बड़ी खबर- अब आएगी रुपये में मजबूती? विदेशी निवेशक भी भारत लौटकर आएंगे! बॉन्ड निवेश पर टैक्स घटा सकती है सरकार

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार विदेशी निवेशकों यानी FPIs के बॉन्ड निवेश पर लगने वाले टैक्स को घटा सकती है. माना जा रहा है कि इस कदम का मकसद भारतीय बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेश बढ़ाना और रुपये पर दबाव कम करना है. रिपोर्ट के अनुसार, RBI ने सरकार को विदेशी बॉन्ड निवेश पर टैक्स कम करने की सिफारिश की थी.
बड़ी खबर- अब आएगी रुपये में मजबूती? विदेशी निवेशक भी भारत लौटकर आएंगे! बॉन्ड निवेश पर टैक्स घटा सकती है सरकार

विदेशी बॉन्ड इन्वेस्टमेंट पर सरकार घटा सकती है टैक्स. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

शेयर बाजार में लगातार गिरावट और इकोनॉमी को लेकर चिंताओं के बीच भारत सरकार कई कदम उठा रही है. अब बाजार के लिहाज से एक अच्छी खबर आ रही है. जानकारी है कि रुपए में लगातार कमजोरी और विदेशी निवेश में सुस्ती के बीच सरकार बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार विदेशी निवेशकों यानी FPIs के बॉन्ड निवेश पर लगने वाले टैक्स को घटा सकती है. माना जा रहा है कि इस कदम का मकसद भारतीय बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेश बढ़ाना और रुपये पर दबाव कम करना है.

क्या है पूरी खबर?

रिपोर्ट के अनुसार, RBI ने सरकार को विदेशी बॉन्ड निवेश पर टैक्स कम करने की सिफारिश की थी. फिलहाल विदेशी निवेशकों को भारत में बॉन्ड निवेश पर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों तरह के टैक्स देने पड़ते हैं. 2023 तक FPIs को 5% की रियायती टैक्स दर का फायदा मिलता था, लेकिन उसके खत्म होने के बाद अब उन पर करीब 20% टैक्स लगता है. यही वजह है कि कई विदेशी निवेशक भारतीय बॉन्ड मार्केट से दूरी बनाए हुए हैं.

क्यों है जरूरी?

भारत में टैक्स स्ट्रक्चर इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको और साउथ अफ्रीका जैसे देशों के मुकाबले ज्यादा है. ऐसे में अगर टैक्स में राहत दी जाती है, तो भारत का बॉन्ड मार्केट विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बन सकता है. फिलहाल भारत के करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर के बॉन्ड मार्केट में FPIs की हिस्सेदारी सिर्फ 3% है.

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विदेशी मुद्रा रिजर्व को बचाने के लिए सरकार उठा रही है कदम

सरकार ने आर्थिक चिंताओं के बीच दो बड़े एक्शन लिए हैं:
1. भारत में क्रूड प्रोडक्शन पर रॉयल्टी घटाई
2. गोल्ड-सिल्वर पर जोर से इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई

इससे बाजार को उम्मीद है कि सरकार कुछ और कदम उठाएगी, जिससे रुपया मजबूत हो और डॉलर बाहर जाना कम हो जाए. रुपए को मजबूत करने के लिए फॉरेक्स से जुड़े उपाय आ सकते हैं. भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाने की कोशिशों पर जो अटकलें लग रही थीं, सरकार इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए विदेशी बॉन्ड पर टैक्स घटाने पर विचार कर सकती है.

क्या रुपये की गिरावट थमेगी?

इस खबर को रुपये में लगातार गिरावट से जोड़कर भी देखा जा रहा है. 2026 में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 6% टूट चुका है और एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी बना हुआ है. विदेशी निवेश बढ़ने से डॉलर इनफ्लो मजबूत हो सकता है, जिससे रुपये को कुछ सपोर्ट मिलने की उम्मीद है.

गुरुवार के कारोबारी सत्र में रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.95/$ तक फिसल गया. हालांकि बाद में इसमें थोड़ी रिकवरी आई और रुपया 95.71/$ के स्तर पर कारोबार करता दिखा. वहीं ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के बाद बॉन्ड मार्केट में खरीदारी देखने को मिली, जिससे 10 साल की बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड 2 बेसिस पॉइंट गिरकर 7.03% पर आ गई.

बाजार की कहां रहेगी नजर?

इस खबर के बाद बॉन्ड मार्केट और बैंकिंग सेक्टर के कुछ शेयर फोकस में रह सकते हैं. खास तौर पर PNB Gilts, HDFC Bank, ICICI Bank और Reliance Industries जैसे स्टॉक्स पर बाजार की नजर रहेगी.

इस खबर के बाद PNB Gilts का शेयर 16.76% की तेजी के साथ 80.82 रुपये पर ट्रेड करता दिखा. ICICI Bank का शेयर 1.1% की तेजी के साथ 1,250 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रहा था. वहीं, HDFC Bank का शेयर 3% की तेजी के साथ 772 रुपये पर ट्रेड कर रहा था.

विदेशी निवेशकों के निवेश को लेकर भारत में क्या हैं नियम?

भारत में Foreign Institutional Investors (FIIs), Non-Resident Indians (NRIs) और Persons of Indian Origin (PIOs) को Portfolio Investment Scheme (PIS) के तहत निवेश की अनुमति दी जाती है. इस स्कीम के जरिए ये निवेशक भारतीय कंपनियों के शेयर और डिबेंचर प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट में खरीद सकते हैं. यह निवेश भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों के माध्यम से किया जाता है.

FIIs के लिए किसी भारतीय कंपनी में कुल निवेश की सीमा आमतौर पर कंपनी की paid-up capital का 24% तय की गई है. वहीं NRIs और PIOs के लिए यह सीमा 10% होती है. हालांकि पब्लिक सेक्टर बैंकों, जैसे State Bank of India में, विदेशी निवेश की सीमा 20% तय है.

अगर किसी कंपनी को ज्यादा विदेशी निवेश आकर्षित करना हो, तो वह FII निवेश सीमा को 24% से बढ़ाकर संबंधित सेक्टर की अधिकतम सीमा (sectoral cap/statutory ceiling) तक ले जा सकती है. इसके लिए कंपनी के बोर्ड की मंजूरी और शेयरधारकों की विशेष प्रस्ताव (special resolution) के जरिए अनुमति जरूरी होती है.

इसी तरह NRIs/PIOs की 10% निवेश सीमा को भी बढ़ाकर 24% तक किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कंपनी की आम बैठक में प्रस्ताव पास करना जरूरी होता है.

महत्वपूर्ण बात यह है कि FIIs के लिए तय सीमा और NRIs/PIOs की सीमा एक-दूसरे से अलग होती हैं. यानी दोनों कैटेगरी के निवेशकों के लिए निवेश लिमिट स्वतंत्र रूप से लागू होती है.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 विदेशी निवेशक भारत के बॉन्ड मार्केट में क्यों निवेश करते हैं?

भारत जैसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी वाले देशों में बॉन्ड निवेशकों को बेहतर यील्ड और लंबी अवधि में स्थिर रिटर्न की संभावना दिखती है. इसी वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बॉन्ड मार्केट में रुचि रखते हैं.

Q2 बॉन्ड मार्केट में विदेशी निवेश बढ़ने से आम निवेशकों को क्या फायदा हो सकता है?

विदेशी निवेश बढ़ने से बाजार में लिक्विडिटी मजबूत होती है, बॉन्ड यील्ड स्थिर रह सकती है और इससे बैंकिंग व फाइनेंशियल सेक्टर को सपोर्ट मिलता है. इसका सकारात्मक असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर भी पड़ सकता है.

Q3 रुपया कमजोर होने से अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है?

रुपये में गिरावट से इंपोर्ट महंगा हो जाता है, खासकर कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान. इससे महंगाई बढ़ सकती है और कंपनियों की लागत पर दबाव आता है.

Q4 बॉन्ड यील्ड गिरने का क्या मतलब होता है?

जब बॉन्ड की खरीदारी बढ़ती है, तो उसकी यील्ड घटती है. इसे अक्सर बाजार में भरोसा बढ़ने और सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जाता है.

Q5 क्या टैक्स में राहत मिलने से भारत में डॉलर इनफ्लो बढ़ सकता है?

अगर सरकार विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स नियम आसान बनाती है, तो भारतीय बॉन्ड मार्केट में ज्यादा विदेशी पैसा आ सकता है. इससे डॉलर इनफ्लो बढ़ने और रुपये को सपोर्ट मिलने की संभावना रहती है.

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