&format=webp&quality=medium)
IPO Lock In: सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच लगभग 69 कंपनियों के आईपीओ का लॉक-इन पीरियड खत्म होने वाला है. इस दौरान करीब 2 लाख करोड़ रुपये (23 अरब डॉलर) के शेयर मार्केट में खुलेंगे. इसका सीधा असर उन स्टॉक्स की कीमत और निवेशकों की रणनीति पर देखने को मिल सकता है.
जब कोई कंपनी IPO लाती है, तो पब्लिक को पहली बार शेयर खरीदने का मौका मिलता है. लेकिन कंपनी के अंदरूनी लोग- जैसे प्रमोटर्स, मैनेजमेंट और शुरुआती बड़े निवेशक तुरंत अपने शेयर बेच नहीं सकते. उन्हें कुछ समय तक इंतजार करना पड़ता है, जिसे ही Lock-in Period कहते हैं.
VIDEO- iPhone 17 Pre-Booking: भारत में कब से मिलेगा?
इसका मकसद यह है कि IPO के तुरंत बाद मार्केट में शेयरों की बाढ़ न आ जाए, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है और शेयर प्राइस गिर सकता है.
1 महीने का लॉक-इन
3 महीने का लॉक-इन
6 महीने का लॉक-इन
प्राइस फ्लक्चुएशन: जैसे ही लॉक-इन खत्म होता है, बड़ी मात्रा में शेयर मार्केट में आ सकते हैं. इससे शेयर प्राइस पर दबाव बन सकता है.
एंट्री टाइमिंग: अगर आपने IPO मिस कर दिया और अब खरीदना चाहते हैं, तो लॉक-इन खत्म होने के बाद स्टॉक अधिक स्थिर दाम पर मिल सकता है.
इनसाइडर्स का भरोसा: यदि कंपनी के प्रमोटर्स और शुरुआती निवेशक लॉक-इन खत्म होने के बाद भी शेयर नहीं बेचते, तो यह कंपनी के भविष्य पर उनका भरोसा दिखाता है.