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$100 के करीब लुढ़का ब्रेंट क्रूड. (Image Source- AI)
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. हाल ही में जिस क्रूड ऑयल में तेजी की लहर थी, उसमें अब अचानक गिरावट आई है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक Brent Crude करीब 3% गिरकर $100.32 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है. वहीं अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड में करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई है.
घरेलू कमोडिटी बाजार की बात करें तो MCX क्रूड ऑयल में करीब 4.5% की गिरावट देखने को मिली है. यह गिरावट ऐसे समय आई है जब पिछले कुछ दिनों से मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी का माहौल बना हुआ था.
बीते दिनों अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में तेजी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव रहे. ईरान-इजरायल संघर्ष और मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य हालात ने तेल बाजार को अस्थिर बना दिया था. इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ते हुए $105 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई थीं.
यह स्तर करीब तीन साल में पहली बार देखने को मिला था, जब ब्रेंट $104 के ऊपर टिकने की कोशिश कर रहा था. हालांकि अब बाजार में कुछ मुनाफावसूली और सप्लाई को लेकर आशंकाओं में कमी आने से कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है.
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भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है. देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल, LPG और प्राकृतिक गैस के आयात से पूरा करता है.
यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में होने वाला हर उतार-चढ़ाव सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है.
अगर कच्चा तेल महंगा होता है तो-
इसलिए तेल बाजार की हलचल पर सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की नजर रहती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमत $90 प्रति बैरल के आसपास रहती है तो सरकार और तेल कंपनियां इसे कुछ हद तक संभाल सकती हैं.
लेकिन अगर कीमतें $100 या उससे ऊपर लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो इसका असर धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है.
ऐसी स्थिति में-
यानी कच्चे तेल का महंगा होना सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा असर पेट्रोल-डीजल पर पड़ता है, लेकिन यह तुरंत नहीं दिखता.
भारत में ईंधन की कीमतें तय करते समय कई कारकों को देखा जाता है-
इसलिए तेल की कीमतें घटने के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने में कुछ समय लग सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा काफी हद तक मिडिल ईस्ट की स्थिति पर निर्भर करेगी. अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो कीमतों में फिर तेजी आ सकती है. वहीं हालात सामान्य होते हैं तो तेल की कीमतों में और गिरावट भी संभव है.
कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट से बाजार को कुछ राहत जरूर मिली है. Brent करीब $100 प्रति बैरल के आसपास है और MCX तथा WTI में भी तेज गिरावट देखी गई है.
हालांकि मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल बाजार अभी भी अस्थिर बना हुआ है. ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की चाल पर भारत समेत दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं की नजर बनी रहेगी.