Editor's Take: SEBI के फैसलों से MF/ब्रोकरेज शेयर बढ़ेंगे या गिरेंगे? रुपये की रिकवरी कितनी टिकाऊ? अनिल सिंघवी से समझें 

Editor's Take: SEBI के ये फैसले लॉन्ग टर्म में निवेशकों के लिए सकारात्मक हैं. करेंसी मार्केट में फिलहाल राहत जरूर है, लेकिन ग्लोबल फैक्टर्स को देखते हुए सतर्कता अभी भी जरूरी बनी हुई है.
Editor's Take: SEBI के फैसलों से MF/ब्रोकरेज शेयर बढ़ेंगे या गिरेंगे? रुपये की रिकवरी कितनी टिकाऊ? अनिल सिंघवी से समझें 

Editor's Take: SEBI की बोर्ड बैठक में कई बड़े और अहम फैसले लिए गए, जिन पर पहले ही ज़ी बिज़नेस ने संकेत दिए थे. इन फैसलों का सीधा असर म्युचुअल फंड निवेशकों, ब्रोकरेज कंपनियों, IPO मार्केट और डेट मार्केट पर पड़ेगा. अनिल सिंघवी के मुताबिक रेगुलेटर के ये कदम बाजार की उम्मीद से बेहतर हैं और लॉन्ग टर्म में सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और निवेशकों के लिए फ्रेंडली बनाएंगे.

म्युचुअल फंड निवेश अब और सस्ता

SEBI ने म्युचुअल फंड्स के खर्चों पर लगने वाली बेस एक्सपेंस रेश्यो की सीमा घटा दी है. अब यह 1% से घटाकर 0.9% कर दी गई है. इंडेक्स फंड्स और ETFs के लिए भी यही नई सीमा तय की गई है. वहीं लिक्विड स्कीम पर आधारित FoF के लिए एक्सपेंस रेश्यो 0.9% रखा गया है. क्लोज-एंडेड इक्विटी स्कीम्स में भी खर्च घटाकर 1.25% से 1% कर दिया गया है. इससे निवेशकों का कुल खर्च कम होगा और रिटर्न ज्यादा पारदर्शी दिखेगा.

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खास बातें-

  • बेस एक्सपेंस रेश्यो 1% से घटकर 0.9%
  • इंडेक्स फंड्स और ETFs पर भी कम खर्च
  • क्लोज-एंडेड इक्विटी स्कीम्स में खर्च घटा
  • ब्रोकरेज पर कटौती, लेकिन डर से कम

SEBI ने ब्रोकरेज लिमिट में भी कटौती की है, लेकिन बाजार की आशंका से कम. कैश मार्केट में ब्रोकरेज सीमा 8.59 bps से घटकर 6 bps कर दी गई है. डेरिवेटिव्स सेगमेंट में यह 3.89 bps से घटकर 2 bps हुई है. इसके अलावा एग्जिट लोड वाले फंड्स पर लगने वाला अतिरिक्त 5 bps चार्ज भी खत्म कर दिया गया है. अनिल सिंघवी का मानना है कि यह कटौती उम्मीद से कम है, इसलिए ब्रोकरेज कंपनियों की कमाई पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा.

खास बातें-

  • कैश मार्केट ब्रोकरेज अब 6 bps
  • डेरिवेटिव्स ब्रोकरेज 2 bps
  • एग्जिट लोड पर अतिरिक्त चार्ज खत्म
  • IPO और डेट मार्केट के नियम आसान

SEBI ने ICDR रेगुलेशंस में बदलाव को मंजूरी दी है, जिससे IPO की प्रक्रिया और आसान होगी. अब IPO से पहले केवल प्रोमोटर के शेयरों की ही बिक्री संभव होगी और निवेशकों को पहले से ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही डेट मार्केट में कंपनियों के लिए कंप्लायंस प्रक्रिया को सरल करने के लिए NCS रेगुलेशंस, 2021 में भी संशोधन को मंजूरी दी गई है.

खास बातें-

  • IPO नियम आसान और पारदर्शी
  • प्रोमोटर शेयरों पर फोकस
  • डेट मार्केट में कंप्लायंस सरल
  • SEBI फैसलों का MF और ब्रोकरेज शेयरों पर असर

क्या म्यूचुअल फंड/ब्रोकरेज शेयरों पर होगा असर?

अनिल सिंघवी के मुताबिक SEBI के फैसले बाजार की उम्मीद से बेहतर हैं. म्युचुअल फंड्स के खर्च जरूर घटाए गए हैं, लेकिन कटौती इतनी ज्यादा नहीं है कि MF कंपनियों की कमाई पर बड़ा असर पड़े. ऐसे में गिरावट आने पर HDFC AMC जैसे शेयरों में खरीदारी का मौका मिल सकता है.

ब्रोकरेज शेयरों की बात करें तो ब्रोकरेज लिमिट घटकर 6 पैसे हुई है, जबकि बाजार को डर था कि यह 2 पैसे तक आ सकती है. इसलिए गिरावट में Nuvama Wealth जैसे शेयरों में निवेश पर विचार किया जा सकता है. हालांकि KFin और CAMS जैसे रजिस्ट्रार्स की कमाई पर असर पड़ सकता है, जिससे इन शेयरों में हल्की कमजोरी संभव है.

रुपए की रिकॉर्ड गिरावट पर ब्रेक, लेकिन नजर जरूरी

रुपए ने लगातार चार दिन रिकॉर्ड लाइफ लो बनाने के बाद आखिरकार रिकवरी दिखाई है. डॉलर के मुकाबले रुपया 91.07 तक कमजोर हुआ, लेकिन RBI की डॉलर सेलिंग के बाद 90.37 पर बंद हुआ. एक ही दिन में पिछले तीन दिनों की गिरावट कवर हो गई. हालांकि अनिल सिंघवी मानते हैं कि अगले दो दिन बेहद अहम हैं. 19 दिसंबर को बैंक ऑफ जापान की पॉलिसी आएगी और वहां ब्याज दरें बढ़ने की पूरी संभावना है. अगर ऐसा हुआ तो येन कैरी ट्रेड का रिवर्सल हो सकता है, जिसका असर उभरती मुद्राओं पर पड़ेगा. यही वजह है कि रुपया फिलहाल सबसे कमजोर करेंसी बना हुआ है.

खास बातें-

  • 4 दिन की रिकॉर्ड गिरावट पर ब्रेक
  • RBI के हस्तक्षेप से रुपया मजबूत
  • BOJ पॉलिसी से आगे की दिशा तय

SEBI के ये फैसले लॉन्ग टर्म में निवेशकों के लिए सकारात्मक हैं. म्युचुअल फंड निवेश सस्ता और पारदर्शी होगा, ब्रोकरेज पर दबाव उम्मीद से कम रहेगा और IPO व डेट मार्केट में नियम आसान होंगे. वहीं करेंसी मार्केट में फिलहाल राहत जरूर है, लेकिन ग्लोबल फैक्टर्स को देखते हुए सतर्कता अभी भी जरूरी बनी हुई है.

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