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‘SL’ से Essel बनने की कहानी दिलचस्प है.
आज “Essel” नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में Zee TV, Zee News, Zee Business, Dish TV और कई बड़े कारोबारों की तस्वीर उभरती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस नाम की शुरुआत किसी बड़े ब्रांडिंग एक्सपर्ट या कॉर्पोरेट एजेंसी ने नहीं की थी?
असल में इसकी शुरुआत हुई थी एक छोटे से सरकारी शॉर्टकट से.
Essel Group के 100 साल पूरे होने पर आयोजित खास टाउनहॉल में चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने पहली बार विस्तार से बताया कि आखिर “Essel” नाम कैसे बना और कैसे एक साधारण “SL” आगे चलकर भारत के बड़े बिजनेस ग्रुप की पहचान बन गया.
शुरुआती दौर में कारोबार “Ramgopal Indraprastha Messers” नाम से चलता था. बाद में 1969 में इसका नाम बदलकर “Subhash Chandra Laxmi Narain (SL)” रखा गया.
उस समय Food Corporation of India यानी FCI के साथ कामकाज के दौरान gate pass, रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेजों में लंबे नाम लिखने में दिक्कत होती थी. जगह कम होती थी, इसलिए लोग इसे छोटा करके सिर्फ “SL” लिखने लगे.
धीरे-धीरे यही “SL” कारोबार की पहचान बनने लगा.
लेकिन एक समस्या थी.
“SL” बोलने और दिखाने में उतना प्रभावी नहीं लगता था. Brochure, presentation और official communication में इसे इस्तेमाल करना मुश्किल हो रहा था.
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डॉ. सुभाष चंद्रा ने टाउनहॉल में बताया कि इसी दौरान उन्होंने सोचा कि “SL” को थोड़ा बेहतर तरीके से पेश किया जाए.
तभी “SL” को presentation-friendly बनाकर “Essel” नाम दिया गया.
यानी:
और इसी से जन्म हुआ “Essel” नाम का.
यहीं से एक unified corporate identity की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर Essel Group के रूप में दुनिया भर में पहचानी गई.
Essel Group की शुरुआत 1926 में हुई थी.
श्री जगन्नाथ गोयनका ने अपने तीन भाइयों के साथ मिलकर हरियाणा के हिसार जिले की आदमपुर मंडी में grain trading business शुरू किया.
उस समय कारोबार का नाम था:
Ramgopal Indraprastha Messers
यही आगे चलकर Essel Group की नींव बना.
1941: बेहतर मौके की तलाश में हिसार पहुंचे
1941 में कारोबार को आदमपुर से हिसार शिफ्ट किया गया ताकि बेहतर व्यापारिक अवसर मिल सकें.
फिर 1946 में Okara Dukaan बंद हुई और सिर्फ 16 साल की उम्र में श्री नंदकिशोर गोयनका ने कारोबार की जिम्मेदारी संभाली.
यहीं से परिवार की अगली पीढ़ी ने बिजनेस को आगे बढ़ाना शुरू किया.
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1948 में श्री जगन्नाथ गोयनका ने दिल्ली के Motia Khan इलाके में pulses polishing factory शुरू की.
इससे food processing और distribution में Group की पकड़ मजबूत हुई.
1970: सीमित संसाधन… लेकिन बड़ा सपना
1970 में डॉ. सुभाष चंद्रा दिल्ली पहुंचे.
संसाधन सीमित थे, लेकिन सोच बड़ी थी.
1971 में उन्होंने एक दाल मिल lease पर ली. यही वह मोड़ था जहां traditional trading धीरे-धीरे industrial operations में बदलने लगी.
फिर 1976 में कारोबार को आधिकारिक तौर पर:
Essel Group of Industries
नाम दिया गया.
इसके बाद Essel Group ने तेजी से नए सेक्टर्स में कदम रखा.
1981: Essel Propack
भारत में laminated plastic tube technology लाने वाली शुरुआती कंपनियों में Essel Propack शामिल रही.
आगे चलकर यह global manufacturing leader बनी.
1990: EsselWorld
मुंबई में EsselWorld शुरू हुआ.
उस दौर में amusement park culture भारत में नया था और EsselWorld तेजी से लोकप्रिय बना.
1992: जब Zee TV ने बदल दिया भारतीय टीवी
1992 Essel Group के इतिहास का सबसे बड़ा turning point बना.
यही वह साल था जब:
Zee TV लॉन्च हुआ
यह भारत का पहला बड़ा private Hindi satellite channel बना.
उस समय टीवी की दुनिया लगभग Doordarshan तक सीमित थी. Zee TV ने entertainment industry का पूरा खेल बदल दिया.
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इसके बाद:
जैसे बड़े ventures शुरू हुए.
धीरे-धीरे Group:
जैसे कई sectors में फैल गया.
2003 में शुरू हुआ Kidzee आगे चलकर Asia की बड़ी preschool chains में शामिल हुआ.
फिर OTT दौर आया और:
के जरिए Group ने खुद को नए दौर के हिसाब से बदला.
2026 में Essel Group ने 100 साल पूरे किए.
यह सिर्फ किसी कंपनी की anniversary नहीं है. यह छह पीढ़ियों तक लगातार चलते रहे भारतीय कारोबार की कहानी है.
एक ऐसा सफर:
शायद इसकी सबसे बड़ी ताकत यही रही कि Group हर दौर के साथ खुद को बदलता गया.
लेकिन एक चीज कभी नहीं बदली:
पहचान
और यही पहचान उस छोटे से “SL” से शुरू हुई थी… जो आगे चलकर “Essel” बन गया.
टाउनहॉल में डॉ. सुभाष चंद्रा ने साफ कहा कि किसी भी बड़े कारोबार की असली ताकत सिर्फ पैसा नहीं होती.
बल्कि:
ही उसे लंबे समय तक टिकाए रखती है.
और शायद यही वजह है कि 1926 में शुरू हुआ यह सफर 2026 तक पहुंचकर भी लगातार आगे बढ़ रहा है.