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भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट हमेशा से उस मजबूत ढाल की तरह रहा है, जो मुश्किल वक्त में देश के विदेशी मुद्रा भंडार और बैलेंस ऑफ पेमेंट (BoP) को बचाए रखता है. लेकिन अब इस ढाल पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं.
दिग्गज ग्लोबल बैंक सिटी (Citi) ने एक ऐसी रिपोर्ट जारी की है जिसने बाजार के गलियारों में हलचल मचा दी है. यह पूरी कहानी एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उन चुनौतियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो आने वाले समय में भारत के आईटी सेक्टर के लिए बड़ी रुकावट बन सकती हैं.
भारत जब भी दुनिया के साथ व्यापार करता है, तो उसके पास डॉलर आने और जाने का एक हिसाब होता है जिसे बैलेंस ऑफ पेमेंट कहा जाता है. अब तक हमारे देश के सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट ने इस मोर्चे पर कमाल का काम किया है.
इसी सेक्टर की बदौलत भारत का बीओपी (BoP) काफी लचीला और मजबूत रहा है. आसान शब्दों में कहें तो, हम जितना सामान बाहर से मंगवाते हैं, उससे होने वाले घाटे को हमारा सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट काफी हद तक पाट देता है. आरबीआई (RBI) के ताजा आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि आईटी और कंसल्टेंसी सेक्टर में अभी भी डबल डिजिट यानी दहाई के अंकों में ग्रोथ देखने को मिल रही है.
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मगर असली पेंच यहीं फंसता है. सिटी की रिपोर्ट कहती है कि एआई (AI) की वजह से सॉफ्टवेयर सेक्टर के सामने नई चुनौतियां (Headwinds) खड़ी हो रही हैं. अगर इन चुनौतियों की वजह से सॉफ्टवेयर सेवाओं में सालाना आधार पर गिरावट शुरू हुई, तो यह पूरे देश के लिए चिंता की बात होगी.
रिपोर्ट में एक खास एनालिसिस (Sensitivity Analysis) किया गया है, जिसके मुताबिक सॉफ्टवेयर सेक्टर को किसी भी कीमत पर अपनी ग्रोथ को गिरने से बचाना होगा. अगर हम इस गिरावट को रोकने में सफल रहे, तभी भारत अपना बैलेंस ऑफ पेमेंट सरप्लस यानी मुनाफे की स्थिति बरकरार रख पाएगा.
सबसे डराने वाला आंकड़ा वित्त वर्ष 2027 (FY27) को लेकर सामने आया है. रिपोर्ट की मानें तो अगर एआई के असर की वजह से सॉफ्टवेयर सेवाओं की ग्रोथ सपाट (Flat Growth) रह जाती है, तो इसका सीधा असर देश के खजाने पर पड़ेगा.
भारत के पास फिलहाल करीब 20 अरब डॉलर का जो बैलेंस ऑफ पेमेंट सरप्लस है, वह पूरी तरह से साफ हो सकता है. यानी सिर्फ एक साल की सुस्ती हमारे अरबों डॉलर के मुनाफे को शून्य पर ला सकती है. यह स्थिति तब पैदा होगी जब आईटी सेक्टर नई ऊंचाइयों पर पहुंचने के बजाय एक जगह रुक जाएगा.
सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट केवल कंपनियों का मुनाफा नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक सेहत की गारंटी है. सिटी का इशारा साफ है कि अगर सॉफ्टवेयर सेक्टर में साल-दर-साल गिरावट आने लगी, तो डॉलर की आमद कम हो जाएगी.
अभी तक जो आरबीआई का डेटा हमें राहत दे रहा है, वह भविष्य में बदल सकता है. इसलिए यह बेहद जरूरी हो गया है कि भारतीय आईटी कंपनियां एआई के दौर में खुद को इतनी तेजी से ढालें कि उनकी ग्रोथ में कोई रुकावट न आए.
भारतीय आईटी जगत के लिए अब एक-एक प्रतिशत की ग्रोथ की कीमत बढ़ गई है. सिटी के मुताबिक, सॉफ्टवेयर सेवाओं में स्थिरता ही भारत को ग्लोबल मार्केट में विजेता बनाए रख सकती है.
अगर ग्रोथ का यह पहिया थमा, तो 20 अरब डॉलर का वह सुरक्षा घेरा टूट जाएगा जो हमें बाहरी आर्थिक झटकों से बचाता है. यह रिपोर्ट एक तरह से चेतावनी है कि हमें एआई की चुनौतियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा कनेक्शन देश के बैलेंस ऑफ पेमेंट से जुड़ा हुआ है.