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हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने पॉजिटिव माहौल में क्लोजिंग दी. सेंसेक्स 450 अंकों की मजबूती के साथ 85,267.66 के लेवल पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी ने भी 148 अंकों की छलांग लगाकर 26,046.95 का आंकड़ा पार किया. इस तेजी ने निवेशकों का कॉन्फिडेंस बढ़ाया है और अब बाजार की नजर पूरी तरह अगले हफ्ते के अहम ट्रिगर्स पर टिक गई है.
खास बात यह रही कि सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. BSE मिडकैप इंडेक्स 1.14 फीसदी चढ़ा, वहीं स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.65 फीसदी की तेजी रही. इससे यह साफ दिखता है कि बाजार की चौड़ाई यानी ब्रेड्थ मजबूत बनी हुई है.
शुक्रवार की तेजी का सीधा फायदा निवेशकों की वेल्थ पर पड़ा. BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर 470 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया. सिर्फ एक ही सेशन में निवेशकों की संपत्ति में 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा हुआ. इससे पहले सेशन में यह आंकड़ा करीब 466.6 लाख करोड़ रुपये था. इस तरह की तेजी आमतौर पर यह दिखाती है कि बाजार में अभी भी पैसा बना हुआ है और हर गिरावट पर खरीदारी का मूड बना रह सकता है.
अगले हफ्ते बाजार के लिए सबसे बड़ा घरेलू फैक्टर थोक महंगाई यानी WPI का डेटा रहेगा. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय 15 दिसंबर को नवंबर महीने के WPI आंकड़े जारी करेगा. अगर महंगाई कंट्रोल में रहती है या उम्मीद से कम आती है, तो इससे ब्याज दरों को लेकर चिंता कम हो सकती है और बाजार को सपोर्ट मिल सकता है. वहीं अगर महंगाई के आंकड़े चौंकाने वाले रहे, तो शॉर्ट टर्म में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है.
ग्लोबल फ्रंट पर इंडिया और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत बाजार के लिए काफी अहम है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों ने दो दिन चली बातचीत के बाद कंस्ट्रक्टिव और फॉरवर्ड-लुकिंग एंगेजमेंट जारी रखने पर सहमति जताई है.
इन बातचीतों में कई अहम ट्रेड मुद्दों पर चर्चा हुई और एक ऐसे द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट पर काम चल रहा है, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है. अगर इस दिशा में पॉजिटिव संकेत मिलते हैं, तो एक्सपोर्ट-इंपोर्ट से जुड़े सेक्टर्स, मैन्युफैक्चरिंग और आईटी जैसे सेक्टर्स को लॉन्ग टर्म में फायदा मिल सकता है.
अगले हफ्ते रुपये की मूवमेंट भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रोल निभाएगी. पिछले कुछ समय से रुपये पर दबाव बना हुआ है. इसकी वजह FII की लगातार बिकवाली, डॉलर की मजबूती और इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की मजबूत डिमांड मानी जा रही है. अगर रुपया स्थिर होता है या उसमें थोड़ी रिकवरी आती है, तो इससे बाजार की सेंटिमेंट को सपोर्ट मिल सकता है. वहीं अगर गिरावट जारी रहती है, तो कुछ सेक्टर्स में दबाव देखने को मिल सकता है.
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बात करें तो 2025 में उनका रुख अब तक निगेटिव ही रहा है. FIIs पूरे साल नेट सेलर बने हुए हैं और यह साल पिछले दो दशकों में दूसरे सबसे ज्यादा नेट सेलिंग डेज वाले सालों में शामिल होने के करीब है. हालांकि, घरेलू निवेशक यानी DIIs की मजबूत खरीदारी ने बाजार को अब तक संभाल रखा है. म्यूचुअल फंड SIPs से आने वाला लगातार कैश फ्लो बाजार के लिए बड़ा सपोर्ट बना हुआ है.
टेक्निकल नजरिए से निफ्टी के लिए ऊपर की तरफ 26,200 पहला बड़ा रेजिस्टेंस माना जा रहा है. इसके बाद 26,400 और 26,500 के लेवल अहम रहेंगे. अगर निफ्टी इन लेवल्स को पार करता है, तो तेजी को और मजबूती मिल सकती है. वहीं नीचे की तरफ 25,900 और 25,800 पर सपोर्ट दिख रहा है. अगर किसी वजह से निफ्टी 25,700 के नीचे फिसलता है, तो वहां से बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है.
कुल मिलाकर देखा जाए तो बाजार का स्ट्रक्चर अभी मजबूत दिखता है, लेकिन अगले हफ्ते वोलैटिलिटी बनी रह सकती है. महंगाई डेटा, इंडिया-US ट्रेड से जुड़े अपडेट, रुपये की चाल और FII का मूड मिलकर बाजार की दिशा तय करेंगे. ऐसे में निवेशकों के लिए बेहतर यही रहेगा कि वे शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय सोच-समझकर कदम उठाएं और क्वालिटी शेयरों पर फोकस बनाए रखें.
सवाल 1: अगले हफ्ते शेयर बाजार के लिए सबसे अहम फैक्टर क्या रहेगा?
जवाब: WPI महंगाई डेटा, इंडिया-US ट्रेड बातचीत और FII की एक्टिविटी सबसे अहम फैक्टर रहेंगे.
सवाल 2: क्या मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी जारी रह सकती है?
जवाब: अगर बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव रहा और बड़े फैक्टर्स सपोर्टिव रहे, तो इनमें मजबूती बनी रह सकती है.
सवाल 3: रुपये की कमजोरी से किन सेक्टर्स पर असर पड़ता है?
जवाब: रुपये की कमजोरी से इंपोर्ट-डिपेंडेंट सेक्टर्स पर दबाव और एक्सपोर्ट सेक्टर्स को फायदा मिल सकता है.
सवाल 4: FII की लगातार बिकवाली बाजार के लिए कितना बड़ा खतरा है?
जवाब: शॉर्ट टर्म में दबाव बनता है, लेकिन DII और SIP फ्लो बाजार को संतुलन में रख रहे हैं.
सवाल 5: निफ्टी के लिए अगला अहम सपोर्ट लेवल कौन सा है?
जवाब: निफ्टी के लिए 25,900 और 25,800 अहम सपोर्ट लेवल माने जा रहे हैं.