पीएम मोदी की अपील से चर्चा मे गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम, खाली पड़े सोने से होती कमाई, फिर भी क्यो हो रही फ्लॉप!

पीएम नरेंद्र मोदी ने गैरजरूरी सोना न खरीदने की आम जनता से अपील की है. इसके बाद एक बार फिर गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम चर्चा में है. जानिए क्या है ये स्कीम और क्या हैं इसके फायदे.
पीएम मोदी की अपील से चर्चा मे गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम, खाली पड़े सोने से होती कमाई, फिर भी क्यो हो रही फ्लॉप!

पीएम मोदी के बयान के बाद फिर चर्चा में गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम. (प्रतीकात्म इमेज/AI/Chat GPT)

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने आम जनता से एक साल तक गैर जरूरी सोना न खरीदने की अपील की है. सोने का आयात बढ़ने से फॉरेन एक्सचेंज बिल बढ़ता है, जिससे रुपया कमजोर होता है. पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद भारत सरकार की गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है. देश में अनुमानित 20,000 टन से ज्यादा सोना फिलहाल बिना किसी इस्तेमाल के रखा है. ऐसे में सरकार बाहर से सोना खरीदने के बजाय, देश के घरों में रखे सोने को अर्थ्यवस्था में लाने के लिए इस योजना को नए सिरे से पेश करने की तैयारी कर रही है.

कैसे काम करती है गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. यह योजना लोगों को अपना सोना जैसे सिक्के, बार और गहने बैंकों में जमा करने की अनुमति देती है.

2% से 2.5% तक का ब्याज

  • इस योजना के तहत जमा किए गए सोने पर ग्राहक को लगभग 2 से 2.5 फीसदी तक का ब्याज मिलता है.
  • सोना आपके लिए किसी फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह काम करता है.
  • मैच्योरिटी पूरी होने पर डिपॉजिटर्स को सोने की मौजूदा कीमत नकद में या फिर सोने के तौर पर वापस मिल जाती है.
  • स्कीम स्वैच्छिक है और यह उन लोगों के लिए है जो अपने घर में खाली सोने से कमाई करना चाहते हैं.

2025 तक केवल 38 टन सोना जुटाया

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम विफल रही, जिसकी गवाही आंकड़े दे रहे हैं. मार्च 2025 तक इस योजना के तहत केवल 38 टन सोना ही जुटाया जा सका था.

आभूषण से इमोशनल जुड़ाव

  • स्कीम विफल होने का सबसे बड़ा कारण लोगों का आभूषण से इमोशनल जुड़ाव था, क्योंकि योजना के तहत गहनों को बैंक से पिछला दिया जाता है.
  • शुद्धता जांचने की मुश्किल प्रक्रिया, मामूली रिटर्न और इनकम टैक्स जांच के डर ने भी लोगों को इससे दूर रखा है,खासकर उस पुश्तैनी सोने को लेकर जिसका घर में कोई पक्का बिल या रिकॉर्ड मौजूद नहीं है.
  • पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के मुताबिक पिछली गोल्ड स्कीम सरकार के लिए महंगी थीं और उन्हें बेहतर डिजाइन की जरूरत है.
  • बुलियन एक्सपर्ट सुरेंद्र मेहता के मुताबिक, "पिछली योजना इस कारण संघर्ष कर रह थी क्योंकि लोग अपने ज्वैलरी को पिघलाने के लिए तैयार नहीं थे. योजना को मार्केट लिंक करने की जरूरत है."
  • यूको बैंक के सीईओ और पूर्व एमडी आर.के.टक्कर के मुताबिक बैंकों को जनता का मजबूत विश्वास हासिल है, लेकिन प्युरिटी टेस्टिंग जैसी ऑपरेशनल बाधाओं को फिलहाल दूर करने की जरूरत है.

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2025 में खरीदा 280 टन सौदा

साल 2025 में निवेश के लिए लगभग 280 टन सोना खरीदा गया था, जो मुख्य रूप से सिक्के और बार के रूप में था. आभूषणों से उलट, इन्हें जमा करना आसान है क्योंकि इनमें इमोशनल वैल्यू जुड़ी नहीं होती.

आरबीआई और वित्त मंत्रालय को सौंपा इंटीग्रेटेड फ्रेमवर्क

  • गौरतलब है कि ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलिरी डोमिस्टिक काउंसिल ने RBI और वित्त मंत्रालय को एक या ज्वैलर इंटीग्रेटेड फ्रेमवर्क सौंपा है.
  • इस प्रस्ताव में सोने को डिमैटरियलाइज्ड बैलेंस के तौर पर वित्तीय प्रणाली में लाने और एंड टू एंड डिजिटल सिस्टम बनाने की बात कही है.
  • जब तक लोगों की इन चिताओं और शंकाओं को दूर नहीं किया जाता, तब तक इस योजना में आम जनता का जुड़ना लिमिटेड ही रह सकता है.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 युद्ध या फिर किसी भी संकट के वक्त सोने में निवेश क्यों बढ़ जाता है?

सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है. इस कारण युद्ध या फिर आर्थिक संकट में मुद्राएं अस्थिर होने पर लोग सोने में निवेश करते हैं.

Q2 गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में कितने तरह के डिपॉजिट होते हैं?

इसमें तीन तरह के डिपॉजिट होते हैं. पहला शॉर्ट टर्म 1 से 3 साल के लिए. दूसरा मीडियम टर्म 5 से 7 साल, तीसरा लॉन्ग टर्म 12 से 15 साल के लिए.

Q3 योजना में अगर सोना जमा करने पर मेरे ही गहने वापस मिलेंगे?

नहीं, इस योजना में जमा सोने को पिघला दिया जाता है. मैच्योरिटी पर आपको सोने के मूल्य के बराबर नकदी या सोना वापस मिलता है.

Q4 स्कीम के तहत आभूषण के अलावा क्या जमा कर सकते हैं?

स्कीम के तहत योजना के तहत गहने के अलावा सोने के सिक्के और बार भी जमा किए जा सकते हैं.

Q5 20,000 टन सोना अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है?

भारत सोना आयात करता है और इसके लिए डॉलर में भुगतान करताहै. घरों में खाली पड़ासोना सिस्टम में आएगा तो डॉलर देश से बाहर नहीं आएगा. आयात बिल घटेगा और रुपया मजबूत होगा.

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