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दलाल स्ट्रीट पर पिछले कुछ दिनों से जो सन्नाटा और गिरावट दिख रही है, वह किसी बड़े बदलाव की आहट हो सकती है. पिछले हफ्ते शेयर बाजार ने निवेशकों को थोड़ा निराश किया और लगातार पांच सत्रों तक लाल निशान में बंद हुआ.
लेकिन अब 12 जनवरी से शुरू होने वाला नया हफ्ता उम्मीद और डर का एक अनोखा मिश्रण लेकर आ रहा है. एक तरफ कॉर्पोरेट जगत की बड़ी कंपनियां अपनी कमाई का लेखा-जोखा (Q3 Results) पेश करने जा रही हैं, तो दूसरी तरफ महंगाई और ग्लोबल ट्रेड वॉर की तलवार बाजार पर लटक रही है.
इस हफ्ते का सबसे बड़ा आकर्षण होगा कंपनियों के दिसंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे. कमाई के इस सीजन की शुरुआत हमेशा की तरह आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों से होगी. सोमवार यानी 12 जनवरी को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और HCL टेक्नोलॉजीज अपने आंकड़े पेश करेंगी. इसके बाद इंफोसिस, विप्रो और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियां भी कतार में हैं.
बाजार के जानकारों का मानना है कि इन कंपनियों के नतीजे और उनके मैनेजमेंट की कमेंट्री यह तय करेगी कि आने वाले महीनों में भारतीय आईटी सेक्टर की चाल कैसी रहेगी. क्या ये कंपनियां फिर से पुराने सुनहरे दिनों की तरफ लौटेंगी या फिर चुनौतियों का सिलसिला जारी रहेगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं.
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कॉर्पोरेट नतीजों के साथ-साथ इस हफ्ते भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण डेटा भी सामने आएंगे. सरकार खुदरा महंगाई (CPI) और थोक महंगाई (WPI) के आंकड़े जारी करने वाली है. इसके अलावा देश के ट्रेड बैलेंस और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) के आंकड़े भी इसी हफ्ते आएंगे.
ये आंकड़े इसलिए जरूरी हैं क्योंकि इन्हीं के आधार पर रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों को लेकर अपना भविष्य का रुख तय करता है. अगर महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलती है, तो बाजार में तेजी की उम्मीद की जा सकती है. लेकिन अगर आंकड़े उम्मीद से खराब रहे, तो बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.
भारतीय बाजार सिर्फ घरेलू खबरों पर ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार अमेरिका में हो रही हलचल पर भी नजर रखे हुए है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट इस हफ्ते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ (Tariff) उपायों से जुड़ी चुनौतियों पर सुनवाई और फैसला सुना सकता है.
पूरी दुनिया के निवेशक इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं. अगर कोर्ट ट्रंप के फैसलों पर रोक लगाता है या उनमें बदलाव करता है, तो यह वैश्विक बाजारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर होगी. इसका सीधा असर भारतीय बाजार और यहां की एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों पर पड़ेगा. ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी और भारत-अमेरिका ट्रेड डील की अनिश्चितता ने पहले ही निवेशकों को थोड़ा डरा रखा है.
पिछले कुछ समय से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं. पिछले हफ्ते ही उन्होंने भारी बिकवाली की है, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को संभालने की कोशिश की है, लेकिन विदेशी फंड्स का बाहर जाना चिंता का विषय बना हुआ है.
तकनीकी तौर पर देखें तो निफ्टी और सेंसेक्स इस वक्त अपने अहम स्तरों से नीचे कारोबार कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक बाजार फिर से अपनी पुरानी मजबूती नहीं पकड़ लेता, तब तक निवेशकों को 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की रणनीति अपनानी चाहिए.
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कुल मिलाकर, 12 जनवरी से शुरू होने वाला यह हफ्ता किसी उतार-चढ़ाव भरी रोलर कोस्टर सवारी से कम नहीं होगा. एक तरफ जहां TCS और इंफोसिस जैसी कंपनियों के नतीजे बाजार को जोश दे सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ महंगाई और अमेरिकी नीतियां डर पैदा कर सकती हैं.
एक समझदार निवेशक के तौर पर आपको सिर्फ आंकड़ों पर ही नहीं, बल्कि कंपनियों के भविष्य के प्लान्स पर भी ध्यान देना चाहिए. यह हफ्ता तय करेगा कि साल 2026 की पहली तिमाही का अंत बाजार के लिए कैसा रहने वाला है.
Q1: Q3 नतीजों की शुरुआत कौन सी कंपनियां कर रही हैं?
A: इस तिमाही के नतीजों की शुरुआत सोमवार, 12 जनवरी को आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियों TCS और HCL टेक्नोलॉजीज से हो रही है.
Q2: बाजार के लिए इस हफ्ते के मुख्य ट्रिगर्स क्या हैं?
A: मुख्य ट्रिगर्स में कंपनियों के Q3 नतीजे, भारत के महंगाई के आंकड़े (CPI & WPI) और ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला शामिल है.
Q3: क्या विदेशी निवेशक (FII) अभी भी बिकवाली कर रहे हैं?
A: हां, विदेशी निवेशक पिछले कुछ समय से भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिसका असर बाजार की गिरावट में साफ दिख रहा है.
Q4: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भारत पर क्या असर होगा?
A: यदि कोर्ट ट्रंप के टैरिफ उपायों पर कोई राहत देता है, तो इससे ग्लोबल ट्रेड तनाव कम होगा और भारतीय एक्सपोर्ट कंपनियों को बड़ा फायदा मिल सकता है.
Q5: निवेशकों को इस हफ्ते क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
A: बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना है, इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने के बजाय नतीजों और महंगाई के आंकड़ों का इंतजार करना चाहिए.