शेयर बाजार में वेल्थ बनाने का क्या है असली 'फॉर्मूला'? नीलेश शाह से जानिए कहां गलती कर देते हैं निवेशक

Wealth Creation Mantra: ज़ी बिज़नेस Wealth Creation Summit 2026 में अनिल सिंघवी के साथ बातचीत में नीलेश शाह ने बेहद आसान लेकिन गहरी बातों के जरिए समझाया कि आखिर शेयर बाजार में बड़ा पैसा कैसे बनता है और निवेशक सबसे बड़ी गलती कहां करते हैं.
शेयर बाजार में वेल्थ बनाने का क्या है असली 'फॉर्मूला'? नीलेश शाह से जानिए कहां गलती कर देते हैं निवेशक

Wealth Creation Summit: शेयर बाजार में वेल्थ बनाने का फॉर्मूला. (फोटो: Zee Business)

Wealth Creation Mantra: शेयर बाजार में पैसा कमाने की बात आते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहले ‘जल्दी अमीर बनने’ का सपना आता है. कोई मल्टीबैगर ढूंढ रहा होता है, कोई ट्रेडिंग से हर दिन कमाई का शॉर्टकट. लेकिन कोटक म्यूचुअल फंड के MD नीलेश शाह का मानना है कि असली वेल्थ कभी भी रातों-रात नहीं बनती. इसके लिए धैर्य, अनुशासन और समय सबसे बड़े हथियार हैं.

ज़ी बिज़नेस Wealth Creation Summit 2026 में अनिल सिंघवी के साथ बातचीत में नीलेश शाह ने बेहद आसान लेकिन गहरी बातों के जरिए समझाया कि आखिर शेयर बाजार में बड़ा पैसा कैसे बनता है और निवेशक सबसे बड़ी गलती कहां करते हैं.

कम पैसे से भी बन सकती है बड़ी वेल्थ?

नीलेश शाह कहते हैं कि अगर आपके पास शुरुआत में बड़ी रकम नहीं है, तब भी चिंता करने की जरूरत नहीं है. असली ताकत रकम में नहीं, बल्कि समय में होती है. उन्होंने वॉरेन बफे का उदाहरण देते हुए कहा कि बफे ने भी छोटी उम्र और छोटी पूंजी से शुरुआत की थी. लेकिन उन्होंने अपने निवेश को समय दिया. यही वजह है कि आज उनका नाम दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में लिया जाता है.

उनके मुताबिक, ज्यादातर लोग इसलिए सफल नहीं हो पाते क्योंकि हर किसी को बहुत जल्दी अमीर बनना है. जबकि वेल्थ क्रिएशन का असली फॉर्मूला ‘धीरे-धीरे अमीर बनने' का है.

‘शनै-शनै’... वेल्थ क्रिएशन का सबसे बड़ा मंत्र

नीलेश शाह ने संस्कृत के एक सुभाषित के जरिए निवेश का बेहद सरल सिद्धांत समझाया. उनका कहना था कि जैसे लंबी यात्रा एक-एक कदम से पूरी होती है, जैसे एक कपड़ा हजारों सिलाइयों से तैयार होता है और जैसे पहाड़ भी धीरे-धीरे चढ़ा जाता है, ठीक वैसे ही बड़ी वेल्थ भी समय के साथ बनती है.

उन्होंने साफ कहा कि बाजार में कंपाउंडिंग तभी काम करती है, जब निवेशक धैर्य रखता है. जो लोग हर गिरावट में घबराते हैं, वे लंबी दौड़ का फायदा नहीं उठा पाते.

बाजार की गिरावट दुश्मन नहीं, मौका है

नीलेश शाह का मानना है कि शेयर बाजार की सबसे बड़ी चुनौती मार्केट नहीं, बल्कि निवेशक का खुद का व्यवहार होता है. उन्होंने कहा कि गिरावट के समय निवेशकों को घबराने की बजाय अपने एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए. जब बाजार बहुत ऊपर चला जाए तो थोड़ा मुनाफा निकालना और जब बाजार टूटे तो धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना समझदारी होती है.

उन्होंने कोविड क्रैश का उदाहरण देते हुए कहा कि जिसने उस समय खरीदारी की, उसने बाद में शानदार रिटर्न कमाए. जबकि जिन्होंने डरकर बेच दिया, वे सबसे ज्यादा नुकसान में रहे.

ट्रेडिंग क्यों हर किसी के बस की बात नहीं?

नीलेश शाह ने ट्रेडिंग को लेकर भी बड़ी साफ बात कही. उन्होंने बताया कि आज का बाजार पहले जैसा नहीं है. अब छोटे निवेशक का मुकाबला बड़ी मशीनों, एल्गोरिदम और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स से है.

उन्होंने इसे बेहद दिलचस्प अंदाज में समझाया. उनका कहना था कि आम निवेशक बिना किसी खास टेक्नोलॉजी के मैदान में उतरता है, जबकि सामने वाला ‘Iron Man’ का सूट पहनकर खेल रहा होता है. यही वजह है कि उन्होंने आम निवेशकों को ट्रेडिंग की बजाय लंबी अवधि के निवेश पर ज्यादा फोकस करने की सलाह दी.

लक्ष्मी तक पहुंचने का रास्ता ‘सरस्वती’ से होकर जाता है

नीलेश शाह की सबसे दिलचस्प बातों में से एक थी ‘लक्ष्मी और सरस्वती’ वाला उदाहरण. उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में सिर्फ पैसे के पीछे भागने से पैसा नहीं मिलता. अगर आपको वेल्थ बनानी है तो पहले ज्ञान हासिल करना होगा. रिसर्च, सीखना और समझना बेहद जरूरी है. उनके मुताबिक, बाजार में टिकाऊ पैसा वही बनाता है जो लगातार सीखता रहता है.

नए दौर के 4 निवेश विकल्पों पर भी रखें नजर

नीलेश शाह ने कहा कि अब निवेशकों को पारंपरिक निवेश से आगे बढ़कर नए एसेट क्लास भी समझने चाहिए.

उन्होंने Short-Term Alternative Funds (SAF), Performing Credit AIF, REITs-InvITs और Gift City के जरिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग जैसे विकल्पों को आने वाले समय के लिए अहम बताया. उनका मानना है कि पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) अब पहले से ज्यादा जरूरी हो चुकी है.

SAF (Short-Term Alternative Funds): जहां रेगुलेटर ने लॉन्ग-शॉर्ट और लीवरेज दोनों की इजाजत दी है.

परफॉर्मिंग क्रेडिट एआईएफ (AIF): जहां इस वक्त बोरोअर्स ज्यादा हैं और लेंडर्स कम, सुरक्षा और रिटर्न अच्छे हैं.

REITs और InvITs: रियल एस्टेट सीधे खरीदने के बजाय बाजार से रीट्स और इनविट्स लें। पिछले 3 साल का इंडेक्स रिटर्न 13.5% से ऊपर रहा है.

गिफ्ट सिटी (Gift City) के जरिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग: बिजनेस डायवर्सिफिकेशन और भारत से बाहर के सेक्टर्स (जैसे AI, सेमीकंडक्टर, बायोटेक) में निवेश के लिए.

नए निवेशकों के लिए सबसे खूबसूरत सलाह

पिछले कुछ समय से बाजार की सुस्ती और उतार-चढ़ाव से परेशान नए निवेशकों के लिए नीलेश शाह ने एक बेहद खूबसूरत शायरी सुनाई —

“परिंदे शुक्रगुजार हैं पतझड़ के भी दोस्तों...
सदाबहार होती तो तिनके कहां से लाते...”

यानी बाजार की गिरावट और कमजोरी ही वो समय होता है, जब अच्छे शेयर सस्ते भाव पर मिलते हैं. असली निवेशक वही होता है जो ऐसे समय में धैर्य बनाए रखे.

वेल्थ बनाने का निष्कर्ष क्या है?

नीलेश शाह की पूरी बातचीत का सार बेहद साफ है- शेयर बाजार में बड़ा पैसा जल्दी नहीं, बल्कि सही सोच, धैर्य और लंबे समय से बनता है. जो निवेशक समय को अपना साथी बना लेते हैं, वही आखिर में बड़ी वेल्थ खड़ी कर पाते हैं.

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