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PhonePe ने टाला अपना मेगा IPO.
अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं या फिर मोबाइल से पेमेंट करने के लिए फोनपे का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपको थोड़ा चौंका सकती है. पिछले काफी समय से बाजार में जिस सबसे बड़े आईपीओ की चर्चा हो रही थी, उस पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. जी हां, फोनपे ने फैसला किया है कि वह अभी अपना आईपीओ लेकर नहीं आएगी. यह खबर ऐसे समय में आई है जब पूरी दुनिया में युद्ध और तनाव का माहौल है और शेयर बाजार किसी रोलर कोस्टर राइड की तरह ऊपर-नीचे हो रहा है.
कंपनी का कहना है कि वे इस जोखिम भरे माहौल में अपने कदम आगे नहीं बढ़ाना चाहते. उन्होंने साफ कर दिया है कि लिस्टिंग की योजना रद्द नहीं हुई है, बल्कि इसे कुछ समय के लिए टाल दिया गया है. आइए समझते हैं कि आखिर इस बड़े फैसले के पीछे की असली कहानी क्या है और बाजार के हालात इतने खराब क्यों हैं.
फोनपे की तरफ से जारी बयान में साफ कहा गया है कि मौजूदा भू-राजनीतिक संघर्ष (geopolitical conflicts) और बाजार की अस्थिरता ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया है. कंपनी ने कहा कि जब तक दुनिया भर के बाजारों में शांति और स्थिरता नहीं लौटती, तब तक लिस्टिंग की प्रक्रिया को फिर से शुरू करना सही नहीं होगा.
कंपनी के सीईओ समीर निगम ने इस पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वे प्रभावित क्षेत्रों में जल्द शांति की उम्मीद करते हैं. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि कंपनी भारत में पब्लिक लिस्टिंग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, बस वे सही समय का इंतजार कर रहे हैं.
फोनपे का डर बेवजह नहीं है. अगर हम साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों (जनवरी से मार्च) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी डरावनी नजर आती है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के डेटा ने कुछ ऐसी हकीकत बयां की है जिसे जानकर कोई भी कंपनी अपना आईपीओ लाने से पहले सौ बार सोचेगी.
बाजार के डरावने आंकड़े-
लिस्टिंग का घाटा: जनवरी से मार्च 2026 के बीच कुल 32 आईपीओ आए, जिनमें से 53 फीसदी कंपनियां लिस्टिंग के पहले ही दिन घाटे में रहीं.
भारी डिस्काउंट: कुछ शेयरों की हालत तो इतनी खराब रही कि वे अपनी तय कीमत से 74 फीसदी तक नीचे लिस्ट हुए.
2025 का रिकॉर्ड: पिछले साल यानी 2025 में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. उस साल आए 255 आईपीओ में से 30 फीसदी शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले घाटे में लिस्ट हुए थे.
बाजार के जानकारों का मानना था कि फोनपे का आईपीओ फिनटेक सेक्टर का दूसरा सबसे बड़ा लिस्टिंग इवेंट होगा. इससे पहले पेटीएम का आईपीओ सबसे बड़ा रहा था. फोनपे की लोकप्रियता और उसके बड़े यूजर बेस को देखते हुए निवेशकों को इससे काफी उम्मीदें थीं. लेकिन जिस तरह से हाल ही में आए लोकप्रिय स्टॉक्स की लिस्टिंग पर चर्चा शुरू हुई है और उनमें निवेशकों को घाटा हुआ है, उसने फोनपे जैसी बड़ी कंपनियों को सतर्क कर दिया है.
मिडिल ईस्ट और अन्य क्षेत्रों में जारी तनाव ने भारतीय शेयर बाजार की वोलैटिलिटी (volatility) को कई महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है. जब बाजार इतना अस्थिर होता है, तो निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगता है. ऐसे में कोई भी कंपनी नहीं चाहती कि इतनी मेहनत से लाया गया आईपीओ बाजार की खराब स्थिति की भेंट चढ़ जाए और उसके शेयर डिस्काउंट पर लिस्ट हों.
FAQs
सवाल 1: फोनपे ने अपना आईपीओ क्यों टाल दिया है?
जवाब: कंपनी ने वैश्विक तनाव, युद्ध के हालात और शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (volatility) को देखते हुए आईपीओ की प्रक्रिया को फिलहाल टालने का फैसला किया है.
सवाल 2: फोनपे के सीईओ समीर निगम ने लिस्टिंग को लेकर क्या कहा?
जवाब: समीर निगम ने कहा कि कंपनी भारत में पब्लिक लिस्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वे ग्लोबल मार्केट में स्थिरता आने के बाद ही इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करेंगे.
सवाल 3: साल 2026 में अब तक आईपीओ बाजार का प्रदर्शन कैसा रहा है?
जवाब: जनवरी से मार्च 2026 के बीच आए 32 आईपीओ में से 53 फीसदी कंपनियां लिस्टिंग के दिन घाटे में रहीं. कुछ शेयर तो 74 फीसदी डिस्काउंट पर लिस्ट हुए हैं.
सवाल 4: क्या फोनपे का आईपीओ पूरी तरह रद्द हो गया है?
जवाब: नहीं, कंपनी ने इसे सिर्फ "अस्थायी रूप से स्थगित" (temporarily deferred) किया है. हालात सुधरने पर इसे दोबारा शुरू किया जाएगा.
सवाल 5: फिनटेक सेक्टर में फोनपे के आईपीओ का कितना महत्व है?
जवाब: इसे पेटीएम के बाद फिनटेक सेक्टर का दूसरा सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित आईपीओ माना जा रहा है.