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निवेश की दुनिया में अक्सर हम शेयर बाजार या रियल एस्टेट की बातें करते हैं, लेकिन साल 2025 की कहानी कुछ अलग ही रही. इस बार बाजी मारी है 'हार्ड एसेट्स' यानी कमोडिटीज ने. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की ताजा रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि पिछले साल निवेश के हर दूसरे विकल्प को पछाड़ते हुए कमोडिटी मार्केट सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है.
चाहे आप सोने (Gold) की चमक (Silver) की बात करें या चांदी की रफ्तार की, इन कीमती धातुओं ने निवेशकों की झोली भर दी है. दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल और शेयर बाजार की अनिश्चितता के बीच लोगों का भरोसा एक बार फिर इन पुरानी और भरोसेमंद संपत्तियों पर लौटा है. आइए समझते हैं कि 2025 में क्या खास रहा और 2026 के लिए हमारे खजाने में क्या छिपा है.
अगर आप सोचते हैं कि सोना ही सबसे तेज भागता है, तो आपको चांदी के आंकड़े देखने चाहिए. साल 2025 में घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में 170 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया. यह किसी भी बड़े शेयर या इंडेक्स के मुकाबले बहुत ज्यादा है.
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चांदी की कीमतों में इस आग की सबसे बड़ी वजह इसकी भारी डिमांड है. सोलर पैनल बनाने, बिजली के उपकरणों और इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) में चांदी का खूब इस्तेमाल हो रहा है. लगातार पांचवें साल चांदी की सप्लाई इसकी मांग के मुकाबले कम रही है. इसी 'शॉर्टेज' ने इसकी कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया.
सोना हमेशा से बुरे वक्त का साथी माना जाता है, और 2025 में इसने इसे सच कर दिखाया. घरेलू स्तर पर सोने की कीमतों में 76 फीसदी से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई. इसने निफ्टी और अमेरिका के एसएंडपी 500 जैसे बड़े इंडेक्स को भी पीछे छोड़ दिया.
दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने पिछले साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा. जब बड़े-बड़े देश अपना पैसा डॉलर से निकालकर सोने में लगाने लगते हैं, तो इसकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है. साथ ही, रुपये की कमजोरी ने भी भारत में सोने के भाव को सपोर्ट किया.
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कमोडिटी मार्केट में हर तरफ हरियाली नहीं थी. बेस मेटल्स और ऊर्जा के क्षेत्र में मिला-जुला असर रहा. जहां बिजली के बढ़ते काम और इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से कॉपर (तांबा) का प्रदर्शन अच्छा रहा. एल्युमिनियम में भी मजबूती दिखी.
वहीं, तेल के बाजार के लिए 2025 कुछ खास नहीं रहा. सप्लाई ज्यादा होने और ग्लोबल लेवल पर मांग कम रहने की वजह से तेल की कीमतें दबाव में रहीं. ओपेक देशों की तरफ से ज्यादा तेल बाजार में उतारने से भाव स्थिर नहीं रह पाए. जबकि, मौसम के बदलते मिजाज की वजह से गैस की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला.
एक दिलचस्प बात यह रही कि अब लोग सिर्फ फिजिकल सोना या चांदी ही नहीं खरीद रहे, बल्कि डिजिटल तरीके से भी निवेश कर रहे हैं. भारत में गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में निवेश करने वालों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है. रिपोर्ट बताती है कि इन ईटीएफ के तहत मैनेज होने वाली संपत्ति में 150 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है. यह दिखाता है कि अब आम आदमी भी कमोडिटी मार्केट को एक स्मार्ट निवेश के रूप में देख रहा है.
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अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 2026 में भी यह तेजी जारी रहेगी? मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट कहती है कि 2026 बदलाव का साल होगा. रिपोर्ट की मानें तो साल की शुरुआत में सोना और चांदी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखेंगे. भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक नीतियां अभी भी अस्थिर हैं, जिसका सीधा फायदा कीमती धातुओं को मिलेगा.
वहीं बेस मेटल्स में खरीदारी के चुनिंदा मौके मिल सकते हैं. तेल के बाजार में अभी भी सप्लाई और डिमांड की खींचतान जारी रहने की उम्मीद है. सरल शब्दों में कहें तो, 2026 में कमोडिटी सिर्फ ट्रेडिंग की चीज नहीं, बल्कि आपके पोर्टफोलियो का एक जरूरी हिस्सा बन जाएगी.
आसान भाषा में समझाएं तो साल 2025 ने साबित कर दिया कि जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में अनिश्चितता होती है, तो कमोडिटीज सबसे सुरक्षित ठिकाना बनती हैं. चांदी और सोने ने जिस तरह का रिटर्न दिया है, उसने निवेशकों का नजरिया बदल दिया है. मोतीलाल ओसवाल की यह रिपोर्ट हमें आगाह करती है कि 2026 में भी उतार-चढ़ाव बना रहेगा, लेकिन अगर आप रणनीतिक तरीके से निवेश करते हैं, तो कमोडिटी मार्केट आपके भविष्य को सुरक्षित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है.
Q1: 2025 में चांदी ने कितना रिटर्न दिया है?
A: मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में घरेलू चांदी की कीमतों में 170 फीसदी से ज्यादा की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है.
Q2: सोने की कीमतों में तेजी के मुख्य कारण क्या रहे?
A: भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर की अस्थिरता और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा 1,000 टन से ज्यादा सोने की खरीदारी इसकी मुख्य वजह रही.
Q3: 2025 में कच्चे तेल का प्रदर्शन कैसा रहा?
A: ऊर्जा बाजार, खासकर कच्चे तेल का प्रदर्शन 2025 में कमजोर रहा क्योंकि बाजार में तेल की सप्लाई मांग के मुकाबले काफी ज्यादा थी.
Q4: बेस मेटल्स में किस धातु का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा?
A: इलेक्ट्रिफिकेशन और सप्लाई की कमी की वजह से कॉपर (तांबा) ने बेस मेटल्स के बीच सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है.
Q5: क्या 2026 में भी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?
A: रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भी सोना और चांदी अपने रणनीतिक महत्व के कारण निवेश के अच्छे विकल्प बने रहेंगे, क्योंकि वैश्विक स्तर पर अभी भी काफी आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है.