कच्चे तेल में 5.6% की भारी गिरावट, $79 प्रति बैरल के नीचे फिसला भाव, क्या अब डीजल-पेट्रोल फिर से हो जाएंगे सस्ते?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. वैश्विक मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड करीब 5.6% टूटकर 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे फिसल गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आयात करने वाले देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
कच्चे तेल में 5.6% की भारी गिरावट, $79 प्रति बैरल के नीचे फिसला भाव, क्या अब डीजल-पेट्रोल फिर से हो जाएंगे सस्ते?

वैश्विक तेल बेंचमार्क माना जाने वाला 'ब्रेंट क्रूड' (Brent Crude) बाजार के दबाव के चलते 5.6 फीसदी से भी ज्यादा नीचे आ गया है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आज एक बड़ी और अचानक गिरावट देखने को मिली है. वैश्विक तेल बेंचमार्क माना जाने वाला 'ब्रेंट क्रूड' (Brent Crude) बाजार के दबाव के चलते काफी ज्यादा नीचे आ गया है. इस बड़ी गिरावट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज कर दी है.

बाजार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 5.6% की भारी-भरकम गिरावट दर्ज की गई है. पिछले कुछ समय से ऊपरी स्तरों पर टिके रहने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई यह गिरावट हाल के दिनों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावटों में से एक मानी जा रही है. इस बड़ी बिकवाली से तेल उत्पादक देशों को तगड़ा झटका लगा है.

$79 प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसला

इस 5.6% की भारी गिरावट के चलते ब्रेंट क्रूड का भाव अब 79 डॉलर ($79) प्रति बैरल के स्तर से भी नीचे फिसल गया है. वैश्विक मांग में आई सुस्ती, ईरान के साथ बढ़ते शांति समझौतों की उम्मीदों और बड़े देशों में आर्थिक मंदी के डर की वजह से कच्चे तेल की कीमतों पर यह चौतरफा दबाव देखने को मिल रहा है.

क्या सस्ता होगा डीजल-पेट्रोल?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के 79 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसलने और इसमें आई करीब 5% की भारी गिरावट के बाद, अब भारत में भी डीजल-पेट्रोल के दाम कम होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं. कुछ वक्त पहले डीजल-पेट्रोल के दाम इसीलिए बढ़ाए गए थे, क्योंकि कच्चा तेल काफी महंगा हो गया था. हालांकि, कीमतें कम होंगी या नहीं और कब तक होंगी, यह पूरी तरह से सरकार और तेल कंपनियों के फैसलों पर निर्भर करता है. मार्केट एक्सपर्ट अजय सुरेश केडिया के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतें नरम रहती हैं, तो इसका फायदा भारत को भी मिल सकता है.

तेल कंपनियों का मुनाफा बढ़ा

भारतीय तेल विपणन कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL और HPCL) अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल की मौजूदा कीमतों के आधार पर अपने पेट्रोल-डीजल के दाम तय करती हैं. जब ब्रेंट क्रूड $79 के नीचे आता है, तो तेल कंपनियों के लिए कच्चे तेल को खरीदना काफी सस्ता हो जाता है. ऐसे में इस गिरावट से तेल कंपनियों का रिफाइनिंग और रिटेल मार्जिन (मुनाफा) काफी बढ़ने का अनुमान है.

Conclusion

ब्रेंट क्रूड का 79 डॉलर के नीचे फिसलना और इसमें 5% की गिरावट आना भारत जैसे भारी तेल आयातक देशों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है. भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड का सस्ता होना देश के आयात बिल को कम करेगा और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने या घटाने में मदद करेगा. अगर आने वाले दिनों में यह गिरावट जारी रहती है, तो इससे वैश्विक महंगाई को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 कच्चे तेल की कीमतें किन वजहों से बदलती हैं?

कच्चे तेल की कीमतों पर वैश्विक मांग, सप्लाई, भू-राजनीतिक तनाव और उत्पादन फैसलों का असर पड़ता है.

Q2 क्रूड ऑयल की कीमतों का आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?

क्रूड की कीमतें पेट्रोल-डीजल, परिवहन लागत और महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं.

Q3 WTI और Brent Crude में क्या अंतर होता है?

WTI और Brent दुनिया के दो प्रमुख क्रूड ऑयल बेंचमार्क हैं, जिनकी कीमतें अलग-अलग बाजारों के आधार पर तय होती हैं.

Q4 रुपये की मजबूती से भारत को क्या फायदा होता है?

मजबूत रुपया आयात लागत कम करने और महंगाई पर दबाव घटाने में मदद कर सकता है.

Q5 वैश्विक घटनाओं का शेयर बाजार पर असर क्यों पड़ता है?

अंतरराष्ट्रीय घटनाएं निवेशकों की धारणा, कमोडिटी कीमतों और पूंजी प्रवाह को प्रभावित करती हैं.

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