल्युएशन घट जाए, तो भविष्य में अच्छे रिटर्न की संभावना बन सकती है.

वैल्युएशन कितना आकर्षक है?

पिछले दो दशकों में Nifty IT का औसत (मीडियन) PE लगभग 22.2X रहा है. आज यह लगभग 20X EPS पर उपलब्ध है जो लॉन्ग टर्म ऐवरेज वैल्युएशन से नीचे है. ऐसे वैल्युएशन पहले भी तब देखने को मिले थे जब बाजार में भारी निराशा थी, जैसे कि 2008 में Global Financial Crisis, Eurozone Debt Crisis और कोविड के बाद टेक्नोलॉजी करेक्शन के दौरान.

इसका मतलब यह नहीं कि शेयर कल से भागने लगेंगे, लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि बाजार काफी हद तक नकारात्मकता को कीमतों में शामिल कर चुका है.

'टेक्निकल चार्ट क्या कह रहे हैं?

टेक्निकल नजरिए से भी कुछ दिलचस्प संकेत मिल रहे हैं.

Nifty IT अपने 2025 के उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुका है और लगभग 26,000 के महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के पास कारोबार कर रहा है. यह वही स्तर है जिसने पहले भी कई बार सपोर्ट और रेजिस्टेंस का काम किया है. इसके अलावा मोमेंटम इंडिकेटर्स RSI में पॉजिटिव डाइवर्जेंस देखने को मिली है. आसान भाषा में कहें तो कीमतें नई गिरावट दिखा रही थीं, लेकिन मोमेंटम उतना कमजोर नहीं दिख रहा था. यह अक्सर इस बात का संकेत होता है कि बिकवाली का दबाव कम हो रहा है. हालांकि टेक्निकल इंडिकेटर्स कभी भी 100% गारंटी नहीं देते, लेकिन वे ऐसे क्षेत्र जरूर बताते हैं जहां जोखिम के मुकाबले संभावित रिटर्न बेहतर हो सकता है.

क्या बड़े निवेशक पहले ही IT से दूर जा चुके हैं?

यह शायद सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक है.

Nifty 500 में IT सेक्टर का वजन घटकर लगभग 5.5% रह गया है, जबकि इसका लॉन्ग टर्म ऐवरेज करीब 10.5% रहा है. यह एक दशक से अधिक समय का सबसे निचला स्तर है. इसका मतलब है कि निवेशकों ने पिछले कुछ वर्षों में IT सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी काफी कम कर दी है.

अब सोचिए.

जब कोई सेक्टर सभी का पसंदीदा होता है, तब उसमें अक्सर ज्यादा उम्मीदें जुड़ जाती हैं. लेकिन जब ज्यादातर लोग उस सेक्टर से दूर हो जाएं, तब कई बार वही सेक्टर भविष्य में अच्छा प्रदर्शन करता है. बाजार में नेतृत्व हमेशा एक जैसा नहीं रहता. कल जो सेक्टर सबसे मजबूत था, वह कुछ समय बाद कमजोर हो सकता है और जो आज कमजोर दिख रहा है, वह कल का नया लीडर बन सकता है.

रुपए और IT सेक्टर का क्या रिश्ता है?

कई निवेशकों को लगता है कि रुपए का कमजोर होना IT कंपनियों के लिए हमेशा अच्छी खबर होती है, क्योंकि इन कंपनियों की कमाई डॉलर में होती है. डॉलर मजबूत होने पर रुपए में उनकी आय बढ़ जाती है. लेकिन इतिहास कुछ अलग कहानी बताता है.

1996 के बाद के आंकड़ों के अनुसार, जब रुपए में लगातार कमजोरी आई, तब Nifty IT का औसत वार्षिक रिटर्न केवल 1.6% रहा. इसके विपरीत, जब रुपया स्थिर रहा तो सेक्टर ने लगभग 29% और जब रुपया मजबूत हुआ तो करीब 14% सालाना रिटर्न दिए.

ऐसा क्यों?

क्योंकि रुपए का कमजोर होना अक्सर वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता का संकेत भी होता है. ऐसे समय में ग्राहक खर्च कम कर देते हैं और नए प्रोजेक्ट्स टल जाते हैं. यानी केवल कमजोर रुपया देखकर IT शेयर खरीदना सही रणनीति नहीं हो सकती.

इस समय निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या अभी IT शेयर खरीदने चाहिए?

अगर आपका निवेश नजरिया 3 से 5 साल का है, तो वर्तमान वैल्युएशन आकर्षक दिख रहे हैं. लेकिन एकमुश्त निवेश की बजाय चरणबद्ध निवेश बेहतर रणनीति हो सकती है.

क्या AI आईटी कंपनियों के लिए खतरा है?

AI कुछ पारंपरिक सेवाओं को प्रभावित कर सकता है, लेकिन बड़ी IT कंपनियां खुद AI आधारित सेवाओं में निवेश कर रही हैं. इसलिए यह खतरा होने के साथ-साथ अवसर भी है.

क्या सेक्टर में तुरंत तेजी आ जाएगी?

जरूरी नहीं है क्योंकि बाजार का सेंटिमेंट बदलने में समय लग सकता है. इसलिए धैर्य रखने वाले निवेशकों को ही इस सेक्टर पर नजर रखनी चाहिए.

सबसे बड़ा जोखिम क्या है?

अगर अमेरिका और यूरोप में टेक्नोलॉजी खर्च लंबे समय तक कमजोर रहता है, तो IT कंपनियों की ग्रोथ पर दबाव बना रह सकता है.

जाते जाते...

आज IT सेक्टर ऐसी स्थिति में खड़ा है जहां एक तरफ डर, निराशा और कमजोर भावनाएं हैं, जबकि दूसरी तरफ मजबूत कमाई, रिकॉर्ड मुनाफा और आकर्षक वैल्युएशन दिखाई दे रहे हैं. यही वजह है कि कई मार्केट एक्सपगर्ट्स मानते हैं कि IT सेक्टर अब "हेटेड" सेगमेंट बन चुका है. बाजार में अक्सर सबसे अच्छे अवसर वहीं पैदा होते हैं जहां अधिकांश लोग देखने तक को तैयार नहीं होते.

हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि IT सेक्टर में नया बुल रन शुरू हो गया है, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि लंबे समय के निवेशकों के लिए यह सेक्टर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा दिलचस्प दिखाई दे रहा है. इस बात को भी याद रखना जरूरी है कि शेयर बाजार में सबसे ज्यादा पैसा अक्सर तब बनता है जब आप भीड़ के साथ नहीं, बल्कि तथ्यों के साथ चलते हैं. और इस समय IT सेक्टर को लेकर तथ्य और भावनाएं एक-दूसरे से बिल्कुल अलग कहानी कह रही हैं.

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