इस IPO को नहीं मिला था निवेशकों का साथ, अब लिस्टिंग पर करा दिया मुनाफा; एक शेयर की इतनी हुई कीमत

Euro Pratik Sales IPO: यूरो प्रतीक का शेय आज भारतीय शेयर बाजार में डेब्यू कर गया. IPO के दौरान ज्यादा दमदार रिस्पॉन्स न मिलने के बावजूद शेयर ने निवेशकों को हल्की मुस्कान दी. कंपनी के शेयर आज अपने इश्यू प्राइस से करीब 10% प्रीमियम पर लिस्ट हुए.
इस IPO को नहीं मिला था निवेशकों का साथ, अब लिस्टिंग पर करा दिया मुनाफा; एक शेयर की इतनी हुई कीमत

Euro Pratik Sales IPO: Euro Pratik Sales का शेयर आज भारतीय शेयर बाजार में डेब्यू कर गया. IPO के दौरान ज्यादा दमदार रिस्पॉन्स न मिलने के बावजूद शेयर ने निवेशकों को हल्की मुस्कान दी. कंपनी के शेयर आज अपने इश्यू प्राइस से करीब 10% प्रीमियम पर लिस्ट हुए. कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड 247 रुपये था इसके मुकाबले, BSE पर शेयर 10.71% के प्रीमियम के साथ 273 रुपये के भाव पर लिस्ट हुआ. मार्केट गुरु अनिल सिंघवी ने निवेशकों को एक उचित स्टॉपलॉस लगाकर इसे होल्ड करने की सलाह दी.

कब खुला था IPO और कब हुई लिस्टिंग?

Euro Pratik Sales का IPO 16 से 18 सितंबर 2025 के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था. IPO अलॉटमेंट की तारीख 19 सितंबर रही और शेयर की लिस्टिंग आज यानी 23 सितंबर 2025 को BSE और NSE दोनों एक्सचेंजों पर हुई.

क्या काम करती है कंपनी?

कंपनी डेकोरेटिव वॉल पैनल्स और लैमिनेट्स से जुड़ा कारोबार करती है और यह सेक्टर रियल एस्टेट इंडस्ट्री से सीधा जुड़ा है. Euro Pratik Sales का बिजनेस मॉडल asset-light है यानी कंपनी खुद भारी-भरकम मैन्युफैक्चरिंग एसेट्स में निवेश करने की बजाय डिजाइन और डिस्ट्रीब्यूशन पर ध्यान देती है.

कंपनी का भारत के ऑर्गनाइज्ड वॉल पैनल्स मार्केट में करीब 16% मार्केट शेयर है. बढ़ते डीलर नेटवर्क और डिजाइन-ड्रिवन पोर्टफोलियो की वजह से कंपनी ने हाल के वर्षों में अच्छी ग्रोथ दिखाई है.

Euro Pratik Sales का पब्लिक इश्यू पूरी तरह से Offer for Sale (OFS) था। कंपनी ने इसमें 1.83 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे, जिसकी कुल वैल्यू करीब ₹451.31 करोड़ रही. इश्यू का प्राइस बैंड ₹235 से ₹247 प्रति शेयर तय किया गया था.

सब्सक्रिप्शन स्टेटस

BSE डेटा के मुताबिक, इश्यू को कुल मिलाकर 1.34 गुना सब्सक्रिप्शन मिला. अलग-अलग इन्वेस्टर कैटेगरी देखें तो रिटेल निवेशक 1.23 गुना, Non Institutional Investors (NII) 1.92 गुना और Qualified Institutional Buyers (QIBs) 1.05 गुना भरा.

क्या हैं चुनौतियां?

हालांकि, इस बिजनेस से जुड़े कई रिस्क भी हैं. इंडस्ट्री काफी competitive और fragmented है. कंपनी का परफॉर्मेंस real estate cycles पर बहुत हद तक निर्भर करता है. input costs में बदलाव से मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है.

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