स्मार्टफोन बाजार पर मंडराया संकट! चिप की कमी से 68% तक घटी बड़े ब्रांड्स की बिक्री, इस कंपनी पर भी दिखेगा असर

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में आई बड़ी गिरावट. CLSA की रिपोर्ट में मोटोरोला और ओप्पो जैसे ब्रांड्स की बिक्री घटने का खुलासा. डिक्सन टेक्नोलॉजीज के लिए क्या हैं संकेत? डिटेल में पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
स्मार्टफोन बाजार पर मंडराया संकट! चिप की कमी से 68% तक घटी बड़े ब्रांड्स की बिक्री, इस कंपनी पर भी दिखेगा असर

स्मार्टफोन बाजार पर मंडराया संकट! (Image Source- AI)

अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं या मोबाइल बाजार में निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. स्मार्टफोन की दुनिया में इस समय सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म CLSA की ताजा रिपोर्ट ने बाजार में हलचल मचा दी है. रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय स्मार्टफोन बाजार पर इस समय काफी दबाव है और लोग नया फोन खरीदने से बच रहे हैं.

इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण फोन के अंदर लगने वाली मेमोरी चिप है. इसकी कीमतों में उछाल और मार्केट में इसकी कमी ने मोबाइल कंपनियों के साथ-साथ आम आदमी की जेब पर भी असर डाला है. आइए समझते हैं कि आखिर बाजार में ये सुस्ती क्यों आई है और इसका असर किन कंपनियों पर होने वाला है.

स्मार्टफोन की बिक्री में 25 फीसदी की बड़ी गिरावट

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जनवरी का महीना स्मार्टफोन कंपनियों के लिए काफी भारी रहा है. CLSA की रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन की कुल बिक्री में सालाना (YoY) और तिमाही (QoQ) आधार पर 25 फीसदी की गिरावट देखी गई है. यह एक बड़ा झटका है क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल बाजारों में से एक है.

मोटोरोला (Motorola)20% से 68% की रेंज मेंFY26 के टार्गेट पूरे करना चुनौतीपूर्ण
ओप्पो (Oppo)भारी गिरावट दर्जमैन्युफैक्चरिंग वॉल्यूम पर सीधा असर
रियलमी (Realme)बिक्री पर बड़ा दबावग्रोथ अनुमानों (Estimates) पर चिंता
ट्रांसन (Transsion)वॉल्यूम में बड़ी कमीभविष्य की कमाई पर संशय

बिक्री घटने की सबसे मुख्य वजह फोन की कीमतों में बढ़ोतरी है. सितंबर के बाद से स्मार्टफोन की औसत कीमत (ASP) में करीब 8 फीसदी का इजाफा हुआ है. जब फोन महंगे हुए, तो ग्राहकों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए. खास तौर पर बजट फोन यानी सस्ते स्मार्टफोन खरीदने वालों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है.

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मेमोरी चिप की कमी ने बिगाड़ा खेल

अब सवाल यह उठता है कि फोन महंगे क्यों हो रहे हैं? इसका जवाब है मेमोरी चिप. रिपोर्ट में बताया गया है कि मेमोरी चिप की उपलब्धता को लेकर काफी चिंताएं बनी हुई हैं.

सप्लाई की समस्या: क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को मेमोरी चिप की सप्लाई में प्राथमिकता मिल रही है, जिसकी वजह से स्मार्टफोन और पीसी बनाने वाली कंपनियों को पर्याप्त चिप नहीं मिल पा रही हैं.

बजट फोन पर असर: जो लोग सस्ते या एंट्री-लेवल फोन बनाते हैं, उन पर मेमोरी की बढ़ती कीमतों का दबाव सबसे ज्यादा है.

कीमतों का बोझ: चिप महंगी होने की वजह से कंपनियों को मजबूरी में फोन के दाम बढ़ाने पड़े हैं.

डिक्सन टेक्नोलॉजीज और बड़े ब्रांड्स पर संकट

इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर दिख रहा है जो मोबाइल बनाने का काम करती हैं. डिक्सन टेक्नोलॉजीज (Dixon Technologies) के मुख्य ग्राहक जैसे मोटोरोला, ट्रांसन, ओप्पो और रियलमी के प्रदर्शन में भारी गिरावट आई है.

इन ब्रांड्स की बिक्री में 20 फीसदी से लेकर 68 फीसदी तक की सालाना कमी दर्ज की गई है. इस वजह से अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या डिक्सन जैसी कंपनियां साल 2026 और 2027 के लिए तय किए गए अपने ग्रोथ के लक्ष्यों को पूरा कर पाएंगी या नहीं. निवेशकों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है.

क्या है भविष्य की राह?

बाजार में छाई इस सुस्ती के बीच कुछ ऐसी चीजें भी हैं जो आने वाले समय में राहत दे सकती हैं. रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक पहलुओं का भी जिक्र किया गया है-

पॉजिटिव फैक्टर्स: प्रेस नोट 3 के तहत मिलने वाली मंजूरियों में ढील और HKC के साथ जॉइंट वेंचर (JV) को एक अच्छा संकेत माना जा रहा है. हालांकि, बाजार के जानकार पहले से ही इसे अपनी गणना में शामिल कर चुके हैं.

इन पर रहेगी नजर: आने वाले समय में अगर मेमोरी चिप की कीमतें कम होती हैं और वीवो (Vivo) के साथ जॉइंट वेंचर का काम पूरा होता है, तो बाजार में फिर से रौनक लौट सकती है.

नए रास्ते तलाशने की चुनौती: डिक्सन टेक्नोलॉजीज के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह मीडियम टर्म में विकास के नए रास्ते तलाशे ताकि स्मार्टफोन मार्केट की सुस्ती का असर कम किया जा सके.

निवेशकों के काम की बात

भारतीय स्मार्टफोन बाजार इस समय एक कठिन दौर से गुजर रहा है. मेमोरी चिप की कमी और बढ़ती कीमतों ने डिमांड पर ब्रेक लगा दिया है. मोटोरोला और ओप्पो जैसे बड़े ब्रांड्स की बिक्री में गिरावट सीधे तौर पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रभावित कर रही है. जब तक चिप की कीमतें स्थिर नहीं होतीं और सप्लाई चेन दुरुस्त नहीं होती, तब तक मोबाइल बाजार में ये चुनौतियां बनी रह सकती हैं. निवेशकों और ग्राहकों, दोनों को ही आने वाले कुछ महीनों तक बाजार की चाल पर करीबी नजर रखनी होगी.

सवाल- जनवरी में स्मार्टफोन की बिक्री में कितनी गिरावट आई है?

जवाब- रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्टफोन की बिक्री में सालाना और तिमाही आधार पर 25 फीसदी की कमी आई है.

सवाल- मोबाइल फोन महंगे होने की सबसे बड़ी वजह क्या है?

जवाब- मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतें और इसकी कमी की वजह से स्मार्टफोन की औसत कीमतों (ASP) में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

सवाल- डिक्सन टेक्नोलॉजीज के ग्राहकों के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ा है?

जवाब- मोटोरोला, ओप्पो और रियलमी जैसे ब्रांड्स की बिक्री में 20 फीसदी से 68 फीसदी तक की गिरावट देखी गई है.

सवाल- मेमोरी चिप की सप्लाई में किसे प्राथमिकता मिल रही है?

जवाब- स्मार्टफोन और पीसी कंपनियों के मुकाबले क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को मेमोरी चिप की एलोकेशन में प्राथमिकता मिल रही है.

सवाल- बाजार में सुधार के लिए कौन से ट्रिगर्स जरूरी हैं?

जवाब- मेमोरी चिप की कीमतों में कमी और वीवो के साथ जॉइंट वेंचर का पूरा होना मार्केट के लिए मुख्य कैटलिस्ट साबित हो सकते हैं.