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रामदेव अग्रवाल से जानें बाजार की की गिरावट में कैसे करें निवेश.
Market Fall Strategy: ग्लोबल अनिश्चितता, युद्ध के हालात और बाजार की तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. पोर्टफोलियो लाल है, और निवेशकों की टेंशन बढ़ रही है, कि क्या पोर्टफोलियो में हरे निशान में आएगा या नहीं. ऐसे माहौल में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बाजार से दूर रहें या इस गिरावट को मौके की तरह देखें. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन और दिग्गज मार्केट गुरु रामदेव अग्रवाल ने अपने “वेल्थ मंत्र” में साफ कहा कि ये गिरावट डरने का नहीं, बल्कि समझदारी का समय है.
रामदेव अग्रवाल के मुताबिक, युद्ध और ग्लोबल घटनाएं बाजार में “शोर” पैदा करती हैं. इससे शॉर्ट टर्म में डर बनता है, लेकिन लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन पर इसका असर सीमित होता है. उनका मानना है कि भारत की “इकोनॉमिक मशीन” मजबूत है और जब तक यह चलती रहेगी, बाजार भी लंबी अवधि में ऊपर जाएगा. ऐसे में पैनिक सेलिंग से बचना सबसे जरूरी है.
उन्होंने भारत की ग्रोथ को लेकर बड़ा दावा किया. पिछले 17 साल में भारत की इकोनॉमी $1 ट्रिलियन से $4 ट्रिलियन पहुंची है और अगले 15-17 साल में यह $16 ट्रिलियन तक जा सकती है. इसका सीधा असर शेयर बाजार पर भी दिखेगा, जहां मार्केट कैप 5-6 गुना तक बढ़ सकता है. यह संकेत देता है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए भारत अब भी एक मजबूत ग्रोथ मार्केट है.
निफ्टी का P/E जो पहले 24-25 के ऊपरी स्तर पर था, अब गिरकर करीब 20 के आसपास आ गया है. इसे एक्सपर्ट “फेयर वैल्यू” मानते हैं. यानी बाजार में ओवरवैल्यूएशन का दबाव कम हुआ है और अच्छी कंपनियों में एंट्री का मौका बन रहा है. रामदेव अग्रवाल का कहना है कि निवेशक को हमेशा “प्राइस” नहीं, बल्कि “वैल्यू” देखनी चाहिए.
उन्होंने गोल्ड पर दिलचस्प नजरिया रखा. उनके अनुसार सोने की माइनिंग कॉस्ट करीब $1700-$1800 प्रति औंस है, जबकि कीमत $4500 के आसपास है. यानी कीमतों में तेजी “डर” के कारण ज्यादा है, न कि पूरी तरह फंडामेंटल वजहों से. इससे संकेत मिलता है कि गोल्ड में भी निवेश करते समय सावधानी जरूरी है.
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रामदेव अग्रवाल ने साफ कहा कि बाजार में सफलता “एक्शन” से नहीं, बल्कि “पेशेंस” से मिलती है. बार-बार ट्रेडिंग और ज्यादा ट्रांजेक्शन से बचना चाहिए. उनका मानना है कि जब बाजार में रिकवरी आएगी, तो डोमेस्टिक कंजम्पशन, ऑटो और मजबूत इकोनॉमी से जुड़े सेक्टर्स फिर से लीडर बनेंगे.
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दिलचस्प बात यह है कि वह खुद इस समय बाजार में “फुल्ली इन्वेस्टेड” हैं. उन्होंने हाल ही में डिविडेंड और अन्य फंड्स को बाजार में लगाया है. इसका मतलब साफ है कि बड़े निवेशक गिरावट को मौका मान रहे हैं.

मौजूदा गिरावट में सबसे बड़ा संदेश यह है कि शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है. अगर आपका नजरिया लंबी अवधि का है, तो यह समय मजबूत कंपनियों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने का हो सकता है. हालांकि, जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इसलिए “स्टैगर्ड इन्वेस्टिंग” यानी किस्तों में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित रणनीति हो सकती है.
बॉटमलाइन यही है कि बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा रहेगा, लेकिन वेल्थ क्रिएशन का असली मंत्र है- सही वैल्यू पर खरीदें, धैर्य और लंबी अवधि का नजरिया रखें.
1. क्या अभी बाजार में निवेश करना सही है?
अगर आपका नजरिया लंबी अवधि का है, तो गिरावट में निवेश एक अच्छा मौका हो सकता है.
2. क्या बाजार में और गिरावट आ सकती है?
शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म ट्रेंड भारत की ग्रोथ पर निर्भर करेगा.
3. किन सेक्टर्स पर फोकस करना चाहिए?
डोमेस्टिक कंजम्पशन, ऑटो और मजबूत फंडामेंटल वाले सेक्टर्स पर ध्यान देना चाहिए.
4. क्या गोल्ड में निवेश सुरक्षित है?
गोल्ड सेफ हेवन है, लेकिन मौजूदा स्तर पर कीमतों में “डर प्रीमियम” शामिल है, इसलिए सावधानी जरूरी है.
5. सबसे बड़ी गलती क्या होती है?
पैनिक में बेच देना और बिना समझे बार-बार ट्रेड करना निवेशकों की सबसे बड़ी गलती होती है.
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