चांदी कारोबार में ‘मेड इन इंडिया’ को बढ़ावा! MCX ने आसान किए नियम, इम्पोर्टेड सिल्वर का दबदबा घटेगा

MCX Silver Delivery: यह कदम ऐसे समय आया है जब सिल्वर बार इम्पोर्ट पर सख्ती के कारण घरेलू बाजार में सप्लाई और डिलीवरी को लेकर चुनौतियां बढ़ रही थीं. MCX का मानना है कि इससे भारत में रिफाइंड बुलियन को बढ़ावा मिलेगा और सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' विजन को मजबूती मिलेगी.
चांदी कारोबार में ‘मेड इन इंडिया’ को बढ़ावा! MCX ने आसान किए नियम, इम्पोर्टेड सिल्वर का दबदबा घटेगा

MCX के नए नियम से घरेलू चांदी की शुद्धता और भरोसे को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Chatgpt)

MCX Silver Delivery: भारतीय कमोडिटी बाजार से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आ रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) ने घरेलू चांदी (Silver) रिफाइनर्स के लिए अपने 'गुड डिलीवरी'नियमों में बहुत बड़ी ढील दी है. इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब भारतीय रिफाइनर्स के लिए MCX प्लेटफॉर्म पर चांदी की डिलीवरी करना बेहद आसान हो जाएगा.

यह कदम ऐसे समय आया है जब सिल्वर बार इम्पोर्ट पर सख्ती के कारण घरेलू बाजार में सप्लाई और डिलीवरी को लेकर चुनौतियां बढ़ रही थीं. MCX का मानना है कि इससे भारत में रिफाइंड बुलियन को बढ़ावा मिलेगा और सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' विजन को मजबूती मिलेगी.

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पहले क्या होता था?

अब तक MCX पर सिल्वर डिलीवरी के लिए ज्यादातर वही सिल्वर बार मान्य होती थीं, जो London Bullion Market Association (LBMA) से अप्रूव्ड हों. यानी बाजार में इम्पोर्टेड सिल्वर का दबदबा ज्यादा था. लेकिन नए नियमों के बाद अब भारतीय रिफाइनर्स भी बिना BIS स्टैंडर्ड वाली सिल्वर बार के साथ MCX के गुड डिलीवरी फ्रेमवर्क में शामिल हो सकेंगे. इसके लिए उन्हें MCX की इम्पैनलमेंट प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

क्यों लिया गया यह फैसला?

  • हाल के महीनों में सिल्वर बार इम्पोर्ट पर सख्ती और प्रतिबंधों के चलते घरेलू बाजार में उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी थी. ऐसे में MCX नहीं चाहता था कि एक्सचेंज पर सिल्वर डिलीवरी में कोई रुकावट आए.
  • इसी वजह से एक्सचेंज ने नियमों में ढील देकर भारतीय रिफाइनर्स के लिए रास्ता आसान किया है. इससे घरेलू सिल्वर सप्लाई चेन मजबूत होने की उम्मीद है.
mcx silver

बाजार पर क्या होगा असर?

  • भारतीय रिफाइनर्स की भागीदारी बढ़ेगी
  • MCX पर सिल्वर की उपलब्धता बेहतर होगी
  • इम्पोर्टेड सिल्वर पर निर्भरता घट सकती है
  • घरेलू बुलियन इंडस्ट्री को बड़ा समर्थन मिलेगा
  • ट्रेडर्स और इंडस्ट्री प्लेयर्स को डिलीवरी में आसानी होगी

आम भाषा में समझें

पहले MCX पर सिल्वर डिलीवरी के लिए विदेशी मानकों वाली इम्पोर्टेड सिल्वर ज्यादा इस्तेमाल होती थी. अब भारतीय कंपनियां भी अपनी रिफाइंड सिल्वर MCX प्लेटफॉर्म पर डिलीवर कर सकेंगी. यानी देश में तैयार सिल्वर को अब कमोडिटी एक्सचेंज सिस्टम में ज्यादा जगह मिलने जा रही हैय

क्या है गुड डिलीवरी नियम?

गुड डिलीवरी नियम यह तय करते हैं कि एक्सचेंज पर डिलीवर होने वाला सिल्वर या गोल्ड तय गुणवत्ता, शुद्धता और भरोसेमंद मानकों पर खरा उतरे. इससे खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए पारदर्शिता बनी रहती है.

निष्कर्ष

MCX का यह फैसला घरेलू रिफाइनिंग उद्योग के लिए एक बड़ा 'बूस्टर' साबित होगा. इससे न केवल भारतीय चांदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान मिलेगी, बल्कि एक्सचेंज पर चांदी की लिक्विडिटी और डिलीवरी प्रक्रिया भी मजबूत होगी.

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