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इसमें ₹50 प्रति mm का मल्टीप्लायर तय किया गया है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Chatgpt)
भारत में अब तक मानसून सिर्फ चर्चा, किसानों की उम्मीदों और शेयर बाजार की चाल तय करने का माध्यम हुआ करता था, लेकिन अब आप यह अनुमान लगाकर भी ट्रेडिंग कर सकते हैं कि बारिश कम होगी या ज्यादा. देश के प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज NCDEX ने भारत का पहला सेबी-अप्रूव्ड वेदर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट 'RAINMUMBAI' लॉन्च कर दिया है.
लॉन्चिंग के पहले ही दिन इसे बंपर रिस्पॉन्स मिला और बाजार में 1,300 से अधिक लॉट्स का कारोबार हुआ. आइए इस आसान एक्सप्लेनर के जरिए समझते हैं कि यह पूरा सिस्टम कैसे काम करता है और इससे आपको क्या फायदा होगा.
आसान शब्दों में कहें तो यह मुंबई की बारिश पर आधारित एक वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट है. इसका पूरा स्ट्रक्चर वैज्ञानिक और सटीक आंकड़ों पर तैयार किया गया है.
* यह कॉन्ट्रैक्ट मुंबई की 2,206.7 मिलीमीटर (mm) की लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) बारिश से लिंक्ड है.
* इसमें ₹50 प्रति mm का मल्टीप्लायर तय किया गया है. यानी हर 1 mm बारिश के उतार-चढ़ाव पर ₹50 की कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू तय होगी.
* इसे IIT बॉम्बे के तकनीकी सहयोग और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर विकसित किया गया है.
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इस कॉन्ट्रैक्ट की कार्यप्रणाली बेहद पारदर्शी है और इसमें मानवीय गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है.
60 रीडिंग्स का फॉर्मूला: एक महीने के कॉन्ट्रैक्ट के दौरान 30 दिनों तक रोजाना सुबह और शाम के मौसम के पहलुओं को रिकॉर्ड किया जाता है. पूरे महीने में कुल 60 रीडिंग ली जाती हैं.
सेटलमेंट: NCDEX के एमडी और सीईओ अरुण रास्ते के मुताबिक, इस स्कीम की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कोई प्रशासनिक या कागजी उलझन नहीं है. महीने के अंत में आई फाइनल रीडिंग और आपकी तय कीमत के आधार पर कॉन्ट्रैक्ट का सीधा निपटारा हो जाता है.
| लॉन्च की तारीख | एक्सपायरी के महीने |
| 29 मई 2026 | जून 2026 |
| जुलाई 2026 | |
| अगस्त 2026 | |
| सितंबर 2026 |
यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सिर्फ मुंबई की बारिश से पूरे देश के मानसून का अंदाजा लगाया जा सकता है? अरुण रास्ते ने इसके पीछे का दिलचस्प भौगोलिक सफर समझाया.
मानसून का रूट: मानसून आमतौर पर 30 मई से 5 जून के बीच केरल पहुंचता है. इसके ठीक बाद, 7 से 12 जून के बीच यह मुंबई पर दस्तक देता है. मुंबई पहुंचने के अगले 10 दिनों में यह मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरफ बढ़ता है.
सटीक पैरामीटर: मुंबई आते-आते मानसून का असल पैटर्न और फैलाव पूरी तरह साफ हो जाता है कि इस साल मानसून कमजोर रहेगा या मजबूत. इसीलिए मुंबई को पूरे देश के मानसून को समझने के लिए सबसे सटीक भौगोलिक पैरामीटर माना गया है.
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यह कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ ट्रेडर्स के लिए सट्टेबाजी का जरिया नहीं है, बल्कि यह उन उद्योगों के लिए एक पारदर्शी सुरक्षा कवच है जिनका कारोबार मौसम की अनिश्चितता से प्रभावित होता है.
NCDEX वेदर कॉन्ट्रैक्ट की बारीकियां
| नए कॉन्ट्रैक्ट का नाम | RAINMUMBAI |
| टिकट साइज | 1 mm |
| 1 mm बारिश | ₹50 कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू |
| अधिकतम ऑर्डर लिमिट | 50 लॉट |
| उपलब्धता | जून से सिंतबर तक 4 मानसून कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध |
| ट्रेडिंग समय | सुबह 10 बजे से रात 11.30/11.55 बजे तक |
यह नया फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स उन उद्योगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है जिनका कारोबार मौसम पर काफी हद तक निर्भर करता है. इन सेक्टर्स की कंपनियां अब बारिश से जुड़े जोखिमों को हेज करने के लिए इस कॉन्ट्रैक्ट का इस्तेमाल कर सकेंगी.
कृषि- मानसून में अनिश्चितता के कारण किसानों और एग्रो-कंपनियों को होने वाले नुकसान की हेजिंग की जा सकेगी.
लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन- भारी बारिश के कारण ट्रांसपोर्टेशन और सप्लाई चेन रुकने से होने वाले घाटे को इस कॉन्ट्रैक्ट के जरिए मैनेज किया जा सकेगा.
इंफ्रास्ट्रक्चर- मानसून के दौरान कंस्ट्रक्शन के काम रुकने और प्रोजेक्ट्स में देरी से होने वाले नुकसान का वित्तीय कवरेज संभव होगा.
पावर सेक्टर- बिजली कंपनियां मौसम के बदलाव और मांग-आपूर्ति के उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले जोखिम को कम कर सकेंगी.
पहले ही दिन असर दिखा
FPOs ने इसमें जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई है। पहले ही दिन महाराष्ट्र के 4, मध्य प्रदेश के 4 और राजस्थान के 2 FPOs ने इसके जरिए अपनी हेजिंग शुरू कर दी है.
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि मुंबई अब केवल शेयर बाजार, मानसून और बॉलीवुड के लिए ही नहीं, बल्कि बारिश पर आधारित ट्रेडिंग के लिए भी जानी जाएगी. यह दुनिया के शुरुआती एक्सचेंज-ट्रेडेड रेनफॉल डेरिवेटिव्स में से एक है. बढ़ते जलवायु जोखिम के दौर में यह निवेशकों और कंपनियों को मौसम से होने वाले वित्तीय प्रभावों से बचाव का एक पारदर्शी और संगठित माध्यम प्रदान करता है.
मानसून अच्छा रहने से किसानों की आय बढ़ती है. जब ग्रामीण भारत के पास पैसा आता है, तो ट्रैक्टर, गाड़ियां, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों की बिक्री में भारी उछाल आता है. रिटेल निवेशक इस वेदर कॉन्ट्रैक्ट के जरिए मानसून के इस रीयल-टाइम इम्पैक्ट को ट्रैक कर सकते हैं और बाजार की दिशा का बेहतर अनुमान लगा सकते हैं.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 वेदर डेरिवेटिव्स क्या होते हैं?
यह एक तरह का फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके जरिए मौसम घटकों के आधार पर ट्रेडिंग और हेजिंग की जाती है.
Q2 कॉन्ट्रैक्ट का सेटलमेंट कैसे होता है?
महीने के अंत में वास्तविक वर्षा के आंकड़ों के आधार पर कॉन्ट्रैक्ट का सेटलमेंट किया जाता है.
Q3 क्या किसान भी इसमें भाग ले सकते हैं?
हां, किसान और FPO इस कॉन्ट्रैक्ट का इस्तेमाल मौसम से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए कर सकते हैं.