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इस हफ्ते ये 5 ट्रिगर तय करेंगे शेयर बाजार की चाल
भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा. दो हफ्तों की शानदार तेजी के बाद बाजार में अचानक ब्रेक लगा और सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद हुए. इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह रही दुनिया भर में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और दिग्गज आईटी कंपनियों के कमजोर नतीजे.
निफ्टी 50 करीब 1.87% गिरकर 23,897.95 पर आ गया, वहीं सेंसेक्स में 2.33% की भारी गिरावट देखी गई और यह 76,664.21 के स्तर पर बंद हुआ. अब निवेशकों की नजर इस हफ्ते पर है. अगर आप भी शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं, तो यह हफ्ता आपके लिए बेहद अहम होने वाला है. चलिए विस्तार से समझते हैं वो 5 बड़ी बातें, जो इस हफ्ते बाजार की दिशा तय करेंगी.
चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों का सीजन अब अपने पूरे शबाब पर है. इस हफ्ते 200 से ज्यादा कंपनियां अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करने वाली हैं.
| कंपनी का नाम | क्यों है अहम? |
| मारुति सुजुकी | ऑटो सेक्टर की मांग और मार्जिन का पता चलेगा |
| इटर्नल (Zomato) | न्यू-एज टेक कंपनियों के प्रति निवेशकों का भरोसा तय होगा |
| अल्ट्राटेक सीमेंट | इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों की रफ्तार दिखेगी |
| हिंदुस्तान यूनिलीवर | ग्रामीण भारत में खपत (Consumption) की असली तस्वीर साफ होगी |
इनके अलावा वेदांता और अडानी एंटरप्राइजेज जैसी दिग्गज कंपनियों के नतीजों पर भी सबकी नजर रहेगी.
बाजार की सबसे पहली और बड़ी नजर सात समंदर पार अमेरिका पर टिकी है. वहां फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक 28 और 29 अप्रैल को होने वाली है.
ब्याज दरों का गणित: जानकारों का मानना है कि इस बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा. यह लगातार तीसरी बार होगा जब दरें स्थिर रहेंगी. फिलहाल अमेरिका में बेंचमार्क रेट 3.5% से 3.75% के बीच है.
बाजार पर असर: अगर फेड का रुख सख्त रहता है या महंगाई को लेकर कोई चिंता जताई जाती है, तो भारतीय बाजार में बिकवाली बढ़ सकती है.
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का मोह भंग होता दिख रहा है. 24 अप्रैल को FII ने करीब ₹8,828 करोड़ के शेयर बेच डाले, जो अप्रैल के महीने में एक दिन की सबसे बड़ी निकासी है.
FII vs DII: जहां विदेशी निवेशक (FII) इस साल अब तक ₹2.25 लाख करोड़ की बिकवाली कर चुके हैं, वहीं हमारे घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को संभाला हुआ है. DII ने इस साल ₹2.79 लाख करोड़ की खरीदारी की है.
रुपये का दबाव: FII जब पैसा निकालते हैं, तो रुपये की वैल्यू पर भी असर पड़ता है. इस हफ्ते भी अगर निकासी जारी रही, तो बाजार के लिए संभलना मुश्किल होगा.
भू-राजनीतिक तनाव इस वक्त बाजार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने निवेशकों को डरा रखा है.
ट्रंप का कड़ा रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया, जिससे कूटनीतिक बातचीत पर सवाल खड़े हो गए हैं. ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान बात करना चाहता है, तो उसे सीधे संपर्क करना होगा.
अनिश्चितता का माहौल: हालांकि ट्रंप ने संघर्ष विराम (Ceasefire) को बढ़ाया है, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री की बातों से लगता है कि कूटनीति की राह अभी कठिन है. जब तक सीमा पर शांति नहीं होती, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी.
युद्ध के माहौल का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है. पिछले हफ्ते तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया.
कीमतों का हाल: ब्रेंट क्रूड करीब 105.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जिसमें हफ्ते भर में 16% की भारी बढ़त देखी गई. वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी 94.40 डॉलर के करीब है.
भारत पर प्रभाव: भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है. अगर तेल महंगा होता है, तो भारत में महंगाई बढ़ने का डर रहता है, जो सीधे तौर पर शेयर बाजार को नीचे धकेलता है.
इस हफ्ते शेयर बाजार की राह कांटों भरी दिख रही है. एक तरफ कंपनियों के नतीजों से उम्मीदें हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का डर. निवेशकों के लिए सलाह यही है कि वे संभलकर चलें और केवल क्वालिटी शेयरों पर ही ध्यान दें. उतार-चढ़ाव भरे इस माहौल में 'स्टॉप लॉस' का इस्तेमाल जरूर करें, क्योंकि बाजार का मूड पलटने में देर नहीं लगती.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 इस हफ्ते बाजार में गिरावट की मुख्य वजह क्या हो सकती है?
मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान युद्ध का तनाव और विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली बाजार को नीचे ला सकती है.
Q2 अमेरिकी फेड मीटिंग का भारतीय बाजार से क्या लेना-देना है?
अगर अमेरिकी फेड ब्याज दरें बढ़ाता है या भविष्य में बढ़ाने के संकेत देता है, तो डॉलर मजबूत होता है और निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका में लगाने लगते हैं.
Q3 कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
मिडल ईस्ट (खासकर ईरान और अमेरिका के बीच) में जारी तनाव की वजह से तेल की सप्लाई रुकने का डर है, इसलिए कीमतें ऊपर जा रही हैं.
Q4 इस हफ्ते किन बड़ी कंपनियों के नतीजे आने वाले हैं?
मारुति सुजुकी, जोमैटो (इटर्नल), अल्ट्राटेक सीमेंट, अडानी एंटरप्राइजेज और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी बड़ी कंपनियों के नतीजे आने वाले हैं.
Q5 क्या घरेलू निवेशकों (DII) का भरोसा बाजार पर बना हुआ है?
जी हां, डेटा के मुताबिक घरेलू निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं और बाजार को गिरने से बचाने के लिए ढाल की तरह काम कर रहे हैं.