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DoT-SEBI ने मिलाया हाथ, तैयार किया नया सिस्टम (फोटो - AI जनरेटेड)
देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल निवेश के दौर में निवेशकों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है. टेलीकम्यूनिकेशन डिपार्टमेंट (DoT) और सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने मिलकर एक अहम समझौता (MoU) साइन किया है. इसका मकसद सिक्योरिटीज मार्केट से जुड़े फ्रॉड और टेलीकॉम संसाधनों के दुरुपयोग पर रोक लगाना है. यह समझौता 15 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है.
इस साझेदारी का सबसे बड़ा फोकस डेटा शेयरिंग पर है. अब DoT और SEBI एक-दूसरे के साथ अहम जानकारी साझा करेंगे, जिससे फ्रॉड की पहचान शुरुआती स्तर पर ही की जा सकेगी. DoT की तरफ से SEBI को टेलीकॉम से जुड़ा डेटा मिलेगा, जैसे संदिग्ध कॉल, SMS और मोबाइल नंबर पैटर्न. इससे उन स्कैम्स का पता लगाना आसान होगा, जिनमें लोगों को फर्जी स्टॉक टिप्स, गैर-कानूनी ट्रेडिंग ऐप या पंप-एंड-डंप स्कीम्स के जरिए फंसाया जाता है.
इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ बनेगा DoT का डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP), जो रियल-टाइम में जानकारी साझा करने की सुविधा देता है. यह प्लेटफॉर्म पहले से ही 1400 से ज्यादा स्टेकहोल्डर्स को जोड़ता है और अब SEBI भी इसके जरिए सीधे इंटेलिजेंस एक्सेस कर सकेगा. इसका मतलब है कि अब किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी.
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इस समझौते के तहत DoT, SEBI को फाइनेंशियल्स फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) भी उपलब्ध कराएगा. यह एक तरह का अर्ली वार्निंग सिस्टम है, जो मल्टी-डायमेंशनल डेटा के आधार पर ऐसे मोबाइल नंबरों की पहचान करता है, जिनमें फ्रॉड का शक होता है.

इसके अलावा मोबाइल नंबर रिवोकेशन लिस्ट (MNRL) भी साझा की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि निवेशकों के अकाउंट्स सिर्फ वैध और सक्रिय मोबाइल नंबरों से ही जुड़े हों.
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यह साझेदारी दोतरफा होगी. जहां DoT टेलीकॉम डेटा देगा, वहीं SEBI भी ऐसे मोबाइल नंबरों और टेलीकॉम संसाधनों की जानकारी साझा करेगा, जो साइबर फ्रॉड, फर्जी पहचान (impersonation) या म्यूल अकाउंट्स से जुड़े हैं. इससे टेलीकॉम स्तर पर भी तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी, जैसे संदिग्ध नंबर ब्लॉक करना या नेटवर्क स्तर पर रोक लगाना.
इस MoU की खास बात यह है कि यह सिर्फ फ्रॉड होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि फ्रॉड को होने से पहले ही रोकने पर फोकस करता है. पहले जहां एजेंसियां रिएक्टिव मोड में काम करती थीं, वहीं अब यह सिस्टम प्रोएक्टिव हो गया है. यानी अगर किसी नंबर से संदिग्ध गतिविधि का संकेत मिलता है, तो उस पर पहले ही नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर उसे ब्लॉक भी किया जा सकता है.
निवेशकों के लिए इसका सीधा फायदा यह होगा कि उन्हें मिलने वाले फर्जी कॉल्स, मैसेज या स्कैम लिंक पर तेजी से रोक लगेगी. साथ ही, उनके निवेश और डिमैट अकाउंट्स को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकेगा. इससे डिजिटल मार्केट में भरोसा बढ़ेगा और नए निवेशकों को भी सुरक्षित माहौल मिलेगा.
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वहीं, फ्रॉड करने वालों के लिए यह बड़ा झटका है. अब उनके लिए एक ही नंबर या अलग-अलग सिम के जरिए स्कैम करना आसान नहीं रहेगा. नेटवर्क लेवल पर उनकी गतिविधियों को ट्रैक किया जाएगा और पूरे गैंग को पकड़ने की कोशिश होगी. यानी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे फ्रॉड नेटवर्क पर कार्रवाई संभव होगी.
इस साझेदारी की नींव पहले से चल रही सरकारी पहलों पर भी टिकी है. DoT के Sanchar Saathi प्लेटफॉर्म के तहत अब तक 88 लाख से ज्यादा फर्जी मोबाइल कनेक्शन बंद किए जा चुके हैं. इसके अलावा, फाइनेंशियल्स फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर के जरिए पिछले 10 महीनों में करीब ₹2300 करोड़ के फ्रॉड को रोका गया है.
कुल मिलाकर, SEBI और DoT के बीच यह समझौता भारत के डिजिटल और फाइनेंशियल इकोसिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. आने वाले समय में इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और फ्रॉड करने वालों के लिए रास्ता और कठिन हो जाएगा.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 SEBI और DoT के बीच क्या हुआ है?
दोनों ने फ्रॉड रोकने के लिए MoU साइन किया है.
Q2 इसका निवेशकों को क्या फायदा होगा?
फर्जी कॉल, SMS और निवेश घोटालों से बेहतर सुरक्षा मिलेगी.
Q3 DoT SEBI को क्या डेटा देगा?
संदिग्ध मोबाइल नंबर, कॉल और SMS से जुड़ा डेटा.
Q4 फ्रॉड करने वालों पर क्या असर पड़ेगा?
उनके नंबर ट्रैक होकर ब्लॉक किए जा सकेंगे.
Q5 Digital Intelligence Platform क्या है?
एक सिस्टम जो रियल-टाइम में फ्रॉड से जुड़ी जानकारी शेयर करता है.