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Editor's Take: अमेरिकी राष्ट्रपति ने आखिरकार कई देशों पर जवाबी टैरिफ का ऐलान कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप ने अधिकतम टैरिफ लगाकर नया विवाद खड़ा कर दिया है. मार्केट गुरु अनिल सिंघवी ने कहा कि नकारात्मक पहलू यह है कि उन्होंने सभी देशों पर भारी-भरकम शुल्क लगाया है, लेकिन राहत की बात यह है कि अब इसमें और बढ़ोतरी नहीं होगी.
संभावना है कि ट्रंप अब अन्य देशों के साथ बातचीत कर कुछ टैरिफ में कटौती कर बीच का रास्ता निकालेंगे. इस फैसले के चलते अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में कमी आई है और डॉलर इंडेक्स कमजोर पड़ा है. हालांकि, नैस्डैक में तेज गिरावट दिखी है, लेकिन डाओ फ्यूचर्स पर इसका बहुत बड़ा असर नहीं पड़ा. अमेरिकी बाज़ारों में भारी उछाल की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि इस टैरिफ वॉर का सबसे अधिक नुकसान खुद अमेरिका को होगा. इसका मतलब है कि यह वॉर खत्म नहीं, बल्कि इसकी शुरुआत है.
भारत के उत्पादों पर 26% टैरिफ लगा दिया गया है, लेकिन राहत की बात यह है कि भारतीय सरकार ट्रंप प्रशासन के साथ लगातार बातचीत कर रही है. अन्य देशों की तुलना में ट्रंप का भारत के प्रति रुख अपेक्षाकृत नरम है, जिससे उम्मीद की जा सकती है कि बातचीत के जरिए कुछ समाधान निकल सकता है. फिलहाल, इस टैरिफ का असर भारतीय कंपनियों पर देखने को मिल सकता है, लेकिन आने वाले हफ्तों में स्पष्ट तस्वीर उभर कर सामने आएगी.
टैरिफ वॉर में फार्मा सेक्टर को बड़ी राहत मिली है. इस सेक्टर पर किसी भी तरह का टैरिफ नहीं लगाया गया, जो एक सकारात्मक संकेत है. हमने पहले भी कहा था कि फार्मा सेक्टर अप्रैल सीरीज का सबसे बेहतरीन सेक्टर रहेगा और टैरिफ से पहले फार्मा शेयरों में जो 12-17% की गिरावट आई थी, वह अब रिकवरी की ओर बढ़ेगी. Aurobindo Pharma, Dr Reddy’s, Lupin, Zydus Life और Gland Pharma जैसी कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है, और इनमें 5-10% तक उछाल आ सकता है.
नकारात्मक असर ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और श्रिंप सेक्टर पर पड़ेगा. वायर और केबल कंपनियों को भी इस टैरिफ से नुकसान होगा, जिससे Polycab, Apar और KEI Industries प्रभावित हो सकते हैं. इसके अलावा, केमिकल सेक्टर के लिए भी यह एक नकारात्मक कदम साबित हो सकता है, जिससे SRF, Navin Fluorine और PI Industries जैसी कंपनियों पर दबाव बन सकता है.
न्यूट्रल प्रभाव उन सेक्टर्स पर पड़ेगा जिन पर पहले से ही टैरिफ लागू था. ऑटो और ऑटो एंसिलरी कंपनियों पर पहले से ही 25% टैरिफ लग चुका था, इसलिए Tata Motors, Sona BLW और Bharat Forge जैसी कंपनियों पर कोई नया प्रभाव नहीं पड़ेगा. इसी तरह, स्टील और एल्युमिनियम पर भी पहले ही 25% टैरिफ लागू किया गया था, जबकि कॉपर पर किसी नए टैरिफ का ऐलान नहीं हुआ है.
निफ्टी के लिए 22,800-23,000 का स्तर बेहद मजबूत सपोर्ट बना हुआ है. कल FII की खरीदारी लौटी, जो बाजार के लिए एक पॉजिटिव संकेत है. हालांकि, बाजार कमजोर रह सकता है, लेकिन इसमें घबराने की जरूरत नहीं है. निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे आज और कल के बाजार को करीब से देखें और जल्दबाजी में फैसले न लें. अमेरिकी बाजार आज रात कैसा प्रदर्शन करते हैं, इस पर भी भारतीय बाजार की दिशा निर्भर करेगी. आईटी सेक्टर में कमजोरी जारी रहेगी. बैंकिंग शेयरों में गिरावट कम देखने को मिलेगी और रिकवरी में ये सबसे आगे रहेंगे. यानी, बाजार में भले ही कमजोरी दिखे, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि रणनीति बनाकर सही मौके पर निवेश करना बेहतर होगा.