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Goldman Sachs ने बताया भविष्य में कैसा रहेगा शेयर बाजार. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को दो बड़े घटनाक्रमों ने निवेशकों का ध्यान खींचा. पहला, प्रधानमंत्री Narendra Modi का गोल्ड खरीदने को लेकर दिया गया बयान. दूसरा, ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस Goldman Sachs की भारतीय बाजार पर आई नई रणनीतिक रिपोर्ट. इन दोनों घटनाओं ने मार्केट को अलग-अलग दिशा में प्रभावित किया.
एक तरफ पीएम मोदी के बयान के बाद ज्वेलरी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली, तो दूसरी तरफ Goldman Sachs की रिपोर्ट ने यह संकेत दिया कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली अब आखिरी दौर में पहुंच सकती है. हालांकि रिपोर्ट ने यह भी साफ किया कि विदेशी पैसा अभी तुरंत भारतीय बाजार में लौटने वाला नहीं है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लोगों को कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचना होगा. उनका इशारा इस तरफ था कि गोल्ड में ज्यादा पैसा जाने से देश की इंपोर्ट निर्भरता बढ़ती है और अर्थव्यवस्था पर दबाव आता है.
इस बयान का असर सोमवार को शेयर बाजार में तुरंत दिखाई दिया. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में करीब 4.24 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई. वहीं ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली.
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टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स, सेनको गोल्ड और स्काई गोल्ड जैसे शेयरों में 12 फीसदी से ज्यादा तक की गिरावट दर्ज हुई. बाजार को डर है कि अगर गोल्ड खरीदारी को लेकर लोगों की धारणा बदलती है, तो ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री पर असर पड़ सकता है.
इसी बीच Goldman Sachs की रिपोर्ट ने बाजार को एक अलग तस्वीर दिखाई. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में विदेशी निवेशकों (FII) की हिस्सेदारी अब ऐतिहासिक निचले स्तरों के आसपास पहुंच चुकी है. इसका मतलब यह है कि विदेशी निवेशकों की जो बड़ी बिकवाली पिछले कई महीनों से चल रही थी, उसका बड़ा हिस्सा अब पूरा हो चुका है.
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगर आगे भी बिकवाली होती है, तो उसका असर सीमित रह सकता है. Goldman Sachs का मानना है कि अतिरिक्त विदेशी बिकवाली का जोखिम अब करीब 4-5 अरब डॉलर तक सीमित है. यानी बाजार पर लगातार पड़ रहा विदेशी बिकवाली का दबाव अब धीरे-धीरे कम हो सकता है.
यह सवाल इस समय हर निवेशक के मन में है. अगर बिकवाली खत्म हो रही है, तो क्या अब विदेशी निवेशक खरीदारी शुरू करेंगे? Goldman Sachs का जवाब फिलहाल सावधानी भरा है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने से विदेशी निवेशक तुरंत भारतीय बाजार में पैसा नहीं लगाते. इतिहास बताता है कि FII निवेश वापसी में समय लेते हैं.
इसके अलावा सबसे बड़ी चिंता भारतीय कंपनियों की कमाई को लेकर बनी हुई है. Goldman Sachs का कहना है कि कॉरपोरेट अर्निंग्स में मजबूत रिकवरी को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है. जब तक कंपनियों के नतीजों में लगातार मजबूती नहीं दिखती, तब तक विदेशी निवेशक बड़े स्तर पर वापसी करने से बच सकते हैं.
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रिपोर्ट में एक और अहम बात कही गई है. Goldman Sachs के मुताबिक, फिलहाल नॉर्थ एशिया के बाजार- जैसे चीन और दक्षिण कोरिया भारत के मुकाबले बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल दे रहे हैं.
इसका मतलब यह है कि ग्लोबल निवेशकों को दूसरे एशियाई बाजार फिलहाल ज्यादा सस्ते और आकर्षक लग रहे हैं. यही वजह है कि भारत में विदेशी निवेश की वापसी धीमी रह सकती है.
हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी अभी भी मजबूत बनी हुई है. तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, डिजिटल इकोनॉमी और मजबूत घरेलू निवेश भारत को लंबी अवधि में मजबूत बाजार बना सकते हैं.
Goldman Sachs ने कुछ खास सेक्टर्स और शेयरों पर भरोसा जताया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे शेयर जहां विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी अभी कम है, वे आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं.
इन शेयरों में HUL, L&T, Bajaj Auto, Bank of Baroda, Trent, Solar Industries, Siemens, Bajaj Holdings, Bosch, Swiggy, Paytm और MRF शामिल हैं.
रिपोर्ट का मानना है कि जब विदेशी निवेशकों का सेंटिमेंट सुधरेगा, तो इन शेयरों में तेज खरीदारी देखने को मिल सकती है. इसके अलावा Goldman Sachs ने फाइनेंशियल और FMCG सेक्टर पर अपना पॉजिटिव नजरिया दोहराया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ये सेक्टर्स कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव से ज्यादा प्रभावित नहीं होते और इनकी कमाई अपेक्षाकृत स्थिर रहती है. साथ ही इन सेक्टर्स के कई शेयर फिलहाल ऐतिहासिक तौर पर कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं, जिससे लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए मौके बन सकते हैं.
मौजूदा माहौल में बाजार एक ट्रांजिशन फेज में दिखाई दे रहा है. एक तरफ विदेशी बिकवाली का दबाव कम होता दिख रहा है, तो दूसरी तरफ नई खरीदारी अभी धीमी है. ऐसे में एक्सपर्ट्स की राय है कि निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने से बचना चाहिए.
मजबूत बैलेंस शीट, स्थिर कमाई और कम वैल्यूएशन वाले सेक्टर्स पर फोकस करना बेहतर रणनीति हो सकती है. फाइनेंशियल, FMCG और ऐसे शेयर जहां विदेशी हिस्सेदारी कम है, आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 पीएम मोदी के बयान का ज्वेलरी शेयरों पर क्या असर होगा?
पीएम की अपील से बाजार को डर है कि सोने की डिमांड कम हो सकती है, जिससे ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री और मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा. यही वजह है कि शेयरों में गिरावट आई है.
Q2 क्या अब विदेशी निवेशक (FII) भारत में बिकवाली बंद कर देंगे?
Goldman Sachs के अनुसार, विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बहुत कम बची है. अब बड़ी बिकवाली का जोखिम सिर्फ 4-5 अरब डॉलर तक ही सीमित रह गया है, जो कि अंत के करीब होने का संकेत है.
Q3 विदेशी निवेशक वापस कब लौटेंगे?
विदेशी निवेशकों की वापसी मुख्य रूप से भारतीय कंपनियों की अर्निंग्स रिकवरी (मुनाफे में सुधार) पर निर्भर करेगी. सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट उनके आने के लिए काफी नहीं है.
Q4 इस समय कौन से सेक्टर्स सुरक्षित दिख रहे हैं?
फाइनेंशियल और FMCG सेक्टर्स को अधिक सुरक्षित माना जा रहा है क्योंकि इन पर ग्लोबल उतार-चढ़ाव का असर कम होता है और इनकी कमाई स्थिर रहती है.
Q5 क्या अभी ज्वेलरी शेयर खरीदने का सही समय है?
ज्वेलरी शेयरों में फिलहाल सेंटीमेंट खराब है. निवेशकों को चाहिए कि वे जल्दबाजी न करें और बाजार की स्थिरता का इंतजार करें. लंबी अवधि के नजरिए वाले निवेशक मजबूत कंपनियों पर नजर रख सकते हैं.