FPI की बिकवाली नहीं थम रही! मई में बाजार से निकाले ₹32,963 करोड़

साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब ₹2.25 लाख करोड़ निकाल चुके हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है.
FPI की बिकवाली नहीं थम रही! मई में बाजार से निकाले ₹32,963 करोड़

 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब ₹2.25 लाख करोड़ निकाल चुके हैं. (फोटो सोर्स: Pexels)

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मई 2026 में भी भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनाए रखी. लगातार तीसरे महीने विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बाजार में बिकवाली करते रहे और मई में उन्होंने ₹32,963 करोड़ की निकासी की. यह जानकारी NSDL के ताजा आंकड़ों से सामने आई है.

मार्च और अप्रैल में भी विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड बिकवाली की थी. मार्च में एफपीआई ने ₹1.18 लाख करोड़ और अप्रैल में ₹60,847 करोड़ के शेयर बेचे थे. इस तरह साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब ₹2.25 लाख करोड़ निकाल चुके हैं.

विदेशी निवेशक क्यों बेच रहे हैं शेयर?

न्यूज़ एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है.

ब्रेंट क्रूड कुछ समय पहले 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया था, जिससे भारत के आयात बिल, महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ी. हालांकि हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन निवेशकों का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है.

इसके अलावा वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी थीम में निवेश बढ़ रहा है. कई विदेशी फंड उन देशों में निवेश बढ़ा रहे हैं जिन्हें AI से सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है. फिलहाल भारत को उस प्रमुख समूह में नहीं माना जा रहा, जिससे भी विदेशी निवेश का प्रवाह प्रभावित हुआ है.

2026 में अब तक FPI का रुख

महीनाबिकवाली/खरीदारी
जनवरी₹35,962 करोड़ बिकवाली
फरवरी₹22,615 करोड़ की खरीदारी
मार्च₹1.18 लाख करोड़ बिकवाली
अप्रैल₹60,847 करोड़ बिकवाली
मई₹32,963 करोड़ बिकवाली

इन आंकड़ों से साफ है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार को लेकर फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं.

बाजार में क्या ट्रेंड दिख रहा है?

जियोजित इन्वेस्टमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, बाजार में इस समय 'Buy on Dips, Sell on Rallies' का ट्रेंड देखने को मिल रहा है. उनका कहना है कि बाजार में गिरावट पर खरीदारी हो रही है, जबकि तेजी आने पर निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं. इसमें संस्थागत निवेशकों की भूमिका अहम हो सकती है.

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स्मॉलकैप और मिडकैप में बना हुआ है जोश

हालांकि विदेशी बिकवाली के दबाव के बावजूद स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में मजबूत गतिविधि देखने को मिल रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अच्छे नतीजे और मजबूत ग्रोथ आउटलुक वाली कंपनियों को बाजार से पॉजिटिव प्रतिक्रिया मिल रही है. इसी वजह से स्मॉल और मिडकैप शेयरों में मोमेंटम बना हुआ है.

लार्जकैप स्टॉक्स पर दबाव बरकरार

उनका कहना है कि लार्ज-कैप में वैल्यूएशन आकर्षक होने के बावजूद विदेशी बिकवाली का दबाव बना हुआ है. जब तक विदेशी निवेशक दोबारा खरीदारी शुरू नहीं करते, तब तक बाजार में यह स्थिति बनी रह सकती है.

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी पूरी तरह थमती नहीं दिख रही. लार्जकैप शेयरों पर दबाव बना रह सकता है. स्मॉलकैप और मिडकैप में फिलहाल मोमेंटम जारी है. कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक घटनाक्रम आगे बाजार की दिशा तय करेंगे.

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