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MCX पर सोने-चांदी में मुनाफावसूली.
Gold-Silver Price: सोना-चांदी के बाजार में इस समय जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है. रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब कीमतों में हल्का करेक्शन आया है, लेकिन निवेशकों का भरोसा कमजोर नहीं पड़ा है. इसकी सबसे बड़ी वजह गोल्ड और सिल्वर ETF में रिकॉर्ड निवेश है. एक तरफ दाम फिसल रहे हैं, दूसरी तरफ निवेशक तेजी से सेफ-हेवन एसेट्स की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं.
MCX पर गोल्ड इस समय करीब 1,57,370 रुपये पर ट्रेड कर रहा है, जिसमें लगभग 696 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है. दिन का हाई 1,58,070 रुपये रहा, जबकि इसका ऑल-टाइम हाई 1,93,096 रुपये है. पिछले बंद भाव करीब 1,58,066 रुपये रहा.
वहीं चांदी में ज्यादा दबाव देखने को मिला. सिल्वर करीब 2,57,405 रुपये पर है, जिसमें करीब 5,215 रुपये यानी लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट है. दिन का हाई 2,57,405 रुपये रहा और इसका ऑल-टाइम हाई 4,20,048 रुपये है. पिछला क्लोज करीब 2,62,620 रुपये था. रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसलने के बाद अब बाजार में मुनाफावसूली दिख रही है, लेकिन ट्रेंड पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है.
जनवरी 2026 में गोल्ड ETF में ऐतिहासिक निवेश देखने को मिला है. इस महीने गोल्ड ETF में 24,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का पैसा आया, जो दिसंबर के 11,647 करोड़ रुपये के मुकाबले 100 प्रतिशत से भी ज्यादा की बढ़त है.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि जितना निवेश पूरे इक्विटी मार्केट में आया, लगभग उतना ही पैसा अकेले गोल्ड ETF में चला गया. यानी निवेशक शेयर बाजार के साथ-साथ सोने को भी बराबरी का महत्व दे रहे हैं.
सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी में भी दिलचस्पी बढ़ी है. जनवरी के दौरान सिल्वर ETF में करीब 9,463 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया. यह दिखाता है कि निवेशक अब मेटल्स को पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बना रहे हैं.
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Optima Money के पंकज मठपाल के मुताबिक सोने की तरफ बढ़ते झुकाव के पीछे कई मजबूत वजहें हैं.
भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्प ढूंढने पर मजबूर किया है. साथ ही शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. इसके अलावा पिछले एक साल में सोने ने करीब 80 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है, जिसने निवेशकों का भरोसा और बढ़ाया है.
उनका कहना है कि फिजिकल गोल्ड के मुकाबले ETF ज्यादा बेहतर विकल्प है क्योंकि इसमें पारदर्शिता होती है, लिक्विडिटी ज्यादा रहती है और खरीद-फरोख्त आसान होती है.
हालांकि वे यह भी कहते हैं कि FOMO में आकर एकमुश्त पैसा न लगाएं. सोने में अभी प्रीमियम चल रहा है, इसलिए गिरावट पर SIP के जरिए निवेश करना ज्यादा समझदारी होगी.
LKP Securities के जतिन त्रिवेदी मानते हैं कि सोने में 1,55,000 रुपये का मजबूत सपोर्ट बन रहा है. अगर यह स्तर बना रहता है तो ऊपर की तरफ 1,60,000 से 1,62,000 रुपये तक के भाव देखने को मिल सकते हैं. बेस मेटल्स में भी हलचल है. जिंक में बेस बनता दिख रहा है और 319 रुपये के स्टॉपलॉस के साथ 330 रुपये का लक्ष्य रखा जा सकता है.
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Prithvi Finmart के मनोज कुमार जैन के मुताबिक मार्च गोल्ड मिनी कॉन्ट्रैक्ट 1,54,000 रुपये के आसपास खरीद सकते हैं. इसमें 1,52,000 का स्टॉपलॉस और 1,58,000 रुपये का लक्ष्य रखा जा सकता है. चांदी में 2,55,000 रुपये मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है. सिल्वर मिनी को 2,62,000 के पास खरीदकर 2,72,000 रुपये का लक्ष्य रखा जा सकता है. उन्होंने क्रूड ऑयल में भी 5,750 रुपये के आसपास खरीदारी और 5,920 रुपये का लक्ष्य बताया है.
घरेलू बाजार में चांदी में 5,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली और भाव 2,57,000 रुपये के पास आ गया. सोना MCX पर करीब 1,57,000 रुपये के आसपास बना हुआ है. इक्विटी मार्केट में निफ्टी करीब 25,950 के पास और सेंसेक्स करीब 300 अंकों की मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा. यानी इक्विटी और कमोडिटी दोनों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है.
सोना-चांदी में लंबी अवधि का आउटलुक अब भी पॉजिटिव माना जा रहा है क्योंकि ETF में रिकॉर्ड निवेश आ रहा है और ग्लोबल अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई है. लेकिन मौजूदा ऊंचे स्तरों पर सीधे भारी रकम लगाना जोखिम भरा हो सकता है. एक्सपर्ट्स की राय है कि गिरावट पर चरणबद्ध निवेश या SIP रणनीति ज्यादा सुरक्षित रहती है. शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन सही लेवल पर एंट्री लेने वाले निवेशकों के लिए सोना और चांदी आगे भी पोर्टफोलियो को मजबूत बना सकते हैं.
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