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बाजार की चाल भी किसी फिल्म की कहानी की तरह होती है, जहां उतार-चढ़ाव सस्पेंस बनाए रखते हैं. साल 2025 के शुरुआती 9 महीने भले ही थोड़े सुस्त रहे हों, लेकिन आखिरी तीन महीनों ने पूरी तस्वीर ही बदल दी. भारत के प्राइवेट इक्विटी (PE) मार्केट ने साल के अंत में ऐसी रफ्तार पकड़ी कि देखने वाले दंग रह गए.
लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) की ताजा रिपोर्ट एक बहुत ही सुखद संकेत दे रही है. साल 2025 की चौथी तिमाही (Q4) में प्राइवेट इक्विटी निवेश में 44.3% की तगड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस दौरान करीब 3.7 बिलियन डॉलर का निवेश भारतीय कंपनियों में आया. यह पिछले एक साल का सबसे ऊंचा तिमाही स्तर है.
अगर हम साल 2025 को एक बड़े फ्रेम में देखें, तो तस्वीर थोड़ी मिली-जुली नजर आती है. साल के आखिरी हफ्तों में आए निवेश की बाढ़ के बावजूद, पूरे साल का कुल निवेश पिछले साल के मुकाबले 23.7% कम रहा. साल 2025 में कुल 12.1 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ.
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इसके पीछे की मुख्य वजह दुनिया भर में बनी आर्थिक अनिश्चितता थी, जिसकी वजह से निवेशक काफी संभलकर पैसा लगा रहे थे. लेकिन राहत की बात यह रही कि इस सुस्ती के बीच भी कुछ खास सेक्टर ऐसे थे जिन्होंने अपनी चमक फीकी नहीं पड़ने दी.
LSEG डील्स इंटेलिजेंस की एनालिस्ट वियांका सांचेज का कहना है कि भले ही निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई, लेकिन तकनीक से जुड़े सेक्टर मजबूती से डटे रहे. इंटरनेट आधारित कंपनियों और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों ने निवेशकों को सबसे ज्यादा आकर्षित किया.
आंकड़ों पर गौर करें तो इन दो सेक्टर्स ने मिलकर साल 2025 में 6.7 बिलियन डॉलर बटोरे. यह पूरे साल में हुए कुल निवेश का आधे से भी ज्यादा हिस्सा है. हालांकि, इन सेक्टर्स में भी निवेश पिछले साल के मुकाबले 1.9% कम रहा, जिससे यह साफ पता चलता है कि अब निवेशक हर किसी को पैसा देने के बजाय केवल चुनिंदा और मजबूत बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों को ही चुन रहे हैं.
एक तरफ जहां कंपनियों में निवेश की अच्छी खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ नए फंड जुटाने (Fundraising) के मामले में थोड़ा सूखा देखने को मिला. भारतीय प्राइवेट इक्विटी कंपनियों के लिए फंड जुटाने के मामले में साल 2025 काफी चुनौतीपूर्ण रहा. इस साल कुल 3.8 बिलियन डॉलर ही जुटाए जा सके, जो साल 2017 के बाद का सबसे निचला स्तर है.
यह सिर्फ भारत की कहानी नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में ही फंड जुटाने की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है. हालांकि, एक अच्छी बात यह है कि साल 2022 से अब तक करीब 28.5 बिलियन डॉलर की पूंजी जमा हो चुकी है. जैसे-जैसे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और कंपनियों की वैल्यूएशन सही स्तर पर आएगी, यह जमा पूंजी आने वाले समय में बाजार में नए सौदों की बाढ़ ला सकती है.
मार्केट एक्सपर्ट्स और बिजनेस एनालिटिक्स फर्म्स का मानना है कि भारत की अगली ग्रोथ स्टोरी कुछ नए और उभरते हुए सेक्टर्स पर टिकी होगी. डिजिटलाइज्ड लॉजिस्टिक्स, डेटा पर आधारित सेवाएं और क्लीन एनर्जी यानी क्लीन एनर्जी आने वाले समय में उत्पादकता को एक नए स्तर पर ले जाएंगे.
आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रीन पोर्ट्स और क्विक कॉमर्स जैसे सेक्टर्स न केवल भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाले हैं, बल्कि यह समावेशी विकास (Inclusive Growth) के नए रास्ते भी खोलेंगे. जानकारों का कहना है कि अब समय आ गया है जब प्राइवेट कैपिटल को और ज्यादा प्रोत्साहित किया जाए और सही सरकारी नीतियों के जरिए इस बदलाव को और तेज किया जाए.
1. Q4 2025 में प्राइवेट इक्विटी निवेश में कितनी बढ़ोतरी हुई?
चौथी तिमाही में निवेश में 44.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कुल निवेश 3.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया.
2. साल 2025 में किस सेक्टर को सबसे ज्यादा पैसा मिला?
टेक्नोलॉजी और इंटरनेट आधारित कंपनियों को सबसे ज्यादा निवेश मिला. इन सेक्टर्स ने कुल 6.7 बिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जो कुल फंड का 50% से अधिक है.
3. पूरे साल के निवेश में गिरावट की क्या वजह रही?
साल 2025 में कुल निवेश में 23.7% की गिरावट आई. इसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बना सतर्क निवेश माहौल और आर्थिक अनिश्चितता थी.
4. फंड जुटाने (Fundraising) के मामले में 2025 कैसा रहा?
भारत में फंड जुटाने की रफ्तार काफी सुस्त रही. 3.8 बिलियन डॉलर के साथ यह साल 2017 के बाद का सबसे कमजोर साल साबित हुआ.
5. भविष्य में किन सेक्टर्स से ग्रोथ की उम्मीद है?
आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लीन एनर्जी, डिजिटल लॉजिस्टिक्स और क्विक कॉमर्स जैसे सेक्टर्स भारत की ग्रोथ में बड़ी भूमिका निभाएंगे.