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वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी बिकवाली देखी गई है, जिसके चलते इसके दाम 5-6 फीसदी थक लुढ़क गए हैं. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी बिकवाली देखी गई है, जिसके चलते इसके दाम 5-6 फीसदी थक लुढ़क गए हैं. वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और दुनिया के बड़े देशों में ईंधन की मांग में आई सुस्ती के चलते कच्चे तेल के ग्राफ में यह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.
अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) और अमेरिकी क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI), दोनों के ही दामों में इस बड़ी गिरावट के बाद दबाव देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिल सकता है.
अगर ब्रेंट क्रूड की बात करें तो इसका भाव करीब 5 फीसदी (करीब $4.9 यानी लगभग 470 रुपये) से भी ज्यादा टूट कर $94.61 प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो पहले लगभग $99.5 प्रति बैरल था. बता दें कि भारत ब्रेंट क्रूड की इंपोर्ट करता है. वहीं अगर बात डब्ल्यूटीआई की करें तो उसमें करीब 6 फीसदी तक की गिरावट आई है, जिसके बाद वह 90 डॉलर से भी नीचे $88.31 तक पहुंच गया.
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के अचानक टूटने के पीछे की सबसे बड़ी वजह ईरान से आई अच्छी खबर है. ईरान के सरकारी टीवी ने बताया है कि जल्द ही अमेरिका के साथ डील हो सकती है. इसके चलते उम्मीद लगाई जा रही है कि अब जल्द ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज खुल सकता है. बता दें कि यहां से दुनिया का करीब 20 फीसदी कच्चा तेल गुजरता है.
भारत अपनी जरूरत का करीब 80 से 85 फीसदी कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात (Import) करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली कोई भी हलचल भारतीय अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करती है:
पेट्रोल-डीजल की कीमतें: अगर कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक कम रहते हैं, तो घरेलू तेल मार्केटिंग कंपनियां (HPCL, BPCL, IOCL) पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती कर सकती हैं. बता दें कि पिछले कुछ दिनों में सरकार ने डीजल-पेट्रोल के भाव में चार बार में करीब 7.5 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है.
कम होगा आयात बिल: सस्ते कच्चे तेल से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा और देश का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) कम करने में मदद मिलेगी.
महंगाई से राहत: डीजल की कीमतें घटने से देश में माल ढुलाई (Transportation) सस्ती हो जाती है, जिससे फल, सब्जियां और रोजमर्रा के सामानों की कीमतें कम होती हैं और आम जनता को महंगाई से राहत मिलती है.
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दामों में 5-6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बूस्टर साबित हो सकती है. हालांकि, घरेलू बाजार में इसका फायदा आम जनता को कितनी जल्दी मिलता है, यह पूरी तरह से आने वाले दिनों में सरकारी तेल कंपनियों के रुख और सरकारी टैक्स नीतियों पर निर्भर करेगा.
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