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विदेशी निवेशकों से 15 दिन में आए 19 हजार करोड़.
भारतीय शेयर बाजार के लिए फरवरी का महीना एक नई उम्मीद लेकर आया है. पिछले तीन महीनों से जो विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना रहे थे, वे अब वापस लौट आए हैं. फरवरी के शुरुआती 15 दिनों के भीतर ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs ने भारतीय इक्विटी मार्केट में 19,675 करोड़ रुपये का निवेश कर दिया है.
लगातार तीन महीने की भारी बिकवाली के बाद निवेशकों का यह यू-टर्न बाजार के जानकारों के लिए एक सुखद संकेत है. इस वापसी के पीछे भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील और दुनिया भर में आर्थिक चिंताओं का कम होना बताया जा रहा है. आइए समझते हैं कि विदेशी निवेशकों का यह मिजाज क्यों बदला और आगे की राह कैसी दिख रही है.
नवंबर से लेकर जनवरी तक की तस्वीर काफी डरावनी थी. आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि विदेशी निवेशकों ने बाजार पर काफी दबाव बना रखा था.
इस भारी बिकवाली ने घरेलू शेयर बाजार को दबाव में डाल दिया था और वैश्विक निवेशकों के बीच एक डर का माहौल बना दिया था. लेकिन फरवरी ने इस सिलसिले को तोड़ दिया है.
भले ही फरवरी में हमें 19,675 करोड़ रुपये का निवेश दिख रहा हो, लेकिन अगर हम पूरे साल 2025 का लेखा-जोखा देखें तो स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है. अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये (करीब 18.9 अरब डॉलर) निकाल लिए हैं.

यह पिछले कुछ सालों में विदेशी निवेश के लिहाज से सबसे कमजोर दौर माना जा रहा है. इस बिकवाली की मुख्य वजहें करेंसी में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापारिक तनाव, अमेरिकी टैरिफ का डर और भारतीय बाजार में शेयरों की ऊंची कीमतें रही हैं.
13 फरवरी तक के आंकड़ों को करीब से देखें तो पता चलता है कि निवेशकों ने 11 कारोबारी सत्रों में से 7 दिन जमकर खरीदारी की. सिर्फ 4 दिन ऐसे रहे जब वे बेचने वाले मोड में नजर आए. हालांकि, महीने के कुल आंकड़ों को देखें तो अभी भी कुछ बारीक अंतर बाकी है. रिपोर्ट के अनुसार, कुल खरीदारी के बावजूद अभी भी 1,374 करोड़ रुपये के शेयर ऐसे हैं जिन्हें इस महीने बेचा नहीं गया है.
बाजार के जानकारों का मानना है कि विदेशी निवेशकों का बढ़ता भरोसा अच्छा तो है, लेकिन यह तभी टिक पाएगा जब वैश्विक बाजारों में स्थिरता बनी रहे और ट्रेड पॉलिसी को लेकर तस्वीर और साफ हो जाए.
निवेशकों की वापसी के बीच शुक्रवार (13 फरवरी) का दिन बाजार के लिए काफी बुरा रहा. ग्लोबल संकेतों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर की आशंकाओं ने बाजार को नीचे गिरा दिया.
इस गिरावट ने निवेशकों को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह रिकवरी लंबे समय तक टिक पाएगी?
| फरवरी 2026 (शुरुआती 15 दिन) | वापसी / शुद्ध निवेश | + 19,675 |
| जनवरी 2026 | भारी बिकवाली | - 35,962 |
| दिसंबर 2025 | बिकवाली | - 22,611 |
| नवंबर 2025 | हल्की बिकवाली | - 3,765 |
| कुल साल 2025 (अब तक) | नेट निकासी | - 1,66,000 |
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों (FPIs) की वापसी निश्चित रूप से एक राहत भरी खबर है. 19,675 करोड़ रुपये का नया निवेश यह बताता है कि भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में सुधार का असर अब जमीन पर दिखने लगा है.
हालांकि, 2025 में अब तक हुई 1.66 लाख करोड़ की भारी निकासी की भरपाई करना अभी भी एक लंबी चुनौती है. एआई और ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजार को अपनी मजबूती साबित करनी होगी ताकि यह निवेश का सिलसिला बना रहे.