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(Image source- AI)
Mego IPO Rules Changes: केंद्र सरकार ने मेगा कंपनियों के आईपीओ (IPO) को आसान बनाने के लिए मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने एक ग्रेडेड फ्रेमवर्क लागू किया है, जिसके तहत बड़ी कंपनियों को स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग के समय पहले की तुलना में कम हिस्सेदारी सार्वजनिक करने की मंजूरी होगी. यह कदम विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा जिनका वैल्यूएशन लाखों करोड़ में है.
यह बदलाव सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) संशोधन नियम, 2026 के जरिए किया गया है, जिसे वित्त मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया है. अब बड़ी कंपनियों को आईपीओ के समय कम हिस्सेदारी सार्वजनिक करने की मंजूरी होगी यह कदम विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा जिनका वैल्यूएशन लाखों करोड़ रुपये में है. सेबी ने सितंबर 2025 में इस प्रपोजल को पास किया था, जिसे वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को नोटिफिकेशन जारी किया.
सरकार के मुताबिक इस नए फ्रेमवर्क का मकसद बड़ी कंपनियों के लिए IPO का रास्ता आसान बनाना है, जबकि यह भी सुनिश्चित करना है कि समय के साथ सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़कर मानक 25% तक पहुंच जाए.
सरकार ने कंपनी के पोस्ट-इश्यू कैपिटल के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां बनाई हैं.
| पोस्ट-इश्यू कैपिटल | IPO के समय पब्लिक शेयरहोल्डिंग |
|---|---|
| ₹1,600 करोड़ तक | कम से कम 25% (पुराना नियम जारी) |
| ₹1,600-₹4,000 करोड़ | कम से कम ₹400 करोड़ मूल्य के शेयर |
| ₹4,000-₹50,000 करोड़ | कम से कम 10% शेयर |
| ₹50,000 करोड़-₹1 लाख करोड़ | कम से कम ₹1,000 करोड़ और 8% शेयर |
| ₹1 लाख करोड़-₹5 लाख करोड़ | कम से कम ₹6,250 करोड़ और 2.75% शेयर |
| ₹5 लाख करोड़ से ज्यादा | कम से कम ₹15,000 करोड़ और 1% शेयर |
नए नियमों के तहत कंपनियों को IPO के समय कम हिस्सेदारी बेचने की छूट जरूर मिलेगी, लेकिन बाद में उन्हें धीरे-धीरे पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ानी होगी.
| स्थिति | समय सीमा |
|---|---|
| पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15% से कम | 5 साल में 15%, 10 साल में 25% |
| पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15% या ज्यादा | 5 साल में 25% |
शर्त
शर्त
शर्त
अगर लिस्टिंग के समय पब्लिक शेयरहोल्डिंग < 15%
अगर लिस्टिंग के समय पब्लिक शेयरहोल्डिंग ≥ 15%
किसी भी स्थिति में कम से कम 2.5% शेयर पब्लिक को ऑफर करना जरूरी है.
अगर कंपनी के प्रमोटर्स के पास Superior Voting Rights shares हैं तो उन्हें ऑर्डिनरी शेयर्स के साथ उसी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट करना होगा.
अगर कंपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग निमय का पालन नहीं करती तो स्टॉक एक्सचेंज जुर्माना या पेनाल्टी लगा सकता है.
Extra Rule (IFSC – International Financial Services Centre)
वहां लिस्टिंग करने वाली कंपनियों को 25% की जगह सिर्फ 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग देना होगा.
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