सोना खरीदने वालों के लिए बदलने वाला है ये नियम, आसानी से पहचाना जाएगा नकली सोना

अगर आप भी इस धनतेरस अपने लिए ज्वेलरी खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ये खबर आपको खुश कर सकती है. ज्वेलरी से जुड़े एक नियम में सरकार बदलाव करने जा रही है. बदलाव होने पर ग्राहकों को जबरदस्त फायदा हो सकता है.
सोना खरीदने वालों के लिए बदलने वाला है ये नियम, आसानी से पहचाना जाएगा नकली सोना

सरकार के मुताबिक, तय प्रक्रिया के तहत अगले 2-3 महीने में ये नियम लागू हो जाएंगे. (फोटो: bis.gov.in/)

धनतेरस 2019 (Dhanteras) के मौके पर खरीदारी को शुभ माना जाता है. खासकर सोना-चांदी खरीदना काफी लाभदायक होता है. अगर आप भी इस धनतेरस अपने लिए ज्वेलरी खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ये खबर आपको खुश कर सकती है. क्योंकि, अब बाजार में आपको सिर्फ खरा सोना मिलेगा. दरअसल, ज्वेलरी से जुड़े एक नियम में सरकार बदलाव करने जा रही है. बदलाव होने पर ग्राहकों को जबरदस्त फायदा हो सकता है.

बता दें, वाणिज्य मंत्रालय ने सोने की ज्वेलरी के लिए बीआईएस हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यह प्रस्ताव 1 अक्टूबर को पास किया गया था. प्रस्ताव को फिलहाल विश्व व्यापार संगठन (WTO) को भेजा गया है. WTO की मंजूरी के बाद ही इसे लागू किया जाएगा.

2-3 महीने में लागू हो सकता है नया नियम
सरकार के मुताबिक, तय प्रक्रिया के तहत अगले 2-3 महीने में ये नियम लागू हो जाएंगे. नियमों के मुताबिक, पहले डब्ल्यूटीओ को इसकी सूचना देनी होती है. इस प्रक्रिया में लगभग दो महीने का समय लगता है. मौजूदा समय में सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग करना स्वैच्छिक है. हालांकि, नए नियम के लागू होने के बाद सभी ज्वेलर्स को ज्वेलरी बेचने से पहले हॉलमार्किंग लेना अनिवार्य होगा.

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क्यों जरूरी है सोने की हॉलमार्किंग
बता दें कि सोने की हॉलमार्किंग का मतलब उसकी शुद्धता का प्रमाण है. फिलहाल ज्वेलर्स के लिए यह नियम स्वैच्छिक है. लेकिन, WTO से मंजूरी मिलने के बाद इसे अनिवार्य कर दिया जाएगा. नए नियम के आने से ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों को इस बात प्रमाण मिलेगा कि उन्हें खरा सोना मिल रहा है.

नए नियम से क्या होगा
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) की तरफ से गोल्ड ज्वेलरी पर हॉलमार्क का निशान दिया जाता है. हॉलमार्क इस बात का प्रमाण होता है कि सोने की शुद्धता की जांच लाइसेंसधारक लैब में की गई है. BIS देश में एकमात्र एजेंसी है, जिसके पास सोने के गहनों की हॉलमार्किंग के लिए मंजूरी मिली हुई है. फिलहाल, देश में करीब 800 हॉलमार्किंग केंद्र हैं और सिर्फ 40 प्रतिशत ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग की जाती है. बीआईएस ने तीन ग्रेड- 14 कैरट, 18 कैरट और 22 कैरट के सोने के लिए हॉलमार्किंग के लिए मानक तय किए हैं.

ग्राहकों को होगा फायदा
देश के ज्यादातर हिस्सों में ग्राहकों को 22 कैरेट के बजाय 21 कैरेट सोना बेचा जाता है. हालांकि, ज्वेलरी का दाम 22 कैरेट या 24 कैरेट के मुताबिक वसूले जाते हैं. हॉलमार्क होने से यह झूठ पकड़ा जा सकेगा. सही हॉलमार्क नहीं होने पर पहले ज्वेलर को नोटिस जारी किया जाएगा. हॉलमार्किंग के लिए ज्‍वेलर्स को लाइसेंस भी लेना होगा.

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