क्विक कॉमर्स से जुड़ी बड़ी खबर! Zepto के IPO को SEBI से मिली हरी झंडी?

सूत्रों के अनुसार, क्विक कॉमर्स दिग्गज Zepto के IPO को SEBI से हरी झंडी मिल गई है. कंपनी बड़ी रकम जुटाने की तैयारी में है और यह भारत की पहली 'प्योर प्ले' क्विक कॉमर्स लिस्टिंग होगी.
क्विक कॉमर्स से जुड़ी बड़ी खबर! Zepto के IPO को SEBI से मिली हरी झंडी?

Zepto के IPO को SEBI से मिली हरी झंडी?

भारतीय शेयर बाजार में एक और बड़े धमाके की तैयारी हो चुकी है. जी बिजनेस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि क्विक कॉमर्स की दुनिया में तहलका मचाने वाले स्टार्टअप Zepto के आईपीओ (IPO) को मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने औपचारिक मंजूरी दे दी है.

शुक्रवार को आई इस खबर के बाद से निवेशकों और स्टार्टअप जगत में उत्साह की लहर है. जेप्टो न केवल भारत का सबसे तेजी से बढ़ने वाला स्टार्टअप है, बल्कि यह शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली पहली 'प्योर प्ले' क्विक कॉमर्स कंपनी भी बनने जा रही है.

लिस्टिंग का टाइमलाइन

सूत्रों के अनुसार, सेबी से मंजूरी मिलने के बाद अब जेप्टो की टीम अगले कुछ महीनों के भीतर अपना अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) दाखिल करने पर काम करेगी. अगर ऐसा होता है, तो 2020 में शुरू हुई यह कंपनी भारत के इतिहास में सबसे कम समय में आईपीओ लाने वाले स्टार्टअप्स की लिस्ट में शामिल हो जाएगी.

सिंगापुर से भारत वापसी और मजबूत वैल्यूएशन

जेप्टो ने इस साल जनवरी में अपना डोमिसाइल (मुख्यालय) सिंगापुर से वापस भारत शिफ्ट किया था, ताकि लिस्टिंग की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके. अक्टूबर 2025 में हुए फंडिंग राउंड में जेप्टो की वैल्यूएशन $7 बिलियन आंकी गई थी. कंपनी ने अपनी सार्वजनिक शुरुआत के लिए मॉर्गन स्टेनली, गोल्डमैन सैक्स, एक्सिस कैपिटल और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज जैसे बड़े बैंकरों को नियुक्त किया है.

दो दोस्तों ने खड़ा किया साम्राज्य

जेप्टो (Zepto) की शुरुआत दो युवा दोस्तों, आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा ने की थी. जब दुनिया कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रही थी, तब इन दोनों ने कुछ बड़ा करने का फैसला किया. उस समय इनकी उम्र महज 20 साल थी. दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों अमेरिका की मशहूर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए इन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी (ड्रॉप-आउट).

जेप्टो के मौजूदा सीईओ आदित पालिचा मूल रूप से मुंबई के रहने वाले हैं. जेप्टो से पहले उन्होंने दुबई में 'GoPool' नाम का एक ऐप बनाया था, जो बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने के लिए कारपूलिंग में मदद करता था.

महामारी के दौर में चमकी किस्मत और मिला निवेशकों का साथ

कोरोना के समय जब लोग घरों में कैद थे, तब राशन और रोजमर्रा के सामान की ऑनलाइन डिलीवरी की मांग अचानक बढ़ गई. इसी मौके को पहचानते हुए इन दोनों दोस्तों ने अप्रैल 2021 में जेप्टो की शुरुआत की. इनका मकसद लोगों की जिंदगी को आसान और सुविधाजनक बनाना था. लोगों को यह सर्विस इतनी पसंद आई कि पहले ही साल में कंपनी को बड़ी कामयाबी मिली.

जेप्टो के सफर की कुछ खास बातें-

शुरुआत और फंडिंग: कंपनी ने अपने पहले राउंड में करीब $7,30,000 जुटाए. इसके बाद उसी साल अक्टूबर और दिसंबर में क्रमशः $60 मिलियन और $100 मिलियन की फंडिंग मिली.

दिग्गज निवेशकों का भरोसा: जेप्टो को नेक्सस (Nexus), वाई कॉम्बिनेटर (Y Combinator) और ग्लेड ब्रूक कैपिटल जैसे बड़े निवेशकों का साथ मिला है. इसके अलावा नीरज अरोड़ा और माणिक गुप्ता जैसे इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स ने भी इस पर भरोसा जताया है.

काम की बात

जेप्टो का आईपीओ भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है. स्विगी और ज़ोमैटो (ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी) पहले से ही लिस्टेड हैं, लेकिन जेप्टो इकलौती ऐसी कंपनी होगी जिसका मुख्य बिजनेस सिर्फ और सिर्फ क्विक कॉमर्स है. निवेशकों के लिए यह एक हाई-ग्रोथ सेक्टर में एंट्री करने का सुनहरा मौका हो सकता है, हालांकि इस सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मार्जिन के दबाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 'प्योर प्ले' क्विक कॉमर्स कंपनी होने का क्या मतलब है?

प्योर प्ले का मतलब है कि जेप्टो का पूरा बिजनेस और रेवेन्यू मॉडल मुख्य रूप से 10-15 मिनट की डिलीवरी (क्विक कॉमर्स) पर ही केंद्रित है. जबकि स्विगी और ज़ोमैटो जैसे प्रतिद्वंद्वी फूड डिलीवरी और अन्य सेवाओं में भी शामिल हैं.

Q2 जेप्टो ने कॉन्फिडेंशियल (Confidential) DRHP का रास्ता क्यों चुना?

कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग का फायदा यह होता है कि कंपनी अपनी रणनीतिक जानकारी को तब तक गोपनीय रख सकती है जब तक कि आईपीओ लॉन्च की तारीख तय न हो जाए. यह कंपनी को आईपीओ के आकार और वैल्यूएशन में आखिरी समय तक बदलाव करने की लचीलापन (Flexibility) देता है.

Q3 आईपीओ में 'प्राइमरी इश्युएंस' का क्या अर्थ है?

प्राइमरी इश्युएंस का मतलब है कि कंपनी नए शेयर जारी कर रही है और इससे मिलने वाला पैसा सीधे कंपनी के पास जाएगा, जिसका इस्तेमाल बिजनेस विस्तार या कर्ज चुकाने में किया जाएगा. इसके विपरीत 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) में पुराने निवेशक अपने शेयर बेचते हैं.

Q4 क्या जेप्टो का मुकाबला सीधे ज़ोमैटो और स्विगी से है?

हां, जेप्टो का सीधा मुकाबला ज़ोमैटो के 'ब्लिंकिट' और स्विगी के 'इंस्टामार्ट' से है. ये तीनों कंपनियां भारत के क्विक कॉमर्स मार्केट के बड़े हिस्से पर कब्जा करने की होड़ में हैं.

Q5 क्या आम निवेशक अभी जेप्टो के शेयर खरीद सकते हैं?

फिलहाल नहीं. आम निवेशक आईपीओ खुलने के बाद ही इसमें आवेदन कर सकेंगे. आईपीओ की तारीखों का ऐलान UDRHP फाइल होने के बाद आधिकारिक तौर पर किया जाएगा.

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