Iran-Israel तनाव ने फिर बढ़ाई टेंशन, निवेशक कैसे बचाएं अपना पोर्टफोलियो- Anil Singhvi ने बताई सही तरकीब

Iran-Israel Conflict: सवाल है कि ऐसे तनाव के माहौल में भारतीय निवेशक और ट्रेडर्स क्या करें. अपना पोर्टफोलियो कैसे बचाएं. मार्केट गुरु अनिल सिंघवी ने ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के लिए सही इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी बताई है.
Iran-Israel तनाव ने फिर बढ़ाई टेंशन, निवेशक कैसे बचाएं अपना पोर्टफोलियो- Anil Singhvi ने बताई सही तरकीब

Iran-Israel Conflict: ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के उद्देश्य से इजराइल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ प्रारंभ करने की घोषणा की है. साथ ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को दावा किया कि नतांज स्थित ईरान के मुख्य संवर्धन केंद्र सहित अन्य ठिकानों पर हमला किया गया है. नेतन्याहू ने शुक्रवार सुबह एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘ कुछ ही समय पहले इजराइल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ शुरू किया है जो इजराइल के अस्तित्व के लिए ईरानी खतरे को खत्म करने के वास्ते एक लक्षित सैन्य अभियान है. खतरे के समाप्त होने तक यह अभियान जारी रहेगा.’’

इससे ग्लोबल बाजारों में तनाव बढ़ गया है. भारतीय शेयर बाजारों में भी जबरदस्त गिरावट है. कच्चा तेल 13 पर्सेंट चढ़कर 77 डॉलर के पास पहुंच गया है. ऐसे में सवाल है कि ऐसे तनाव के माहौल में भारतीय निवेशक और ट्रेडर्स क्या करें. अपना पोर्टफोलियो कैसे बचाएं. मार्केट गुरु अनिल सिंघवी ने ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के लिए सही इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी बताई है.

कहां करें खरीदारी और बिकवाली?

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अनिल सिंघवी ने कहा कि तेल और पेंट कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि कच्चे तेल में तेजी से उनकी लागत बढ़ेगी. एविएशन और ग्लोबल ट्रेड से जुड़े शेयरों में कमजोरी बनी रह सकती है. हालांकि, महंगाई घटने से FMCG शेयरों में कुछ खरीदारी देखने को मिल सकती है. साथ ही, ग्लोबल तनाव के चलते डिफेंस सेक्टर में तेजी के आसार हैं, जिससे इन शेयरों में निवेश का मौका बन सकता है.

ट्रेडर्स इस बाजार में क्या करें?

अनिल सिंघवी ने कहा कि तेजी की पोजीशन पर सख्त स्टॉपलॉस के साथ ट्रेड करें. इंट्राडे और ओवरनाइट पोजिशन कम रखें. पिछले दिन ही तेजी की पोजीशन में स्टॉपलॉस ट्रिगर हो गया था, ऐसे में नई पोजीशन सोच-समझकर लें.

निवेशकों के लिए क्या हो स्ट्रैटेजी?

उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाओं का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है—ये कब शुरू हों और कब खत्म हों, कुछ कहा नहीं जा सकता. लेकिन अनुभव बताता है कि तनाव खत्म होते ही बाजार में तेज रिकवरी आती है. इसलिए गिरावट में घबराने की बजाय पोर्टफोलियो को संभालें और नई गिरावट को लॉन्ग टर्म निवेश के लिए 'गोल्डन चांस' मानें. अगर शॉर्ट टर्म के लिए निवेश किया है, तो पोजीशन हल्की करें. लेकिन अगर नजरिया साल भर या उससे ज्यादा का है, तो चिंता की बात नहीं है.

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