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Israel Iran War: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली लगातार जारी है. इस हफ्ते फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से करीब ₹35,475 करोड़ की भारी निकासी की है. पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और ग्लोबल अनिश्चितता के बीच इस हफ्ते एफपीआई ने शेयर बाजार में भारी बिकवाली की है.
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में कुल आउटफ्लो बढ़कर ₹88,180 करोड़ तक पहुंच गया है, जो 2026 का सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो है.
पॉजिटिव ओपनिंग के बाद निफ्टी में शुरुआत में अच्छी तेजी देखने को मिली और इंडेक्स ऊपर की ओर बढ़ा. हालांकि, 23,345 के आसपास मुनाफावसूली आने से बाजार में गिरावट आई और यह 23,100 तक नीचे आ गया. इसके बावजूद, अंत में निफ्टी 0.49% की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए.
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नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, हफ्ते की शुरुआत में ही सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली. सोमवार को ₹10,827 करोड़, मंगलवार को ₹9,406 करोड़ और बुधवार को ₹4,376 करोड़ की निकासी दर्ज की गई. गुरुवार को Gudi Padwa के कारण सेटलमेंट हॉलिडे थे, जबकि शुक्रवार को फिर ₹10,965 करोड़ की बिकवाली हुई.
कुल मिलाकर, लगातार बिकवाली यह दिखाती है कि ग्लोबल अनिश्चितता और बढ़ते जोखिमों के बीच विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है.
| सोमवार | ₹10,827 करोड़ |
| मंगलवार | ₹9,406 करोड़ |
| बुधवार | ₹4,376 करोड़ |
| गुरुवार | - |
| शुक्रवार | ₹10,965 करोड़ |
| इस हफ्ते की कुल निकासी | ₹35,475 करोड़ |
| मार्च महीने का कुल आउटफ्लो | ₹88,180 करोड़ |
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता, खासकर पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के सेंटिमेंट पर दबाव डाला है. जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के अनुसार,
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हफ्ते की शुरुआत में थोड़ी रिकवरी जरूर आई, लेकिन फिर से तनाव बढ़ने पर बाजार में गिरावट लौट आई. विदेशी पोर्टफोलियो निवेश ऐसे निवेश होते हैं, जिनमें विदेशी निवेशक शेयर, बॉन्ड या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं. इन्हें अक्सर हॉट मनी कहा जाता है, क्योंकि ये तेजी से बाजार में आते-जाते हैं और बाजार की दिशा पर बड़ा असर डालते हैं.
भारत में FPI निवेश को सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) द्वारा रेगुलेट किया जाता है.
बाजार पर दबाव बना रह सकता है. विदेशी निवेशकों की बिकवाली से गिरावट बढ़ सकती है. निवेशक अब मिडिल ईस्ट हालात और क्रूड ऑयल कीमतों पर नजर रखेंगे. कुल मिलाकर, जब तक वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है.
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