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सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा हड़कंप. (सांकेतिक तस्वीर)
आज की रात कमोडिटी मार्केट में निवेश करने वालों के लिए काफी हलचल भरी रही. सोने और चांदी की कीमतों में एक ऐसी गिरावट देखने को मिली, जिसकी उम्मीद बाजार के जानकारों को भी नहीं थी.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रहे सोने और चांदी के दाम नीचे की ओर खिसक गए. सोने की कीमतों में प्रति 10 ग्राम करीब 3800 रुपये की कमी दर्ज की गई, वहीं चांदी के भाव में भी प्रति किलो के हिसाब से करीब 9000 रुपये की बड़ी कटौती देखी गई.
यह गिरावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही. ग्लोबल मार्केट में भी सोने और चांदी की चमक फीकी पड़ गई है. विदेशी बाजारों में सोना करीब 150 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़क गया. चांदी की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसमें करीब 4% की बड़ी गिरावट आई है. अचानक आई इस सुनामी ने उन निवेशकों को चिंता में डाल दिया है जो सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर चल रहे थे.
आमतौर पर यह देखा गया है कि जब भी दुनिया में युद्ध जैसे हालात बनते हैं, सोने के दाम बढ़ते हैं. इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए उम्मीद थी कि सोना और ऊपर जाएगा. लेकिन इस बार कहानी उल्टी पड़ गई. मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट में इस पर बड़ा खुलासा किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव तो है, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई का डर बढ़ा दिया है. जब महंगाई बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने से बचते हैं. ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए दुश्मन की तरह होती हैं क्योंकि सोने पर कोई निश्चित ब्याज नहीं मिलता. यही वजह है कि तनाव के बावजूद कड़ी मौद्रिक नीति की आशंका ने सोने की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है.
बाजार में इस समय सबसे बड़ा डर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी को लेकर है. जानकारों का मानना है कि फेडरल रिजर्व इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. लेकिन निवेशक इस बात को लेकर ज्यादा फिक्रमंद हैं कि बैंक भविष्य के लिए क्या संकेत देता है. अगर फेड ने यह कह दिया कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी, तो सोने पर दबाव और बढ़ सकता है. हालांकि, अगर जरा सा भी संकेत मिला कि आने वाले महीनों में नरमी आ सकती है, तो कीमतों को थोड़ा सहारा मिल सकता है.
अगर आप सोने-चांदी में ट्रेड करते हैं, तो कुछ खास लेवल पर नजर रखना बहुत जरूरी है.
सोने के लिए: गिरावट के समय 1,54,800 रुपये और 1,53,500 रुपये के लेवल सपोर्ट का काम कर सकते हैं. अगर कीमतें यहाँ से संभलती हैं, तो ऊपर की तरफ 1,57,200 रुपये से लेकर 1,58,600 रुपये तक रेजिस्टेंस (रुकावट) देखने को मिल सकती है.
चांदी के लिए: चांदी में 2,50,000 रुपये और 2,46,600 रुपये के आसपास सपोर्ट दिख रहा है. वहीं अगर बाजार संभलकर ऊपर बढ़ता है, तो 2,57,700 रुपये से लेकर 2,61,600 रुपये के बीच कीमतों को बड़ी चुनौती मिल सकती है.
Q1: सोने और चांदी की कीमतों में कितनी गिरावट आई है?
A1: MCX पर सोने में प्रति 10 ग्राम करीब 3800 रुपये और चांदी में प्रति किलो करीब 9000 रुपये की बड़ी गिरावट आई है.
Q2: क्या विदेशी बाजारों में भी सोने के दाम गिरे हैं?
A2: हां, विदेशी बाजार में सोना करीब 150 डॉलर तक लुढ़क गया है और चांदी में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई है.
Q3: तनाव के बावजूद सोने की कीमतें क्यों नहीं बढ़ रही हैं?
A3: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का डर बढ़ा है, जिससे ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका है. इसी वजह से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है.
Q4: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का सोने पर क्या असर होगा?
A4: अगर फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने का संकेत देता है, तो सोने की कीमतों में और गिरावट आ सकती है.
Q5: सोने और चांदी के लिए तत्काल सपोर्ट लेवल क्या हैं?
A5: सोने के लिए मुख्य सपोर्ट 1,54,800 और 1,53,500 रुपये है, जबकि चांदी के लिए 2,50,000 और 2,46,600 रुपये का लेवल अहम है.