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शेयर बाजार का पिछला हफ्ता निवेशकों के लिए थोड़ा थकाने वाला रहा. बाजार में वह जोश नहीं दिखा जिसकी उम्मीद की जा रही थी और अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही कमजोरी के साथ बंद हुए. असल में बाजार में फिलहाल कोई नया और बड़ा ट्रिगर नहीं है, जिसकी वजह से निवेशक मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) करना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं.
लेकिन क्या यह सुस्ती बनी रहेगी या नए साल के जश्न से पहले बाजार में कोई बड़ी रिकवरी दिखेगी? यह सब कुछ अगले हफ्ते आने वाले कुछ बड़े घरेलू और ग्लोबल संकेतों पर टिका है. आइए समझते हैं कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कौन तय करेगा.
शुक्रवार को जब बाजार बंद हुआ, तो नजारा थोड़ा फीका था. सेंसेक्स करीब 367 अंक लुढ़ककर 85,041 पर आ गया, वहीं निफ्टी भी 100 अंकों की गिरावट के साथ 26,042 के स्तर पर बंद हुआ. सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी दबाव में दिखे. जानकारों का कहना है कि ग्लोबल मार्केट से मिल रहे मिले-जुले संकेतों और निवेशकों की सावधानी की वजह से बाजार में यह गिरावट देखने को मिली है.
बाजार के एक्सपर्ट्स का मानना है कि निफ्टी के लिए 26,000 से 25,800 का जोन बहुत महत्वपूर्ण है. जब तक निफ्टी इस स्तर के ऊपर टिका हुआ है, तब तक घबराने की बात नहीं है और बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव बना रह सकता है.
अगर ऊपर की बात करें, तो 26,200 के पास निफ्टी को पहली रुकावट (रेजिस्टेंस) मिल सकती है. इसे पार करने के बाद अगला लक्ष्य 26,500 होगा. लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि अगर निफ्टी 25,800 के नीचे फिसला, तो बाजार में बिकवाली का दबाव काफी बढ़ सकता है.
अगले हफ्ते बाजार के लिए सबसे बड़ा देसी संकेत 29 दिसंबर को आएगा. इस दिन नवंबर 2025 के औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़े जारी किए जाएंगे. यह डेटा हमें बताएगा कि हमारे देश की फैक्ट्रियों और उद्योगों में कैसी ग्रोथ चल रही है. निवेशक इस डेटा को बहुत करीब से ट्रैक करेंगे क्योंकि यह हमारी इकोनॉमी की सेहत का एक बड़ा आईना होता है.
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका से आने वाली खबरें भी दलाल स्ट्रीट में हलचल मचाएंगी. 31 दिसंबर को अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी पिछली मीटिंग के मिनट्स जारी करेगा. आपको बता दें कि दिसंबर की मीटिंग में फेड ने ब्याज दरों में 0.25 परसेंट की कटौती की थी, जिससे दरें 3.75 परसेंट पर आ गई हैं.
अब निवेशक उन मिनट्स में यह ढूंढने की कोशिश करेंगे कि भविष्य में ब्याज दरें और कितनी गिरेंगी और महंगाई को लेकर फेड का क्या सोचना है. ग्लोबल मार्केट की चाल इसी खबर से तय होगी.
एक और मोमेंटम जो निवेशकों को परेशान कर रहा है, वह है भारतीय रुपये की कमजोरी. शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे कमजोर होकर 89.90 के स्तर पर बंद हुआ. रुपये की कमजोरी का सीधा असर विदेशी निवेशकों (FII) की एक्टिविटी पर पड़ता है. अगर रुपया और गिरता है, तो विदेशी फंड्स की निकासी बढ़ सकती है, जो बाजार के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा.
कुल मिलाकर, शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता 'वेट एंड वॉच' वाला रहने वाला है. एक तरफ जहां निफ्टी अपने अहम सपोर्ट लेवल को बचाने की कोशिश करेगा, वहीं दूसरी तरफ IIP डेटा और अमेरिकी फेड के मिनट्स बाजार की असली दिशा तय करेंगे. फिलहाल बाजार एक सीमित दायरे (रेंज) में कारोबार कर सकता है. ऐसे में निवेशकों को किसी भी बड़े निवेश से पहले इन आंकड़ों का इंतजार करना चाहिए और सावधानी के साथ स्टॉक-स्पेसिफिक एक्शन पर नजर रखनी चाहिए.
Q1. निफ्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल कौन सा है?
A1. मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार निफ्टी के लिए 26,000 और 25,800 का स्तर सबसे अहम सपोर्ट जोन है.
Q2. औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़े कब जारी होंगे?
A2. नवंबर 2025 के लिए भारत का औद्योगिक उत्पादन डेटा 29 दिसंबर को जारी किया जाएगा.
Q3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मीटिंग के मिनट्स कब आएंगे?
A3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व 31 दिसंबर को अपनी पिछली मीटिंग के मिनट्स जारी करेगा.
Q4. पिछले हफ्ते बाजार में गिरावट की मुख्य वजह क्या थी?
A4. नए ट्रिगर्स की कमी, ग्लोबल संकेतों में अनिश्चितता और निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली गिरावट की मुख्य वजह रही.
Q5. डॉलर के मुकाबले रुपये की ताजा स्थिति क्या है?
A5. शुक्रवार को रुपया 19 पैसे की कमजोरी के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.90 के स्तर पर बंद हुआ.