Crude Oil Price Crash: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट! $95 के नीचे आया ब्रेंट क्रूड, अमेरिकी शेयर बाजार में रौनक

वैश्विक बाजार से बड़ी राहत की खबर आ रही है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की नई उम्मीदों ने कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट ला दी है. ब्रेंट क्रूड 5% और WTI क्रूड 7% तक लुढ़क गया है. तेल की कीमतों में यह कमी वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई से जूझ रहे देशों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है.
Crude Oil Price Crash: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट! $95 के नीचे आया ब्रेंट क्रूड, अमेरिकी शेयर बाजार में रौनक

मंगलवार को ग्लोबल मार्केट से एक ऐसी खबर आई, जिसने निवेशकों और आम जनता दोनों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है.

दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए पिछले कुछ दिन तनाव भरे रहे हैं. हालांकि, मंगलवार को ग्लोबल मार्केट से एक ऐसी खबर आई, जिसने निवेशकों और आम जनता दोनों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है. कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू होने वाली शांति वार्ता की उम्मीदें हैं. बाजार को लग रहा है कि अब दोनों देश युद्ध समाप्त करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को 'वर्स्ट केस सिनेरियो' (सबसे खराब स्थिति) से बचाने के लिए गंभीर हैं.

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तेल की कीमतों में कितनी आई गिरावट?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का आंकड़ा काफी बड़ा है. ब्रेंट क्रूड के दाम में करीब 5 फीसदी की गिरावट आई है, जिसके चलते वह 95 डॉलर प्रति बैरल के भी नीचे पहुंच गया है. वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड में 7 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है, जिसके चलते इसका दाम 92 डॉलर प्रति बैरल के भी नीचे जा पहुंचा है.

क्यों गिरे दाम? शांति वार्ता और हॉर्मुज का पेंच

कच्चे तेल की कीमतों में इस नरमी के पीछे 2 मुख्य कारण हैं:

शांति की उम्मीद: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए फिर से बातचीत शुरू होने की संभावना बढ़ गई है. इससे बाजार में अनिश्चितता कम हुई है.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट है. युद्ध के कारण यहां जो ब्लॉकेज (रुकावटें) पैदा हुई थीं, उनके हटने की उम्मीद से सप्लाई बढ़ने की संभावना जगी है. जब बाजार में तेल आसानी से पहुंचेगा, तो कीमतें अपने आप कम होंगी.

शेयर बाजार में रौनक, लेकिन अर्थव्यवस्था पर दबाव

एक तरफ तेल की कीमतें गिरी हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी शेयर बाजार अपने ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंच गया है. हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू थोड़ा चिंताजनक है:

महंगाई का झटका: अमेरिका में थोक महंगाई दर मार्च में बढ़कर 4% हो गई है (फरवरी में यह 3.4% थी).

ग्लोबल फोरकास्ट: IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) ने वैश्विक महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.4% कर दिया है, जो पहले 4.1% था.

विकास दर में कटौती: IMF ने 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक विकास दर का अनुमान 3.3% से घटाकर 3.1% कर दिया है.

Conclusion

कच्चे तेल की कीमतों में आई यह गिरावट फिलहाल एक 'मरहम' की तरह काम कर रही है. हालांकि, IMF की चेतावनी और बढ़ती थोक महंगाई दर यह बताती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी पूरी तरह संकट से बाहर नहीं निकली है. अगर अमेरिका और ईरान की बातचीत सफल रहती है, तो आने वाले महीनों में हम महंगाई से एक बड़ी राहत की उम्मीद कर सकते हैं.

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