IPO मार्केट में बूम! 5 साल में जुटाए ₹5.39 लाख करोड़, पिछले 20 साल का रिकॉर्ड टूटा

IPO: साल 2020 से 2025 के बीच भारतीय कंपनियों ने IPO के जरिए 5.39 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं. 2020 से 2025 के बीच केवल 336 IPO आए, जबकि 2000 से 2020 के बीच 658 IPO जारी हुए थे.
IPO मार्केट में बूम! 5 साल में जुटाए ₹5.39 लाख करोड़, पिछले 20 साल का रिकॉर्ड टूटा

IPO: भारत के कैपिटल मार्केट्स ने पिछले 5 वर्षों में फंड जुटाने के मामले में एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है. इक्विरस कैपिटल के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, साल 2020 से 2025 के बीच भारतीय कंपनियों ने IPO के जरिए 5.39 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं. यह राशि साल 2000 से 2020 के बीच जुटाए गए कुल ₹4,55,800 करोड़ रुपए से भी काफी ज्यादा है.

कैसे हुआ यह रिकॉर्ड?

इस तेजी को खास बनाने वाली बात यह है कि जहां पहले 20 सालों में बहुत ज्यादा आईपीओ लाने पड़े थे, वहीं अब कम आईपीओ में ही ज्यादा फंड जुटा लिया गया है. 2020 से 2025 के बीच केवल 336 IPO आए, जबकि 2000 से 2020 के बीच 658 IPO जारी हुए थे.

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इक्विरस कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, भावेश शाह ने कहा कि, पूंजी जुटाने में इस बढ़ोतरी की एक वजह यह भी है कि पिछले 5 सालों में एवरेज आईपीओ साइज 1,605 करोड़ रुपये रहा है, जबकि 2000 से 2020 के बीच एवरेज आईपीओ साइज सिर्फ 692 करोड़ रुपये था.

OFS का बढ़ता हिस्सा और बेहतर कमाई के अवसर

भारत के कैपिटल मार्केट्स के तेजी से बढ़ने से प्रमोटर और फाइनेंशियल निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचकर कमाई करने के बेहतर मौके मिले हैं. इसका असर आईपीओ में बढ़ते ऑफर फॉर सेल (OFS) के हिस्से में साफ दिखाई देता है.

ऑफर फॉर सेल (OFS)- आईपीओ में OFS का हिस्सा तेजी से बढ़ा है. इसकी बढ़ती स्वीकार्यता से प्राइवेट इक्विटी (PE) फंड्स को आसानी से अपने निवेश से बाहर निकलने और प्रमोटरों को मुनाफा हासिल करने में मदद मिली है.

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प्राइवेट इक्विटी (PE) के बाहर निकलने के तरीकों के रुझान भी इस तेजी को और मजबूत बनाते हैं. 2025 के पहले 10 महीनों में, PE एग्जिट में सेकेंडरी सेल का हिस्सा 2024 के 7% से बढ़कर 16% हो गया. हालांकि ब्लॉक डील्स अभी भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है, लेकिन उनका योगदान 2024 के 67% से घटकर जनवरी से अक्टूबर 2025 में 56% रह गया है.

आने वाले सालों में यह डील वॉल्यूम और बढ़ेगा, क्योंकि 165 अरब डॉलर के PE निवेश मैच्योर हो रहे हैं और जल्द ही डिसइन्वेस्टमेंट के चरण में प्रवेश करेंगे.

2026 में IPO बाजार को दिशा देने वाले 3 मुख्य ट्रेंड

इक्विरस के अनुसार, 2026 में भारत के आईपीओ मार्केट को 3 बड़े ट्रेंड तय करेंगे-

  1. न्यू एज कंपनियों में दिलचस्पी: न्यू एज और डिजिटल इकॉनमी वाली कंपनियों के आईपीओ के लिए निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी.
  2. बड़े साइज के मेगा IPO: बड़े आकार के आईपीओ जो नए रिकॉर्ड बनाएंगे और बाजार में ज्यादा लिक्विडिटी लाएंगे.
  3. छोटे शहरों तक विस्तार: टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने वाले आईपीओ की संख्या और भागीदारी बढ़ेगी. इन शहरों से आने वाले इश्यू अब कुल IPO मूल्य का एक-चौथाई से भी ज्यादा हिस्सा रखते हैं, जो 2021 में सिर्फ 4% था.

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भारत की तेज आर्थिक रफ्तार बाजार को बना रही मजबूत

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है. इसका कारण मैन्युफैक्चरिंग में सुधार, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाएं और मजबूत उद्यमिता है. शाह ने कहा कि, भारत आज दुनिया में एक ऐसा देश बनकर उभरा है, जहां निवेशकों को लगातार और टिकाऊ विकास मिल सकता है.

घरेलू निवेशकों का दबदबा बढ़ा, FII को भी पीछे छोड़ा

इस तेजी का असर कैपिटल मार्केट्स में घरेलू निवेश पर भी दिख रहा है. अब घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की हिस्सेदारी, NSE में लिस्टेड कंपनियों में, विदेशी निवेशकों (FII) से भी ज्यादा हो गई है.

2026 में होगी फंड जुटाने की बारिश

इक्विरस कैपिटल का अनुमान है कि 2026 में IPO मार्केट लगभग ₹1.6 लाख करोड़ (2000 करोड़ डॉलर) जुटा सकता है. IPO पाइपलाइन मजबूत है और अर्थव्यवस्था निरंतर तेज रफ्तार बनाए हुए है.

खबर से जुडा FAQs


Q1. भारत ने पिछले 5 साल में IPO से कितनी पूंजी जुटाई?
भारत ने 2020 से 2025 के बीच ₹5.39 लाख करोड़ IPO के जरिए जुटाए हैं.

Q2. यह राशि पिछले 20 सालों की तुलना में कैसी है?
साल 2000 से 2020 के बीच सिर्फ ₹4.56 लाख करोड़ जुटाए गए थे.

Q3. पिछले 5 साल में औसत IPO साइज कितना था?
औसत IPO साइज ₹1,605 करोड़ रहा, जो पहले 20 सालों के औसत से दोगुना से ज्यादा है.

Q4. IPO बाजार में OFS क्यों बढ़ा?
प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी बेचकर फायदा उठा रहे हैं.

Q5. प्राइवेट इक्विटी एग्जिट में क्या बदलाव दिख रहा है?
सेकेंडरी सेल का हिस्सा 7% से बढ़कर 16% हो गया.

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