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शेयर बाजार में लगातार 5 हफ्तों से गिरावट! (Image Source-AI)
भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता किसी डरावने सपने जैसा रहा. दलाल स्ट्रीट पर छाई मायूसी थमने का नाम नहीं ले रही है. शुक्रवार, 27 मार्च को जब बाजार बंद हुआ, तो निवेशकों के चेहरे उतरे हुए थे. लगातार पांचवें हफ्ते बाजार ने गिरावट का लाल निशान देखा है. गिरता रुपया, आसमान छूता कच्चा तेल और मिडिल ईस्ट में बढ़ती जंग की आग ने निवेशकों के हौसले पस्त कर दिए हैं. आलम यह है कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांक 2 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर बंद हुए.
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाला हफ्ता भी काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है. वैश्विक स्तर पर हो रही उठापटक अब सीधे तौर पर भारतीय मिडिल क्लास की जेब और पोर्टफोलियो पर असर डाल रही है. विदेशी बाजारों से आ रहे खराब संकेतों ने घरेलू मोर्चे पर भी डर का माहौल बना दिया है.
शुक्रवार का दिन शेयर बाजार के लिए 'ब्लैक फ्राइडे' जैसा साबित हुआ. सेंसेक्स में 1,690 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो करीब 2.25 प्रतिशत की कमी है. कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 73,583 के स्तर पर जा गिरा. निफ्टी की हालत भी कुछ अलग नहीं थी. निफ्टी 487 अंक यानी 2.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,819.60 पर सेटल हुआ.
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सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बिकवाली के दबाव से खुद को बचा नहीं पाए. हर तरफ बिकवाली का माहौल था और खरीदार बाजार से नदारद दिखे.
बाजार के एक्सपर्ट्स ने निफ्टी के तकनीकी पहलुओं पर जो राय दी है, वह काफी सतर्क करने वाली है. जानकारों का कहना है कि अगर निफ्टी 22,700 से 22,500 की रेंज के नीचे मजबूती से गिरता है, तो बिकवाली का दबाव और तेज हो सकता है. ऐसी स्थिति में इंडेक्स सीधे 22,000 से 21,744 के जोन में जा सकता है, जो कि इसके 52 हफ्तों का निचला स्तर है.
ऊपर की ओर जाने की बात करें तो, अब 23,000 से 23,100 का स्तर एक बड़ी बाधा (रेसिस्टेंस) बन गया है. इसके बाद 23,300 से 23,500 के बीच भारी सप्लाई जोन है, जहां पहुंचते ही फिर से बिकवाली शुरू हो सकती है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को भड़का दिया है. ब्रेंट क्रूड अब 112 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है, ऐसे में तेल का महंगा होना सीधे तौर पर महंगाई को दावत देना है. तेल की इन कीमतों ने देश के व्यापार घाटे को बढ़ाने का डर पैदा कर दिया है.
दूसरी ओर, भारतीय रुपया भी लगातार कमजोर हो रहा है. डॉलर के मुकाबले रुपया 94 के पार फिसल गया है. जब रुपया गिरता है और तेल महंगा होता है, तो शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगता है और वे अपना पैसा निकालने लगते हैं.
जब शेयर बाजार गिरता है और दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं. यही वजह है कि शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखा गया. दोनों कीमती धातुओं में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई. सोने-चांदी की यह खरीदारी साफ इशारा कर रही है कि निवेशक फिलहाल रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं और वे अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना चाहते हैं.
मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब ग्लोबल मार्केट के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई है, उसने निवेशकों को किनारे पर बैठने पर मजबूर कर दिया है. जब तक वहां से कोई शांति का संकेत नहीं मिलता, तब तक बाजार में रिकवरी की उम्मीद करना थोड़ा मुश्किल लग रहा है.
Q: पिछले हफ्ते शेयर बाजार में कितनी गिरावट आई?
A: शुक्रवार को सेंसेक्स 2.25 प्रतिशत (1,690 अंक) और निफ्टी 2.09 प्रतिशत (487 अंक) गिरकर बंद हुआ. यह लगातार पांचवां हफ्ता था जब बाजार में गिरावट रही.
Q: निफ्टी के लिए अगला बड़ा सपोर्ट लेवल क्या है?
A: जानकारों के अनुसार, निफ्टी के लिए 22,700 से 22,500 का स्तर अहम है. अगर यह टूटता है, तो निफ्टी अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर 21,744 तक जा सकता है.
Q: कच्चे तेल की कीमतों का बाजार पर क्या असर हो रहा है?
A: ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है. भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए महंगा तेल महंगाई और व्यापार घाटे को बढ़ाता है, जिससे बाजार गिरता है.
Q: सोने और चांदी की कीमतों में तेजी क्यों आ रही है?
A: वैश्विक अनिश्चितता और शेयर बाजार की गिरावट के कारण निवेशक 'सेफ हेवन' यानी सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी को चुन रहे हैं, जिससे इनकी मांग और दाम बढ़ रहे हैं.
Q: रुपये की वर्तमान स्थिति क्या है?
A: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 94 के स्तर को पार कर गया है, जिससे विदेशी निवेशकों में चिंता बनी हुई है.