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India-US Trade Deal पर आया दो बड़े ब्रोकरेज का नजरिया!
भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले एक साल से जिस गर्माहट की कमी महसूस हो रही थी, वह अब इस नई ट्रेड डील के साथ लौट आई है. बाजार में छाई मायूसी और 'क्या होगा' वाली शंकाएं अब साफ होने लगी हैं. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन और नोमुरा ने इस समझौते को भारत के लिए एक गेम-चेंजर बताया है.
बर्नस्टीन का कहना है कि यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच एक बहुत ही मैच्योर समझ को दिखाता है. पिछले एक साल से जिस तरह की बातचीत रुकी हुई थी, उसे देखते हुए यह सेटअप काफी शानदार लग रहा है. बाजार में पहले जो उत्साह गायब हो रहा था और लोग शक कर रहे थे कि क्या वाकई भारत को इस डील से कुछ फायदा मिलेगा, यह घोषणा उन सारे बादलों को हटा देती है.
खासकर ऑटो कंपोनेंट्स और फार्मा सेक्टर के लिए यह खबर किसी ढाल से कम नहीं है. बर्नस्टीन ने साफ किया है कि फार्मा सेक्टर को संभावित खतरों से इस डील ने बचा लिया है. हालांकि, निफ्टी के लिए उनका टारगेट 28,100 का है, लेकिन फिलहाल वो भारत पर 'न्यूट्रल' रेटिंग बनाए हुए हैं.
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जेम्स, ज्वैलरी और डायमंड: यह इस डील का सबसे बड़ा 'विनर' सेक्टर है. जेम्स और डायमंड पर से न सिर्फ टैरिफ हटाए गए हैं, बल्कि ज्वैलरी निर्यात पर लगने वाली 50% ड्यूटी अब घटकर मात्र 18% रह गई है.
टेक्सटाइल और कपड़े: अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करने वाले कपड़ा उद्योग के लिए यह राहत की खबर है. ड्यूटी में 32% की सीधी कटौती से भारतीय कपड़े अमेरिकी बाजारों में और भी प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे.
ऑर्गेनिक केमिकल्स: केमिकल सेक्टर के लिए भी ड्यूटी का ढांचा बदल गया है. अब 50% की जगह सिर्फ 18% टैक्स देना होगा, जो सीधे कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन में जुड़ेगा.
ऑटो कंपोनेंट्स: बर्नस्टीन के अनुसार, ऑटो पार्ट्स के लिए एक 'पॉजिटिव सेटअप' तैयार हुआ है. अमेरिकी ऑटोमोबाइल मार्केट में भारतीय पुर्जों की मांग और सप्लाई दोनों बढ़ने की उम्मीद है.
फार्मा सेक्टर: इस सेक्टर को एक 'सुरक्षा कवच' दिया गया है. डील का बारीक हिस्सा (Fine print) फार्मा को किसी भी संभावित निगेटिव असर से बचाता है, जिससे दवाओं का एक्सपोर्ट बिना रुकावट जारी रहेगा.
एयरक्राफ्ट पार्ट्स: विमानों के पुर्जों पर से टैरिफ हटाने का फैसला इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए बड़े ऑर्डर के रास्ते खोलेगा.
कच्चा तेल (Crude Oil): हालांकि दूर से तेल मंगाने का ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा, लेकिन ट्रेड डील के तहत मिलने वाले टैरिफ बेनेफिट्स उस अतिरिक्त लागत को पूरी तरह कवर कर लेंगे.
नोमुरा ने इस बात की तारीफ की है कि भारत ने कृषि जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी 'रेड लाइन्स' (शर्तों) से समझौता नहीं किया. इसका मतलब है कि देश के अंदर इस डील का कोई राजनीतिक विरोध होने की गुंजाइश बहुत कम है. नोमुरा का मानना है कि इस क्लैरिटी से बाजार में फैली अनिश्चितता खत्म होगी.

जेम्स और डायमंड: इन पर से टैरिफ पूरी तरह हटा लिए गए हैं.
एयरक्राफ्ट पार्ट्स: विमानों के पुर्जों पर भी राहत दी गई है.
खरीद का वादा: अमेरिका ने अगले 5 सालों में 500 बिलियन डॉलर की खरीद का कमिटमेंट किया है. हालांकि, यह देखना होगा कि यह वादा समय पर पूरा होता है या इसमें देरी होती है.
भले ही डील बहुत अच्छी है, लेकिन बर्नस्टीन एक कड़वा सच भी सामने रखते हैं. उनका कहना है कि इस फायदे का सीधा फायदा उठाने के लिए बाजार में बहुत ज्यादा 'डायरेक्ट और बड़े स्टॉक्स' मौजूद नहीं हैं.
निफ्टी को लेकर अनुमान है कि शॉर्ट टर्म में एक रैली दिख सकती है जो बाजार को 26,500 के स्तर तक ले जा सकती है. यह वही स्तर है जहां से हमने साल की शुरुआत की थी. निवेशकों के लिए यह राहत की बात है कि डील की बारीकियां (Fine print) मोटे तौर पर पॉजिटिव हैं.
भारत और अमेरिका की यह ट्रेड डील सिर्फ व्यापारिक आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह दो बड़े देशों के बीच भरोसे की वापसी है. ड्यूटी में 50% से 18% की गिरावट और फार्मा-ऑटो जैसे सेक्टरों को मिली सुरक्षा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत नींव का काम करेगी. हालांकि, 500 बिलियन डॉलर के खरीद वादे पर नजर रखना जरूरी होगा, लेकिन फिलहाल तो बाजार के लिए यह 'फील गुड' फैक्टर है.