IPO से भरी कंपनियों की झोली! 2025 में अब तक जुटाए 19.6 अरब डॉलर, टूटा 2024 का रिकॉर्ड

2025 में भारतीय बाजार में आईपीओ का जलवा जारी है. कंपनियां अब तक करीब 19.6 अरब डॉलर यानी 1.77 लाख करोड़ रुपए जुटा चुकी हैं. 2024 से ज्यादा. अभी पांच नए IPO और लाइन में हैं, इसलिए आंकड़ा और चढ़ सकता है. निवेशकों का रुझान मजबूत बना हुआ है.
IPO से भरी कंपनियों की झोली! 2025 में अब तक जुटाए 19.6 अरब डॉलर, टूटा 2024 का रिकॉर्ड

भारत का IPO मार्केट 2025 में शानदार रफ्तार पकड़ चुका है. कंपनियों के लिए पब्लिक मार्केट से पैसा जुटाना इस साल भी आसान साबित हो रहा है. आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से अब तक 19.6 अरब डॉलर यानी करीब 1.77 लाख करोड़ रुपए जुटाए जा चुके हैं. ये रकम 2024 के मुकाबले थोड़ी ज्यादा है, जिससे साफ दिखता है कि निवेशकों की दिलचस्पी अभी भी ऊंची बनी हुई है.

पिछले साल यानी 2024 में कंपनियों ने 1.73 लाख करोड़ रुपए IPO के जरिए जुटाए थे. इस आधार पर देखें तो 2025 ने शुरुआत से ही बेहतर रफ्तार दिखाई है. मार्केट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि घरेलू निवेशकों की सक्रियता, बेहतर लिक्विडिटी और अनुकूल मार्केट सेंटिमेंट ने इस ग्रोथ को आगे बढ़ाया है. जहां ग्लोबल मार्केट्स कई बार अनिश्चितता दिखाते हैं, वहीं भारत में निवेश का माहौल तुलनात्मक रूप से मजबूत रहा है.

अभी और बढ़ेगा जुटाई गई रकम का आंकड़ा

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साल खत्म होने में समय बाकी है और रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 नए IPO ओपन होने वाले हैं, जिनमें से सबसे बड़ा नाम है- ICICI Prudential Asset Management का 1.2 अरब डॉलर का IPO. अगर इन इश्यूज का response मजबूत मिला तो जुटाई गई कुल रकम साल खत्म होने से पहले एक नए स्तर तक जा सकती है.

प्रत्येक बड़ी लिस्टिंग के साथ बाजार में liquidity का फ्लो भी बढ़ रहा है. निवेशक भी quality कंपनियों में early entry का मौका नहीं छोड़ना चाहते. खास बात ये भी है कि domestic retail investors की भागीदारी अब पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ चुकी है.

कंपनियों के लिए IPO क्यों बन रहा है पसंदीदा रास्ता?

एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनियां global uncertainties को देखते हुए पहले से ही funding secure करना चाहती हैं, ताकि expansion plans पर तेजी से काम किया जा सके. दूसरी तरफ, भारत में listing norms आसान होने और market depth बढ़ने से fundraising environment और smooth हो गया है.

इसके अलावा, manufacturing, fintech, infra, renewable, consumer और tech सेक्टर में भारी capital requirement रहती है. IPO route इन कंपनियों को scalability के लिए fuel की तरह काम करता है.

विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भी कायम

द्वितीयक बाजार में भले कई बार FII selling देखी गई हो, लेकिन IPO primary market में foreign investors का participation मज़बूत है. IPO में listing gains, discount valuation और growth visibility जैसे factors उन्हें आकर्षित कर रहे हैं. कई deals में institutional quota तेजी से भरने के मामले देखे गए हैं.

आधी कंपनियां issue price से नीचे ट्रेड कर रहीं

भले ही बाजार जोश में है, लेकिन picture पूरी तरह एक तरफा नहीं है. इस साल अब तक लिस्ट हुई 300+ कंपनियों में से लगभग आधी अभी भी offer price से नीचे ट्रेड कर रही हैं. यानी निवेशकों को हर IPO में कूदना फायदे का सौदा नहीं हो सकता. Fundamental strong business और valuation discipline जरूरी है.

सेबी ने भी सुधारों पर ध्यान दिया

  • IPO ecosystem को और smooth बनाने के लिए SEBI ने महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए हैं. मुख्य प्रस्ताव है-
  • Pre-IPO pledged shares को lock-in अवधि में non-transferable category में रखें
  • सार्वजनिक निर्गम से जुड़े disclosure norms को simplify किया जाए
  • इससे compliance आसान होगा और investor confidence भी मजबूत रहेगा.

खबर से जुड़े FAQs

1. 2025 में अब तक कंपनियों ने IPO के जरिए कितनी रकम जुटाई?

करीब 19.6 अरब डॉलर यानी 1.77 लाख करोड़ रुपए.

2. क्या 2025 IPO राशि 2024 से ज्यादा है?

हां, 2024 के 1.73 लाख करोड़ के मुकाबले 2025 थोड़ा ऊपर है.

3. आगे और IPO आने वाले हैं?

हां, करीब 5 नए IPO ओपन होने वाले हैं जिसमें ICICI Prudential AMC बड़ा इश्यू है.

4. क्या सभी IPO लिस्टिंग के बाद अच्छा रिटर्न दे रहे हैं?

नहीं, लगभग आधी कंपनियां issue price से नीचे ट्रेड कर रही हैं.

5. सेबी क्या नए बदलाव ला रही है?

Pre-IPO pledged shares को lock-in में non-transferable बनाने और disclosures simplify करने का प्रस्ताव है.

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