विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार पर मचाया कहर! बेच डाले 1.13 लाख करोड़ रुपये के शेयर, DII ने संभाला मोर्चा

भारतीय शेयर बाजार में FIIs की भारी बिकवाली के बीच DIIs ने मोर्चा संभाल लिया है. मार्च में 1.13 लाख करोड़ की निकासी के बावजूद घरेलू निवेशकों ने कैसे बाजार को गिरने से बचाया, जानिए पूरी रिपोर्ट.
विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार पर मचाया कहर! बेच डाले 1.13 लाख करोड़ रुपये के शेयर, DII ने संभाला मोर्चा

विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार पर मचाया कहर. (Image Source- AI)

भारतीय शेयर बाजार इस समय एक अजीब सी कशमकश से गुजर रहा है. एक तरफ विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) अपनी झोली खाली करके बाजार से बाहर भाग रहे हैं, तो दूसरी तरफ हमारे अपने घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) ढाल बनकर खड़े हो गए हैं.

पिछले कुछ दिनों में बाजार में जो गिरावट आई, उसे रोकने में इन घरेलू दिग्गजों ने बड़ी भूमिका निभाई है. अगर ये घरेलू निवेशक सक्रिय न होते, तो बाजार की गिरावट और भी डरावनी हो सकती थी. विदेशी फंड्स की निकासी की रफ्तार इतनी तेज है कि इसने वित्त वर्ष 2026 की सबसे बड़ी बिकवाली का रिकॉर्ड बना दिया है.

पश्चिमी एशिया के तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने विदेशी निवेशकों को डरा दिया है, लेकिन भारतीय बाजार के प्रति घरेलू संस्थागत निवेशकों का भरोसा अभी भी अटूट बना हुआ है. पिछले एक हफ्ते में जो कुछ भी दलाल स्ट्रीट पर हुआ, वह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं था, जहां एक तरफ से हमला हो रहा था और दूसरी तरफ से बचाव.

Add Zee Business as a Preferred Source

विदेशी निवेशक क्यों कर रहे भारी बिकवाली?

बाजार में इस समय सबसे बड़ी चिंता विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रवैया है. पिछले पूरे हफ्ते ये निवेशक लगातार बिकवाल बने रहे. आंकड़ों की बात करें तो उन्होंने लगभग 24,596 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम बाजार से निकाल ली. एनरिच मनी के सीईओ पंकज के अनुसार, इस बिकवाली के पीछे वैश्विक अनिश्चितता, बढ़ते बॉन्ड यील्ड और मजबूत होता अमेरिकी डॉलर सबसे बड़े कारण हैं.

जब भी वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ती है या डॉलर मजबूत होता है, विदेशी निवेशक उभरते बाजारों जैसे भारत से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों की ओर ले जाते हैं. इसी का असर हमें पिछले कुछ दिनों में देखने को मिला है.

घरेलू निवेशकों की दमदार खरीदारी

भले ही विदेशी निवेशक बाजार छोड़कर जा रहे हों, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने हार नहीं मानी है. पिछले हफ्ते ही उन्होंने 26,897 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. यह रकम विदेशी निवेशकों द्वारा निकाली गई रकम से भी अधिक है. इसी खरीदारी ने बाजार को बड़े सपोर्ट जोन के पास स्थिरता दी है.

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर का मानना है कि घरेलू निवेशकों ने 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की साप्ताहिक खरीदारी करके गिरावट को काफी हद तक थामने का काम किया है. हालांकि, बाजार का मूड अभी भी थोड़ा कमजोर है क्योंकि वैश्विक हालात पक्ष में नहीं दिख रहे हैं.

मार्च में बिकवाली का रिकॉर्ड और कच्चे तेल का दबाव

मार्च का महीना भारतीय इक्विटी बाजार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है. 27 मार्च तक के आंकड़ों को देखें तो विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक 1.13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर ली है. यह वित्त वर्ष 2026 की अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिकवाली है.

इस भगदड़ के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है. युद्ध जैसी स्थितियों के कारण कच्चे तेल की कीमतें सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं. भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, कच्चे तेल का महंगा होना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता. यही वजह है कि विदेशी निवेशक भारत में रिस्क लेने से कतरा रहे हैं.

निफ्टी और सेंसेक्स का हाल

शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांकों के लिए यह हफ्ता काफी भारी रहा. यह लगातार पांचवां हफ्ता था जब बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ. निफ्टी में पूरे हफ्ते के दौरान 1.28 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन तो निफ्टी 2.09 प्रतिशत टूटकर 22,819 के स्तर पर आ गया.

सेंसेक्स की हालत भी कुछ ऐसी ही रही. आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 1,690 अंक यानी 2.25 प्रतिशत लुढ़क कर 75,383 पर बंद हुआ. पूरे हफ्ते के दौरान सेंसेक्स में 1.27 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. बाजार में पूरे समय उतार-चढ़ाव बना रहा और रिकवरी की कोशिशें भी नाकाम होती दिखीं.

क्या कहते हैं बाजार के एक्सपर्ट्स

बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में भी सावधानी बरतने की जरूरत है. जब तक वैश्विक स्तर पर जोखिम कम नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी. बोलिंजकर जैसे विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का मजबूत पैसा और अगर वैश्विक तनाव में कोई कमी आती है, तो यह बाजार की गिरावट को सीमित करेगा.

ऐसे माहौल में एक्सपर्ट्स की सलाह है कि निवेशकों को 'हाई-बीटा' यानी बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले शेयरों के बजाय 'क्वालिटी लार्ज-कैप' और घरेलू थीम पर आधारित शेयरों पर ध्यान देना चाहिए. यह वो समय है जब क्वालिटी शेयर ही पोर्टफोलियो को बचा सकते हैं.

FAQs

Q: विदेशी निवेशकों (FIIs) ने मार्च में कितनी बिकवाली की है?

A: विदेशी निवेशकों ने मार्च महीने में अब तक 1.13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी की है, जो वित्त वर्ष 2026 की सबसे बड़ी एक महीने की बिकवाली है.

Q: घरेलू निवेशकों (DIIs) ने बाजार को कैसे संभाला?

A: घरेलू निवेशकों ने पिछले हफ्ते करीब 26,897 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे विदेशी निवेशकों द्वारा पैदा किए गए बिकवाली के दबाव को कम करने में मदद मिली.

Q: बाजार में गिरावट के पीछे मुख्य वैश्विक कारण क्या हैं?

A: पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और बढ़ते बॉन्ड यील्ड मुख्य कारण हैं.

Q: पिछले हफ्ते निफ्टी और सेंसेक्स का प्रदर्शन कैसा रहा?

A: निफ्टी हफ्ते के दौरान 1.28 प्रतिशत और सेंसेक्स 1.27 प्रतिशत नीचे रहा. यह बाजार की गिरावट का लगातार पांचवां हफ्ता था.

Q: एक्सपर्ट्स अभी निवेशकों को क्या सलाह दे रहे हैं?

A: एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को अभी सतर्क रहना चाहिए और बहुत ज्यादा जोखिम वाले शेयरों के बजाय अच्छी क्वालिटी के लार्ज-कैप शेयरों पर फोकस करना चाहिए.