Crude Oil Price: मंदी के डर के बीच फिर बढ़ी टेंशन, कच्चे तेल की कीमतों में लौटी तेजी, यहां भी China फैक्टर

Recession Tension: इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमत (Crude Price Rise) 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. कच्चे तेल में लौटी तेजी वजह चीन है. क्योंकि यहां कोविड पाबंदियों (Covid restrictions) में ढिलाई देखने को मिल रही है. इसके तहत आवाजाही पाबंदियों को कम किया गया है.
Crude Oil Price: मंदी के डर के बीच फिर बढ़ी टेंशन, कच्चे तेल की कीमतों में लौटी तेजी, यहां भी China फैक्टर

Oil Price: ग्लोबल मंदी (Global Recession) के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से एक बार फिर टेंशन बढ़ गई है. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें एक बार फिर 80 डॉलर के पार पहुंच गया है. इससे भारत जैसे देशों में फ्यूल कॉस्ट (Fuel Cost) बढ़ने की आशंका है. जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है. क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी से पेट्रोल-डीजल के भाव (Petrol Price Hike) चढ़ने लगते हैं. बता दें कि भारत में खपत होने वाले कुल फ्यूल में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी डीजल की है. दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए (Dollar vs Rupee) में कमजोरी से टेंशन और बढ़ रहा है. कमजोर रुपए के चलते क्रूड का बिल ज्यादा हो जाता है.

कच्चे तेल क्यों लौटी तेजी?

इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमत (Crude Price Rise) 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. कच्चे तेल में लौटी तेजी वजह चीन है. क्योंकि यहां कोविड पाबंदियों (Covid restrictions) में ढिलाई देखने को मिल रही है. इसके तहत आवाजाही पाबंदियों को कम किया गया है. चीन की योजना है कि 2023 में इकोनॉमी (Global Economy) को सपोर्ट किया जाए. इससे देश में कच्चे तेल की मांग बढ़ने की उम्मीद है. क्रूड की डिमांड (Crude Demand) बढ़ेगी तो कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है. बता दें कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड इंपोर्ट करने वाला देश है.

2022 में 147 डॉलर तक पहुंचा है क्रूड

क्रूड की कीमतों में आई हालिया तेजी चिंता का विषय है लेकिन याद रखें यह फिलहाल 2022 में अपने हाई से काफी नीचे कारोबार कर रहा है. इस साल के शुरुआत में क्रूड की कीमतें 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. इसकी वजह फरवरी में जारी रूस और यूक्रेन युद्ध (russian vs ukraine war) रहा. इस घटना से सप्लाई चेन पर बेहद बुरा असर पड़ा. नतीजनत, सप्लाई कम और डिमांड ज्यादा होने से कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिली.

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दुनियाभर में मंदी का खौफ

रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते पैदा हुए सप्लाई चेन (Supply Chain Problem) की दिक्कतों से ग्लोबल इकोनॉमी अब तक उबर नहीं पाई है. दुनियाभर में बेतहासा महंगाई (Inflation) बढ़ी. इसके चलते सेंट्रल बैंकों (Central Banks) ने लगातार ब्याज दरों में इजाफा किया है. इसमें US FED, RBI, ECB समेत दुनिया के सभी प्रमुख सेंट्रल बैंक शामिल हैं.

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