IPO Listing: गिरते बाजार में हल्के मुनाफे के साथ लिस्ट हुआ IVF कंपनी का आईपीओ, ₹84 है एक शेयर की कीमत

Gaudium IVF Women Health Share Price: इस आईपीओ में पैसा लगाने वाले निवेशकों को हर शेयर पर 5% का मुनाफा हुआ. शेयर का इश्यू प्राइस ₹79 था और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज BSE पर 5% के प्रीमियम के साथ ये ₹83 पर लिस्ट हुआ.
IPO Listing: गिरते बाजार में हल्के मुनाफे के साथ लिस्ट हुआ IVF कंपनी का आईपीओ, ₹84 है एक शेयर की कीमत

Gaudium IVF IPO शेयर बाजार में लिस्ट

Gaudium IVF Women Health Share Price: फर्टिलिटी केयर कंपनी Gaudium IVF Women Health का आईपीओ शेयर बाजार में लिस्ट हो गया है. इस आईपीओ में पैसा लगाने वाले निवेशकों को हर शेयर पर 5% का मुनाफा हुआ. शेयर का इश्यू प्राइस ₹79 था और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज BSE पर 5% के प्रीमियम के साथ ये ₹83 पर लिस्ट हुआ.

इस आईपीओ के डीटेल की बात करें तो 165 करोड़ रुपए का टोटल साइज है जिसमें 75 करोड़ का ऑफर फॉर सेल है जबकि 90 करोड़ रुपए का फ्रेश इश्यू जारी किया गया है. 75-79 रुपए का इश्यू प्राइस था. 189 शेयर का एक लॉट था. यह आईपीओ 20 फरवरी से 24 फरवरी के बीच खुला था.

Gaudium IVF Women Health सेंटर को तीन डॉक्टर- मणिका खन्ना, पीयूष खन्ना और विशाद खन्ना मिलकर रन करते हैं. आईपीओ से पहले इनकी कुल हिस्सेदारी 99.99% है. आईपीओ के बाद इनकी हिस्सेदारी घटकर 71.30% पर आ जाएगी. 575 करोड़ रुपए की वैल्युएशन पर यह आईपीओ लाया गया है.

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Gaudium IVF के पॉजिटिव फैक्टर्स क्या हैं?

मार्केट गुरु अनिल सिंघवी ने आईपीओ खुलने के बाद इसका आकलन किया था और इसके पॉजिटिव-निगेटिव बताए थे, जो हम आपको फिर से बता रहे हैं.

  • उनका कहना था कि कंपनी के प्रमोटर काफी अनुभवी हैं और हेल्थकेयर सेक्टर की अच्छी समझ रखते हैं.
  • कंपनी का Hub and Spoke बिजनेस मॉडल स्केलेबल माना जा रहा है, यानी भविष्य में तेजी से नए सेंटर जोड़ने की क्षमता मौजूद है.
  • कंपनी के ज्यादातर सेंटर्स का टर्नअराउंड टाइम कम है, जिससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी बेहतर रहती है और प्रॉफिटेबिलिटी को सपोर्ट मिलता है.
  • वहीं IPO का वैल्युएशन भी संतुलित नजर आता है, जिसे ना ज्यादा महंगा कहा जा सकता है और ना ही बहुत सस्ता.

आखिरी राय: अनिल सिंघवी के मुताबिक कंपनी के प्रमोटर मजबूत अनुभव रखते हैं और कंपनी का मॉडल ऐसा है जिसमें नया सेंटर शुरू होने के कुछ ही महीनों में प्रॉफिटेबल बनने की क्षमता दिखती है. वैल्युएशन भी रिजनेबल स्तर पर है, इसलिए ओवरप्राइसिंग की चिंता फिलहाल ज्यादा नहीं दिखती.

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निगेटिव फैक्टर्स क्या हैं?

  • IVF सेक्टर एक रेग्युलेटेड इंडस्ट्री है, इसलिए भविष्य में किसी भी तरह के नियमों में बदलाव का जोखिम बना रह सकता है.
  • अभी तक कंपनी की ग्रोथ काफी हद तक प्रमोटर की ब्रांड इमेज और डॉक्टर-ड्रिवन मॉडल पर आधारित रही है.
  • लिस्टिंग के बाद कंपनी को धीरे-धीरे इंस्टीट्यूशनल मॉडल की तरफ शिफ्ट करना होगा, जो एक अहम ट्रांजिशन रहेगा.
  • इसके अलावा IVF मार्केट का आकार बड़ा जरूर है, लेकिन इसमें प्रतिस्पर्धा भी लगातार बढ़ रही है.

आखिरी राय: अनिल सिंघवी का कहना है कि अब तक कंपनी सिंगल डॉक्टर ब्रांड वैल्यू के दम पर ग्रो कर रही थी, लेकिन लिस्टिंग के बाद संस्थागत पहचान बनाए रखना सबसे बड़ा फोकस रहेगा. निवेशकों को इस बदलाव पर नजर बनाए रखनी चाहिए क्योंकि सेक्टर में मुकाबला काफी तेज है.

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