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2025 के आखिरी कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 545 अंक मजबूत होकर 85220 पर बंद हुआ. इस साल सेंसेक्स ने नेट आधार पर 8.5% का रिटर्न दिया है और सेंसेक्स में 6713 अंकों का उछाल दर्ज किया गया. BSE लिस्टेड कंपनियों का टोटल मार्केट कैप 475.70 लाख करोड़ रुपए पर बंद हुआ जो 1 जनवरी को 444.44 लाख करोड़ रुपए था. इस तरह इस साल निवेशकों की कुल संपत्ति में 31 लाख करोड़ रुपए का इजाफा दर्ज किया गया.
बता दें कि पिछले साल 2024 में सेंसेक्स में 5898 अंक यानी 8.16 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया था और बीएसई में शामिल कंपनियों का मार्केट कैप 77.66 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 441.95 लाख करोड़ रुपए हो गया था. 2023 में बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 81.90 लाख करोड़ रुपए बढ़ा था.
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, टैरिफ और ट्रेड डील को लेकर अनसर्टेनिटी, हाई वैल्युएशन और रुपए में रिकॉर्ड कमजोरी के बावजूद भारतीय बाजार ने निवेशकों को पॉजिटिव रिटर्न दिया है. हालांकि, अपने ग्लोबल और इमर्जिंग मार्केट पीयर्स के मुकाबले इसने अंडरपरफॉर्म किया है. एक्सपर्ट ने कहा कि DII की लगातार खरीदारी और मजबूत जीडीपी डेटा ने बाजार में बिकवाली को संभाला है.
इनक्रेड वेल्थ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नितिन राव ने कहा, ‘‘ विदेशी निवेशकों की निकासी एक चुनौती बनी रही, इसके बावजूद बाजार की मजबूती स्पष्ट दिखी. 2025 में भारतीय बाजार के प्रमुख कारकों में मजबूत घरेलू निवेशक समर्थन शामिल रहा.’’ BSEई में शामिल कंपनियों का बाजार पूंजीकरण पिछले साल अप्रैल में पहली बार 400 लाख करोड़ रुपए के स्तर को पार कर गया था.
एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोन्मुदी आर. ने कहा कि 2025 को भारतीय शेयरों के लिए कंसोलिडेशन और बदलाव का वर्ष कहा जा सकता है. उन्होंने कहा, ‘‘ कई वर्षों तक दोहरे अंक के मजबूत ‘रिटर्न’ के बाद इस साल मानक सूचकांकों में अपेक्षाकृत सीमित बढ़त रही. सेंसेक्स और निफ्टी में साल भर में करीब 8-10 फीसदी की वृद्धि हुई. वैश्विक प्रतिकूलताओं, विदेशी पूंजी की निकासी और मूल्यांकन में सुधार के बीच यह प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा.’’
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा कि घरेलू स्तर पर बाजारों को कमजोर कॉरपोरेट इनकम ग्रोथ, हाई वैल्युएशन, रुपए की कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी का सामना करना पड़ा जिससे स्टेबल माइक्रो इकोनॉमिक कंडीशन के बावजूद सेंटिमेंट सतर्कता भरा रहा. वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, शुल्क से जुड़ी अनिश्चितताएं और अमेरिका के केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर बदलती अपेक्षाओं का बाजारों पर असर पड़ा. विदेशी निवेशकों ने 2025 में शेयर बाजार से रिकॉर्ड 1.6 लाख करोड़ रुपए (करीब 18 अरब अमेरिकी डॉलर) की निकासी की.
इस साल आरंभिक सार्वजनिक निर्गमों (IPO) की रिकॉर्ड संख्या ने भी बाजार को मजबूती दी. प्रमुख IPO में टाटा कैपिटल का 15,512 करोड़ रुपए का निर्गम सबसे आगे रहा. इसके बाद एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज (12,500 करोड़ रुपए), एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (11,607 करोड़ रुपए), हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज (8,750 करोड़ रुपए), लेंसकार्ट सॉल्यूशंस (7,278 करोड़ रुपए) और बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स (6,632 करोड़ रुपए) का स्थान रहा.
एसबीआई सिक्योरिटीज के मौलिक शोध प्रमुख सनी अग्रवाल ने कहा कि 2020-24 के दौरान मजबूत रिटर्न के बाद 2025 कंसोलिडेशन और औसत की ओर लौटने का वर्ष रहा. कुछ क्षेत्रों में ऊंचे मूल्यांकन, आय में सुस्ती एवं बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं से 2025 की पहली तिमाही में बाजार में सुधार आया जिसके बाद अप्रैल से बड़ी कंपनियों में धीरे-धीरे ‘रिकवरी’ देखने को मिली.