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Gold Monetisation और Tax Relief पर सरकार का बड़ा संकेत. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं बल्कि बचत, सुरक्षा, परंपरा और भावनाओं का हिस्सा है. शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों तक, भारतीय परिवारों में सोने की अलग ही अहमियत है. लेकिन अब यही सोना देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी बहस के केंद्र में आ गया है.
Zee Business की खास मुहिम के बाद Gold Monetisation और Capital Gain Tax पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है. इस बहस को और मजबूती तब मिली जब वित्त मंत्री ने खुद कहा कि शेयर बाजार में लगने वाले टैक्स और गोल्ड मॉनेटाइजेशन जैसे मुद्दों पर मिल रहे सुझावों पर सरकार जरूर विचार करेगी.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत लगातार रिकॉर्ड स्तर पर सोना आयात कर रहा है और इससे देश के ट्रेड डेफिसिट और विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ने की चिंता जताई जा रही है. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार सोने पर लगने वाले टैक्स नियमों में बदलाव कर सकती है? और अगर ऐसा हुआ तो इसका असर कितना बड़ा होगा?
Zee Business की मुहिम का मूल मुद्दा यह है कि भारत में पहले से बड़ी मात्रा में सोना मौजूद होने के बावजूद देश हर साल भारी मात्रा में गोल्ड इम्पोर्ट क्यों कर रहा है. भारत के घरों, लॉकरों और निजी तिजोरियों में बड़ी मात्रा में निष्क्रिय सोना रखा हुआ है. लेकिन लोग उसे बाजार में लाने से बचते हैं. इसकी एक वजह भावनात्मक जुड़ाव है, जबकि दूसरी वजह टैक्स नियम और औपचारिक प्रक्रियाओं का डर भी माना जाता है.
इसी को देखते हुए Zee Business ने मांग उठाई कि रेजिडेंट भारतीयों के लिए सोना बेचने पर कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत दी जानी चाहिए. खासतौर पर पुराने गहनों और घरेलू सोने के मामले में टैक्स नियम आसान बनाए जाने की बात कही गई. इस मुहिम को कई वित्तीय विशेषज्ञों और उद्योग जगत की हस्तियों का समर्थन भी मिला.
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Infosys के पूर्व CFO और पद्म श्री सम्मानित मोहनदास पई ने Zee Business की मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को रेजिडेंट भारतीयों के लिए सोना बेचने पर एक साल तक कैपिटल गेन्स टैक्स पूरी तरह माफ करने पर विचार करना चाहिए.
उनका मानना है कि अगर टैक्स का डर कम होगा तो लोग बड़ी मात्रा में पुराना सोना बाजार में ला सकते हैं. इससे देश को नए गोल्ड इम्पोर्ट की जरूरत कम पड़ सकती है. यह सुझाव इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शामिल है और हर साल अरबों डॉलर का सोना विदेशों से खरीदता है.
Anand Rathi Wealth के ज्वाइंट CEO फिरोज अजीज ने हाल ही में ज़ी बिज़नेस के एक शो में इस मुद्दे पर बेहद अहम आंकड़े साझा किए थे. उनके मुताबिक भारत ने पिछले साल करीब 75 बिलियन डॉलर यानी 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का सोना विदेशों से खरीदा. यह आंकड़ा सिर्फ एक व्यापारिक डेटा नहीं बल्कि आर्थिक चिंता का विषय भी है.
जब भारत बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है तो उसके बदले विदेशी मुद्रा यानी डॉलर बाहर जाता है. इससे Current Account Deficit और Trade Deficit पर असर पड़ता है. लगातार बड़े आयात से देश की विदेशी मुद्रा स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है.
फिरोज अजीज ने कहा कि अगर भारतीय परिवार अपने पास मौजूद सोने का सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्सा भी बाजार में लेकर आ जाएं तो गोल्ड इम्पोर्ट की जरूरत काफी कम हो सकती है. यानी सरकार अगर घरेलू सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने में सफल होती है तो यह सिर्फ टैक्स सुधार नहीं बल्कि बड़ा आर्थिक बदलाव भी साबित हो सकता है.
Gold Monetisation Scheme यानी GMS को सरकार ने 2015 में लॉन्च किया था. इसका उद्देश्य घरों और संस्थानों में पड़े निष्क्रिय सोने को आर्थिक गतिविधियों में शामिल करना था. इस योजना के तहत लोग अपना सोना बैंक या अधिकृत संस्थान में जमा कर सकते हैं. इसके बदले उन्हें ब्याज मिलता है.
सबसे अहम बात यह है कि इसमें सोना सिर्फ ज्वेलरी के रूप में ही नहीं बल्कि बार, कॉइन या अन्य रूपों में भी जमा किया जा सकता है. सरकार की सोच यह थी कि घरों में पड़ा निष्क्रिय सोना अगर बैंकिंग सिस्टम में आएगा तो उसका इस्तेमाल आर्थिक गतिविधियों में किया जा सकेगा. इससे देश को नए गोल्ड इम्पोर्ट पर कम निर्भर रहना पड़ेगा.
इस स्कीम के तहत ग्राहक अपना सोना जमा करते हैं. जमा सोने की जांच और शुद्धता की पुष्टि की जाती है. इसके बाद निवेशक के नाम पर गोल्ड डिपॉजिट अकाउंट खोला जाता है. योजना में अलग-अलग अवधि के विकल्प मौजूद हैं-
जमा किए गए सोने पर निवेशक को ब्याज मिलता है. मैच्योरिटी के समय निवेशक को कैश या गोल्ड के रूप में भुगतान लिया जा सकता है. हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राहक को वही ज्वेलरी डिजाइन वापस नहीं मिलता जो उसने जमा किया था. यही वजह है कि कई परिवार इस योजना से दूरी बनाए रखते हैं.
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अगर सरकार इस स्कीम को ज्यादा आकर्षक बनाती है तो इसके कई बड़े आर्थिक फायदे हो सकते हैं.
1. गोल्ड इम्पोर्ट में कमी
भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इम्पोर्टर्स में शामिल है. अगर घरेलू सोना बाजार में आने लगे तो विदेशों से कम सोना खरीदना पड़ेगा.
2. विदेशी मुद्रा की बचत
कम आयात का मतलब है कि डॉलर की मांग कम होगी. इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घट सकता है.
3. घरेलू गोल्ड सप्लाई बढ़ेगी
ज्वेलरी इंडस्ट्री को घरेलू स्तर पर सोना उपलब्ध हो सकता है. इससे इंडस्ट्री को भी फायदा मिल सकता है.
4. निष्क्रिय संपत्ति से कमाई
घरों और लॉकरों में पड़ा सोना आमतौर पर निष्क्रिय रहता है. लेकिन GMS के जरिए वही सोना ब्याज कमाने वाली एसेट बन सकता है.
5. लॉकर और सुरक्षा की चिंता कम
लोगों को घर या लॉकर में बड़ी मात्रा में सोना रखने की जरूरत कम पड़ सकती है.
अभी सोने पर टैक्स कैसे लगता है?
भारत में सोने पर टैक्स उसके प्रकार और होल्डिंग पीरियड के आधार पर लगाया जाता है.
ज्वेलरी, गोल्ड बार, कॉइन और डिजिटल गोल्ड अगर 24 महीने से कम समय में बेचे जाते हैं तो Short Term Capital Gain माना जाता है. इस पर व्यक्ति की आयकर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है. अगर इन्हें 24 महीने से ज्यादा समय तक रखा गया हो तो Long Term Capital Gain माना जाता है और 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है.
Gold ETF को 12 महीने से कम समय में बेचने पर STCG टैक्स लगता है. 12 महीने से ज्यादा होल्डिंग पर 12.5 प्रतिशत LTCG टैक्स लागू होता है.
Gold Mutual Funds पर भी 24 महीने के नियम के आधार पर STCG और LTCG टैक्स लागू होता है.
SGB अगर मैच्योरिटी तक होल्ड किया जाए तो कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलती है. हालांकि समय से पहले बेचने पर टैक्स लागू हो सकता है.
भारत में बड़ी संख्या में लोग पुराने गहने बदलकर नए डिजाइन बनवाते हैं. आमतौर पर लोगों को लगता है कि चूंकि उन्हें कैश नहीं मिला इसलिए टैक्स भी नहीं लगेगा. लेकिन इनकम टैक्स नियमों में एक्सचेंज को भी ट्रांसफर माना जाता है.
मान लीजिए किसी ने कई साल पहले कम कीमत पर सोना खरीदा था. अब उसकी कीमत काफी बढ़ चुकी है. अगर वह पुरानी ज्वेलरी देकर नई बनवाता है तो उस बढ़ी हुई वैल्यू को कैपिटल गेन माना जा सकता है. यानी पैसा हाथ में आए बिना भी टैक्स लागू हो सकता है. यही वजह है कि कई लोग पुराना सोना बाजार में लाने से बचते हैं.
अगर सरकार रेजिडेंट भारतीयों के लिए सोना बेचने पर कुछ राहत देती है तो इसके कई असर देखने को मिल सकते हैं. सबसे पहला असर यह होगा कि लोग अपने पुराने सोने को औपचारिक बाजार में लाने के लिए ज्यादा तैयार हो सकते हैं.
दूसरा असर ज्वेलरी सेक्टर पर पड़ सकता है. घरेलू सोना उपलब्ध होने से आयात पर निर्भरता घट सकती है. तीसरा असर अर्थव्यवस्था पर हो सकता है. कम इम्पोर्ट का मतलब कम डॉलर आउटफ्लो. हालांकि सरकार के लिए यह फैसला आसान नहीं होगा क्योंकि टैक्स में राहत का मतलब सरकारी राजस्व पर असर भी हो सकता है.
आज निवेश का तरीका तेजी से बदल रहा है. लोग अब सिर्फ फिजिकल गोल्ड ही नहीं बल्कि Digital Gold, Gold ETFs और Gold Mutual Funds में भी पैसा लगा रहे हैं.
Digital Gold पर टैक्स नियम फिजिकल गोल्ड जैसे ही हैं. 24 महीने से ज्यादा रखने पर LTCG और उससे कम पर STCG लागू होता है. अगर भविष्य में सरकार गोल्ड टैक्सेशन में बदलाव करती है तो उसका असर इन सभी निवेश विकल्पों पर भी पड़ सकता है.
हालांकि योजना का उद्देश्य बड़ा था लेकिन यह स्कीम उम्मीद के मुताबिक लोकप्रिय नहीं बन पाई. इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं-
यही वजह है कि अब विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ स्कीम लाने से काम नहीं चलेगा बल्कि लोगों का भरोसा जीतना भी जरूरी होगा.
फिलहाल सरकार की तरफ से किसी टैक्स छूट या नए नियम का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. लेकिन वित्त मंत्री का बयान इस बहस को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है.
अगर आने वाले समय में सरकार गोल्ड मॉनेटाइजेशन को ज्यादा आकर्षक बनाती है या कैपिटल गेन टैक्स में कुछ राहत देती है तो यह भारत के गोल्ड मार्केट और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. अब बाजार, निवेशकों और ज्वेलरी इंडस्ट्री की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 Gold Monetisation Scheme में कौन शामिल हो सकता है?
व्यक्ति, संयुक्त खाताधारक और कुछ संस्थान इस योजना में हिस्सा ले सकते हैं.
Q2 क्या Gold Monetisation Scheme सुरक्षित है?
योजना अधिकृत संस्थानों और बैंकिंग सिस्टम के जरिए संचालित होती है.
Q3 क्या पुराना सोना बदलने पर भी टैक्स लग सकता है?
कुछ मामलों में ज्वेलरी एक्सचेंज को भी ट्रांसफर माना जा सकता है, जिससे कैपिटल गेन टैक्स लागू हो सकता है.
Q4 क्या Digital Gold पर भी टैक्स लगता है?
हां, Digital Gold पर भी कैपिटल गेन टैक्स नियम लागू होते हैं.
Q5 Sovereign Gold Bond क्यों अलग माना जाता है?
SGB को मैच्योरिटी तक होल्ड करने पर टैक्स छूट का लाभ मिल सकता है.
Q6 क्या सरकार ने अभी टैक्स छूट का ऐलान किया है?
फिलहाल सरकार ने सिर्फ सुझावों पर विचार करने की बात कही है, कोई आधिकारिक टैक्स राहत घोषित नहीं हुई है.